एलपीयू ने पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला समेत कइयों के खिलाफ आपराधिक और मानहानि का दावा ठोका

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डेली संवाद, जालंधर
फगवाड़ा की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) ने भाजपा के नेता व पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री विजय सांपला और उसके सहयोगियों पर मानहानि और आपराधिक मानहानि का दावा ठोंका है। भाजपा के नेता और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री विजय सांपला और उनके सहयोगियों के द्वारा झूठे और मानहानि के आरोपों को प्रकाशित करवाने के विरुद्ध सिविल मानहानि का केस दर्ज करवाने के अलावा एलपीयू ने अब उनके खिलाफ फगवाड़ा अदालत में एक और मामला दायर किया है।

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हालांकि इस मामले में जारी प्रेस नोट में लवली यूनिवर्सिटी ने सांपला के नाम पर हर जगह जी शब्द का इस्तेमाल करके उनके पूर्व पद के प्रति सम्मान व्यक्त किया है।। विश्वविद्यालय द्वारा यह आरोप लगाया गया है कि श्री विजय सांपला और उनके सहयोगी, बेटे श्री साहिल सांपला और समर्थक श्री अमित तनेजा ने एक-दूसरे के साथ मिलकर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के इरादे के साथ यूनिवर्सिटी पर झूठे, बेतुके औऱ बदनाम करने वाले आरोप लगाए हैं, जोकि धारा 500 व 34 आईपीसी के तहत आपराधिक मानहानि का अपराध है।

वे सभी हैरान, परेशान और असमंजस में हैं

विश्वविद्यालय ने शिकायत की है कि श्री विजय सांपला और उनके सहयोगियों द्वारा, विभिन्न मीडिया के माध्यम से, विश्वविद्यालय पर गलत आरोप लगाए जाने के बाद से आम जनता के साथ-साथ छात्र, उनके माता-पिता और जिन-जिन लोगों के साथ शिकायतकर्ता संपर्क में हैं, वे सभी हैरान, परेशान और असमंजस में हैं। वे सभी इन आरोपों की सच्चाई के बारे में पूछताछ करने के लिए विश्वविद्यालय में शिकायतकर्ता के अधिकारियों और कर्मचारियों से लगातार संपर्क कर रहे हैं।

श्री विजय सांपला और उनके सहयोगियों का ऐसा रवैया विश्वविद्यालय की सार्वजनिक छवि के लिए बहुत हानिकारक है, जिससे शिकायतकर्ता की प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विश्वविद्यालय ने आगे शिकायत की कि इससे विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को काफी मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न और आघात लगा है और इसने विद्यार्थी समुदाय और उनके माता-पिता के बीच चिंता और दहशत पैदा की है, और यह सब विश्वविद्यालय द्वारा कठिन मेहनत से प्राप्त की गई प्रसिद्धि और छवि को खराब करना है।

एलपीयू ने कोई गलत काम नहीं किया

विश्वविद्यालय ने आगे स्पष्ट किया है कि उसने कोई गलत काम नहीं किया है और यह कानून का पालन करने वाला विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय ने पंजाब सरकार और भारत सरकार द्वारा समय-समय पर लागू किए गए सभी संबंधित आदेशों और निर्देशों के अनुसार अनुपालन किया है और उन्हें लागू किया है। विश्वविद्यालय ने कहा है कि 13 मार्च, 2020 को, उच्च शिक्षा पंजाब विभाग ने 14 मार्च से 31 मार्च, 2020 तक कक्षाओं को निलंबित करने का आदेश दिया था।

विश्वविद्यालय ने तदनुसार कक्षाएं निलंबित कर दी। उस आदेश में हॉस्टल खाली करवाने का जिक्र नहीं था। 21 मार्च, 2020 को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी शैक्षणिक संस्थानों से कहा कि विद्यार्थियों को कोरोनवायरस वायरस के प्रकोप के मद्देनजर होस्टल्स में रहने दें। 27 मार्च, 2020 को, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने फिर से सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से होस्टल्स में रहने वाले विद्यार्थियों के आवास और सुरक्षा के लिए आग्रह किया।

लॉकडाउन लागू होने से पहले यूनिवर्सिटी को छोड़ा

होस्टल्स में 22625 विद्यार्थी थे, जिनमें से 20090 (90% के करीब) ने लॉकडाउन लागू होने से पहले यूनिवर्सिटी को छोड़ दिया था। हालांकि, हवाई-रेल यात्रा और परिवहन के अन्य साधनों, सार्वजनिक परिवहन और उड़ानों और आरक्षण रद्द होने के कारण, बाकी विद्यार्थी जो अपने गृहनगर वापस जाने के इच्छुक थे, नहीं जा सके, इसलिए भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार होस्टल्स में विद्यार्थियों को रहने की अनुमति दी गई थी। विश्वविद्यालय ने उल्लेख किया है कि वह अपने गृहनगर जाने के लिए होस्टल्स में रहने वाले विद्यार्थियों को भेजने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है और उसी के लिए विभिन्न सरकारी कार्यालयों में भी लिखा और संपर्क किया है।

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विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि श्री विजय सांपला के इस आरोप के उल्ट कि विश्वविद्यालय ने भूटान के विद्यार्थियों को उस समय वापस भेजा जब उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था, वह इस फैक्ट के तौर पर है कि विश्वविद्यालय ने भूटानी विद्यार्थियों के पहले समूह को 28 मार्च 2020 को भेजा था, जोकि 12 अप्रैल, 2020 से बहुत पहले है जबसे श्री विजय सांपला जी ने विश्वविद्यालय पर झूठे आरोप लगाने शुरू किए थे । इस मामले की सुनवाई अब 27 मई 2020 के लिए निर्धारित की गई है। यह ध्यान देने योग्य है कि अगर अदालत द्वारा तलब किया गया और साक्ष्य और परीक्षण के बाद दोषी पाए गए तो 2 साल तक की कैद की अधिकतम सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। (साभार-मैट्रो एनकाउंटर)

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