मुलायम को पीछे छोड़ खुद मैदान में उतरे अखिलेश, अब धरतीपुत्र का क्या होगा?

Daily Samvad
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⏱️ 5 मिनट पढ़ने का समय|📝 526 शब्द|📅 25 Mar 2019

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के उम्मीदवार बनने को लेकर चली एक लंबी उठापटक रविवार को खत्म हो गई। तय हो गया कि पिता की विरासत यानी आजमगढ़ लोकसभा सीट पर दावेदारी करने अखिलेश यादव ही मैदान में उतरेंगे।

आपको बता दें कि मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 2014 में आजमगढ़ सीट से महज 63 हजार वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। मुलायम के चेहरे पर वोटों का यह अंतर अखिलेश के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं है जबकि अब तो शिवपाल भी एसपी खेमे से अलग हो गए हैं।

एसपी चीफ अखिलेश यादव पर आजमगढ़ फतह करने का जिम्मा है तो वेस्ट यूपी की रामपुर सीट आजम खान के हवाले की गई है। सवाल यह है कि आखिर आजमगढ़ से अखिलेश और रामपुर से आजम खान क्यों चुनाव लड़ रहे हैं। इस बीच, चर्चा है कि अभिनेत्री जया प्रदा बीजेपी में शामिल हो सकती हैं और रामपुर से आजम खान के खिलाफ चुनाव मैदान में उतर सकती हैं।

अखिलेश कन्नौज में भी पिता मुलायम सिंह यादव की विरासत संभाल चुके हैं। वर्ष 2000 में मुलायम के कन्नौज सीट खाली करने पर अखिलेश पहली बार लोकसभा पहुंचे थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में एसपी को पहली बार पूर्ण बहुमत मिला तो मुलायम ने मुख्यमंत्री की कुर्सी भी अखिलेश को सौंप दी थी।

शिवपाल फैक्टर को कम करना चाहते हैं अखिलेश?

आजमगढ़ से अखिलेश के चुनाव लड़ने के राजनीतिक मायने भी हैं। पूर्वांचल समाजवादी पार्टी का बड़ा गढ़ रहा है, लेकिन 2014 में मोदी लहर ने एसपी के इस सबसे मजबूत गढ़ को ध्वस्त कर दिया था। पूर्वांचल से एसपी को सिर्फ एक सीट पर ही संतोष करना पड़ा था।

यह सीट भी आजमगढ़ थी, जो मुलायम ने तकरीबन 63 हजार वोटों के अंतर से जीती थी। पूर्वांचल में एसपी का दबदबा बरकरार रहे इसी रणनीति के तहत मुलायम ने मैनपुरी सीट छोड़ी और आजमगढ़ सीट बरकरार रखी। अब इस सीट से चुनाव लड़कर अखिलेश कार्यकर्ताओं को संदेश देना चाहते हैं कि पार्टी दमदार तरीके से चुनाव लड़ेगी। इस दांव से अखिलेश पूर्वांचल में शिवपाल फैक्टर भी कम करना चाहते हैं।

आसान नहीं आजमगढ़ में अखिलेश की राह

अखिलेश यादव ने अपना पहला चुनाव वर्ष 2000 में कन्नौज से लड़ा था। यह लोकसभा उपचुनाव था। उस समय मुलायम ने कन्नौज सीट अखिलेश के लिए खाली थी। 2004 के आम चुनाव में भी अखिलेश ने कन्नौज से चुनाव लड़ा और बीएसपी के ठाकुर राजेश को एकतरफा हराया। 2009 में भी अखिलेश की जीत का सिलसिला नहीं रुका और उन्होंने कन्नौज सीट से ही बीएसपी के महेश चंद्र वर्मा को शिकस्त दी।

इसी साल उन्होंने फिरोजाबाद सीट पर हुए उपचुनाव में भी जीत दर्ज की, लेकिन बाद में यह सीट खाली कर दी। अखिलेश के बाद डिंपल यादव कन्नौज से सांसद बनीं। वर्ष 2014 में कन्नौज से डिंपल यादव ने महज 19 हजार वोटों के अंतर से मुकाबला अपने नाम किया था। चुनावी विश्लेषकों के मुताबिक, अखिलेश के लिए आजमगढ़ सीट जीतना आसान नहीं होगा। मोदी लहर में मुलायम भी सिर्फ 63,204 वोटों से जीत पाए थे।

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