कालानमक धान को बनाएंगे बासमती की तरह अंतरराष्ट्रीय ब्रांड : योगी आदित्यनाथ

Daily Samvad
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Yogi Adityanath, Chief Minister of Uttar Pradesh
Punjab Government
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⏱️ 4 मिनट पढ़ने का समय|📝 446 शब्द|📅 16 Oct 2020

yogi aditya nath

डेली संवाद, लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि खुशबू और स्वाद में बेमिसाल, पौष्टिकता से भरपूर कालानमक धान को बासमती की तरह की ही अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के रूप में प्रतिष्ठा दिलाई जाएगी। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, वाराणसी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय, फैज़ाबाद,और कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ मिलकर कार्ययोजना तैयार की गई है।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को सीआईआई कृषि और खाद्य तकनीक समारोह 2020 तथा भारत अंतरराष्ट्रीय कृषि सप्ताह के शुभारंभ कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध के काल से ख्यातिलब्ध कालानमक धान, यूं तो सिद्धार्थ नगर जनपद के लिए ओडीओपी योजना में सम्मिलित है, लेकिन इसे जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) पूर्वांचल के 11 जिलों के लिए प्राप्त है। ऐसे में कालानमक की संभावना बढ़ जाती है। ब्रांड बनने से इसका निर्यात भी बढ़ेगा और किसानों की आय में इजाफा भी होगा।

ओडीओपी में अनेक कृषि उत्पादों को शामिल

मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडीओपी में अनेक कृषि उत्पादों को शामिल किया गया है। हमारी सरकार के लिए शुरू से ही अन्नदाता किसानों का हित सर्वोपरि रहा है। कृषि ऋण माफी से लेकर,पीएम फसल योजना, पीएम किसान सम्मान, प्रधानमंत्री सिंचाई जैसी योजनाएं इसकी सबूत है। किसान हितों के मद्देनजर किसान मंडियों को आधुनिक बनाया जा रहा है। इनमें से 24 में कोल्ड स्टोरेज और राइपेनिंग चैम्बर भी होंगे।

अमरोहा व वाराणसी में ‘मैंगो पैक हाउस’ का निर्माण हो रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा घोषित एक लाख करोड़ ‘आत्मनिर्भर भारत योजनांतर्गत मिले एक लाख करोड़ रुपये के पीएम पैकेज के जरिये पंचायत स्तर पर गोदामों का निर्माण होगा । प्रदेश में सर्वाधिक 92 फीसदी किसान लघु सीमांत हैं। सरकार का इन पर विशेष ध्यान है। ब्लॉक स्तर पर गठित होने वाले कृषि उत्पादक संगठन (एफपीओ) इन्हें खाद्य प्रसंस्करण लगाने वाले उद्यमियों से जोड़ेंगे, ताकि उन्हें अपनी उपज का वाजिब दाम मिल सके।

मंडी अधिनियम में संशोधन करने वाला अग्रणी राज्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश किसानों के हित में मंडी अधिनियम में संशोधन करने वाला अग्रणी राज्य रहा है। यूपी में 45 कृषि उत्पादों को मंडी शुल्क से मुक्त किया गया है। यही नहीं, कोरोना के असाधारण संकट के दौरान रबी की फसलों की कटाई-मड़ाई और एमएसपी ( न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर ख़रीद की सारी व्यवस्था सुनिश्चित की गई। एमएसपी पर खरीद के लिए 6000 केंद्र स्थापित किये गए थे, इन केंद्रों पर रिकार्ड खरीद हुई। भरपूर क्रय केंद्रों के कारण बाजार में भी किसानों को गेहूं का अच्छा दाम मिला। कोविड प्रोटोकाल का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए 119 चीनी मिलों का संचालन किया, धान खरीद के लिए भी 4000 क्रय केंद्र खोले गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वाराणसी में सब्जियों के निर्यात की बहुत संभावना है। इस दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार करने की ज़रूरत है।

















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