पंजाब में इंडस्ट्री चलाने, गांवों में हर तरह व शहरों में चल रहे प्रोजैक्ट के निर्माण की अनुमति के साथ साइकिल से लेबर को आने-जाने की छूट, पढ़ें गाइडलाइन

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डेली संवाद, चंडीगढ़
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के निर्देशों पर पंजाब के गृह विभाग ने जिला अधिकारियों को राज्य भर में औद्योगिक गतिविधियों की आज्ञा देने के लिए विस्तृत दिशा निर्देश जारी किये हैं। उपयुक्त निर्माण विशेष तौर पर में निजी, रिहायशी /व्यापारिक इमारतों की गतिविधियों के दायरे को स्पष्ट करते हुए राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिना किसी पाबंदी के हर किस्म की नये निर्माण की आज्ञा दी है।

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शहरी क्षेत्रों में कर्मचारियों की उपलब्धता के आधार पर सिर्फ चल रहे प्रोजैक्ट ही जारी रखे सकते हैं। इसी अनुसार पहले से चल रहे कामों को जारी रखने /दोबारा शुरू करने पर कोई पाबंदी नहीं है जिसमें निजी, रिहायशी /व्यापारिक इमारतें शामिल हैं जिन स्थानों पर कर्मचारी पहले ही काम कर रहे हैं। इस अनुसार 15 अप्रैल केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा -निर्देशों की धारा 16 में निर्माण की गतिविधियों में पहले से लागू शर्त के अंतर्गत व्यक्तियों द्वारा मकान /व्यापारिक /सस्थागत इमारतों का निर्माण शामिल किया जायेगा।

औद्योगिक ऐसोसीएशनों के साथ करें मीटिंग

इस संबंधी जानकारी देते हुये एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) सतीश चंद्रा ने इस सम्बन्ध में विस्तार से दिशा निर्देश जारी किये हैं जो राज्य में पहले से ही भारत सरकार द्वारा प्रवानित औद्योगिक गतिविधियों को यकीनी बनाते हैं। इस मुताबिक जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह औद्योगिक ऐसोसीएशनों को मीटिंग के लिए बुलाने और उनको प्रवानित क्षेत्रों में दोबारा कार्यवाही शुरू करने के लिए प्रेरित करें।

प्रवक्ता ने आगे बताया कि राज्य के औद्योगिक प्रबंधन को धारा 15 के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा निर्देशों के अनुसार स्टैंडर्ड ओपरेटिंग पोसीजर (ऐस.ओ.पी.) लागू करने के लिए भी कहा गया है, जिसके अंतर्गत उद्योगों को विशेष आर्थिक जोन और एक्सपोर्ट ओरीऐंटिड यूनिटस (ई.ओ.यूज़), औद्योगिक अस्टेटों, औद्योगिक टाऊनशिपस और ग्रामीण क्षेत्र में एस.ओ.पी. की पालना करने वाले उद्योगों को आज्ञा दी गई है।

कर्मचारियों की थर्मल स्क्रीनिंग जरूरी

एस.ओ.पी. के अंतर्गत प्रबंधन कर्मचारियों के आने -जाने के लिए विशेष प्रबंध, मज़दूरों के लिए रहने की सुविधा, कर्मचारियों का मैडीकल बीमा, अस्पतालों के साथ तालमेल और अदारों के रोगाणु-रहित प्रबंधों, कर्मचारियों की थर्मल स्क्रीनिंग और हाथ धोने आदि की व्यवस्था करना ज़रूरी है।

प्रवक्ता ने आगे कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के 15 अप्रैल के दिशा -निर्देशों की तर्ज पर फैक्ट्री में मज़दूरों को रखने का अर्थ है कि मज़दूरों को सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट, आटो -रिक्शा या स्टेट ट्रांसपोर्ट बसों आदि पर निर्भर नहीं करना पड़ेगा। कर्मचारियों को साइकिल पर या पैदल जाने की आज्ञा दी जा सकती है अगर वह उद्योग से थोड़ी दूरी पर रहते हैं।

पंजाब उद्योग को राहत देने संबंधी जानकारी देते हुये प्रवक्ता ने कहा कि जिन उद्योगों को इस बात का अंदेशा था कि फैक्ट्री में किसी कर्मचारी के कोविड -19 से पॉजिटिव पाये जाने पर जिला अधिकारी सी.ई.ओ. को कैद करने समेत कानूनी कार्यवाही कर सकता है, संबंधी केंद्रीय गृह सचिव ने 23 अप्रैल को पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि 15 अप्रैल, 2020 को जारी संशोधित दिशा निर्देशों में बता दिया था कि ऐसी कोई धारा नहीं है। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करने वाले स्थानों पर औद्योगिक और व्यापारिक अदारों को स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा सूचित एस.ओ.पी. और प्रोटोकोल की पालना करना लाजि़मी है।

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उद्योगों को जिला अधिकारियों की मंज़ूरी

प्रवक्ता ने आगे कहा कि केंद्रीय गृह सचिव ने 3 अप्रैल को कहा था कि गतिविधियों को फिर शुरू करने के लिए उद्योगों को कोई नया लायसेंस या कानूनी मंजूरी की ज़रूरत नहीं है। इसी तरह गृह मंत्रालय ने अलग तौर पर स्पष्ट किया है कि काम को फिर शुरू करने, उद्योगों को जिला अधिकारियों की मंज़ूरी की ज़रूरत होगी। अगर उद्योग यह शर्तें मानते हैं तो उन्होंने एस.ओ.पी. को लागू करने के लिए उचित प्रबंध कर लिए हैं और इस प्रभाव के लिए स्वै-घोषणा की है तो वह कार्य फिर शुरू कर सकते हैं।

प्रवक्ता ने आगे कहा कि जिला अधिकारियों से कर्मचारियों को छोडऩे और ले जाने के लिए पासों की ज़रूरत होगी। प्रबंधन को अपने और वाहनों के रास्ते के लिए भी पास की ज़रूरत होगी। इस अनुसार उद्योगों को चलाने की आज्ञा दी जाऐगी और सी.आर.पी.सी की धारा 144 के अधीन जिला मैजिस्ट्रेटों के द्वारा जारी किये गए आदेशों में इस मुद्दे को स्पष्ट करते हुये सुधारा जा सकता है।

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