कैफे कॉफी डे के फाउंडर वीजी सिद्धार्थ का शव नदी में मिला, इस दिन हुए थे लापता

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⏱️ 6 मिनट पढ़ने का समय|📝 780 शब्द|📅 31 Jul 2019

मेंगलुरु। देश की सबसे बड़ी कॉफी चेन कैफे कॉफी डे (सीसीडी) के फाउंडर और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के दामाद वीजी सिद्धार्थ (60) का शव बुधवार सुबह मेंगलुरु की नेत्रावती नदी से मिला। मेंगलुरु के विधायक यूटी खादर के मुताबिक, सिद्धार्थ के दोस्तों और रिश्तेदारों ने शव की शिनाख्त कर ली है।

सोमवार रात उनके लापता होने के बाद 25 तैराकों समेत 200 लोग सर्च ऑपरेशन में जुटे थे। इस दौरान कोस्ट गार्ड के जहाज आईसीजीएस राजदूत और एसीवी (एच-198) की भी मदद ली गई। उधर, पुलिस का कहना है कि मामला पूरी तरह आत्महत्या का लग रहा है लेकिन जांच पूरी होने तक कुछ नहीं कहा जा सकता।

27 जुलाई को लिखा सिद्धार्थ का कथित पत्र सामने आया था, जिसमें उन्होंने इक्विटी पार्टनर और कर्जदाताओं के दबाव का जिक्र किया था। उन्होंने लिखा था कि मैं बतौर व्यवसायी नाकाम रहा। पुलिस पूछताछ में ड्राइवर ने बताया था कि सिद्धार्थ उलाल शहर में स्थित पुल तक घूमने के लिए आए थे। वहां उन्होंने कार रुकवाई और पैदल ही निकल गए। मैं उनका इंतजार कर रहा था। 90 मिनट तक वापस नहीं आए तो पुलिस को सूचना दी।

कारोबारियों को आत्मसम्मान नहीं खोना चाहिए: महिंद्रा

महिंद्रा एंड महिंद्रा के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने सिद्धार्थ के बारे में कहा है कि मैं उन्हें नहीं जानता और उनके वित्तीय हालातों के बारे में भी पता नहीं। मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि बिजनेस में नाकामी की वजह से कारोबारियों को आत्मसम्मान नहीं खोना चाहिए।

‘कर्जदाताओं के दबाव से टूट चुका हूं’

पत्र में सिद्धार्थ ने लिखा था, ‘‘बेहतर प्रयासों के बावजूद मैं मुनाफे वाला बिजनेस मॉडल तैयार करने में नाकाम रहा। मैंने लंबे समय तक संघर्ष किया लेकिन अब और दबाव नहीं झेल सकता। एक प्राइवेट इक्विटी पार्टनर 6 महीने पुराने ट्रांजेक्शन से जुड़े मामले में शेयर बायबैक करने का दबाव बना रहा है। मैंने दोस्त से बड़ी रकम उधार लेकर ट्रांजेक्शन का एक हिस्सा पूरा किया था। दूसरे कर्जदाताओं द्वारा भारी दबाव की वजह से मैं टूट चुका हूं। आयकर के पूर्व डीजी ने माइंडट्री की डील रोकने के लिए दो बार हमारे शेयर अटैच किए थे। बाद में कॉफी डे के शेयर भी अटैच कर दिए थे। यह गलत था जिसकी वजह से हमारे सामने नकदी का संकट आ गया।’’

‘‘मेरी विनती है कि आप सभी मजबूती से नए मैनेजमेंट के साथ बिजनेस को आगे बढ़ाते रहें। सभी गलतियों के लिए मैं जिम्मेदार हूं। सभी वित्तीय लेन-देनों के लिए मैं जिम्मेदार हूं। मेरी टीम, ऑडिटर्स और सीनियर मैनेजमेंट को मेरे ट्रांजेक्शंस के बारे में जानकारी नहीं है। कानून को सिर्फ मुझे जिम्मेदार ठहराना चाहिए। मैंने परिवार या किसी अन्य को इस बारे में नहीं बताया।’’

मेरा इरादा किसी को गुमराह या धोखा देने का नहीं था

‘‘मेरा इरादा किसी को गुमराह या धोखा देने का नहीं था। एक कारोबारी के तौर पर मैं विफल रहा। उम्मीद है कि एक दिन आप समझेंगे, मुझे माफ कर दीजिए। हमारी संपत्तियों और उनकी संभावित वैल्यू की लिस्ट संलग्न कर रहा हूं। हमारी संपत्तियां हमारी देनदारियों से ज्यादा हैं। इनसे सभी का बकाया चुका सकते हैं।’’

न्यूज एजेंसी ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया है कि आयकर विभाग ने सिद्धार्थ के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की थी। माइंडट्री के शेयर बेचने से उन्हें 3,200 करोड़ रुपए मिले थे। उन्होंने 300 करोड़ रुपए के टैक्स में से सिर्फ 46 करोड़ रुपए जमा करवाए थे।

1993 में सिद्धार्थ ने कॉफी-डे ग्लोबल की शुरुआत की

सिद्धार्थ का जन्म कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले में हुआ था। उनका परिवार 140 साल से कॉफी प्लांटेशन से जुड़ा हुआ है। 1993 में सिद्धार्थ ने कॉफी-डे ग्लोबल (अमलगेमेटेड बीन कॉफी ट्रेडिंग कंपनी) की शुरुआत की थी। उस वक्त रेवेन्यू सिर्फ 6 करोड़ रुपए था।

वित्त वर्ष 2017-18 में कैफे कॉफी-डे ग्लोबल का रेवेन्यू 1,777 करोड़ रुपए और 2018-19 में 1,814 करोड़ रुपए पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष खत्म होने पर कंपनी को 2,250 करोड़ रुपए के रेवेन्यू की उम्मीद है। लेकिन, दूसरा पहलू यह भी है कि पिछले कुछ सालों से सिद्धार्थ कॉफी बिजनेस समेत अन्य कारोबारों में नकदी संकट से जूझ रहे थे।

सिद्धार्थ ने पिछले महीने माइंडट्री कंपनी में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेची थी

सिद्धार्थ ने पिछले महीने आईटी कंपनी माइंडट्री में अपनी पूरी हिस्सेदारी लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) को 3,000 करोड़ रुपए में बेची थी। इससे पहले वे 21% होल्डिंग के साथ माइंडट्री के सबसे बड़े शेयरधारक थे। कॉफी के बिजनेस में सफल कारोबारी के तौर पर उनकी खास पहचान थी। कर्नाटक में सीसीडी के पास 12,000 एकड़ जमीन में कॉफी का प्लांटेशन है। इस साल मार्च तक देशभर में सीसीडी के 1,752 कैफे थे।

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