पंजाब में अनाज भंडार को लेकर किल्लत, केंद्रीय मंत्री पासवान से मिलेंगे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह

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⏱️ 4 मिनट पढ़ने का समय|📝 494 शब्द|📅 01 Nov 2019

डेली संवाद, चंडीगढ़
पंजाब में अनाज भंडारण के लिए अपेक्षित जगह की किल्लत के मामले को गंभीरता से लेते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने शुक्रवार को भारत सरकार के समक्ष माँग रखी है कि वह ओपन मार्किट सेल स्कीम के अधीन पंजाब के अनाज भंडार को तेज़ी से उठाने की आज्ञा दें जिससे इस समस्या से निजात पाई जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जल्द ही केंद्रीय खाद्य मंत्री राम विलास पासवान को भी मिलकर भंडारण की समस्या के हल के लिए उनके निजी दख़ल की माँग करेंगे और अगर ज़रूरत पड़ी तो वह यह मामला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास भी उठाएंगे। राज्य में चल रहे धान की खरीद प्रबंधों का जायज़ा लेने के लिए बुलाई उच्च स्तरीय मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने खाद्य और सिविल सप्लाई विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिए कि वह एफ.सी.आई. को भंडारण के फर्क की असली स्थिति की रिपोर्ट मुहैया करवाने के लिए कहें जिससे राज्य केंद्र सरकार द्वारा तयशुदा भंडारण स्टॉक न उठाने की सूरत में इस मामले के हल के लिए व्यापक नीति तैयार कर सके।

राज्य की भंडारण समस्या का भी हल हो सकेगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी.डी.एस.) का कोटा बढ़ाने का मामला भी केंद्र सरकार के समक्ष मुद्दा उठाएंगे जिससे भंडार किये गए अतिरिक्त अनाज का वितरण हो सके जिससे राज्य की भंडारण समस्या का भी हल हो सकेगा। राज्य में इस समय पर 40 लाख मीट्रिक टन भंडारण सामथ्र्य की कमी है। खरीफ की फ़सल के बढिय़ा उत्पादन और धान की खरीद की तेज़ी को देखते हुए मौजूदा भंडारण सामथ्र्य पर और भी दबाव पड़ेगा।

पंजाब मंडीकरण बोर्ड के चेयरमैन लाल सिंह द्वारा प्रस्तावित पेशकश पर स्वीकृति देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बोर्ड द्वारा शिनाख्त किये 93 मंडी शैडों को फूडग्रेन के भंडारण के लिए इस्तेमाल किया जायेगा। उन्होंने पंजाब स्टेट वेयरहाऊसिंग कोर्पोरेशन और मार्कफैड के एम.डी. को वेयरहाऊसिंग का बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए एक नक्शा तैयार करने को कहा।

प्रणाली को बदलने से पहले व्यापक अध्ययन करवाना चाहिए

केंद्र सरकार द्वारा न्युनतम समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) को बदलने के प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने चेतावनी दी कि लम्बे समय से सफल चल रही प्रणाली को बदलने से पहले व्यापक अध्ययन करवाना चाहिए और इसको लागू करने से पहले पूरी योजनाबंदी की ज़रूरत होती है जो कि किसानों के हित सुरक्षित रखने के लिए सबसे ज़रूरी है।

राज्य में खरीद प्रबंधों की रफ़्तार पर तसल्ली ज़ाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने खाद्य विभाग की परेशानी मुक्त सुविधाजनक खरीद और लिफ्टिंग और साथ-साथ किसानों को भुगतान की कोशिशों को सराहा। इस दौरान खाद्य विभाग के प्रमुख सचिव ने खुलासा किया कि मौजूदा खरीफ की फ़सल सीजन के दौरान 170 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के अंतर्गत अब तक 108.50 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। उन्होंने आशा अभिव्यक्त की कि सारी खरीद का काम 15 दिसंबर की आखिरी तारीख़ से पहले ही 30 नवंबर तक मुकम्मल हो जायेगा।

















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