
अशोक सिंह भारत
डेली संवाद, चंडीगढ़
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह द्वारा ‘‘इस लड़ाई में हम सभी एकजुट हैं’’ के दिए गए संदेश के साथ मंगलवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक एक ऐसा अनूठा अवसर है जिसमें सभी राजनैतिक पार्टियों की तरफ से अपने मतभेद भुलाकर खेती कानूनों के विरुद्ध संघर्ष के लिए एकमत होने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए किसानों का समर्थन करने का फ़ैसला किया गया।
मीटिंग में सभी पार्टियों के नुमायंदों द्वारा लाल किले में हुई हिंसा की स्वतंत्र जांच से लेकर संकट के हल के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के दख़ल की माँग सम्बन्धी सांझी मीटिंग और दिल्ली सरहद पर स्टेट ऑब्ज़र्वर की नियुक्ति, राजनैतिक बयान दिए बगैर किसानी आंदोलन में शामिल होने समेत अन्य मुद्दों सम्बन्धी सुझाव दिए गए।
इस मीटिंग का भाजपा द्वारा बायकॉट किया गया परन्तु कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिरोमणि अकाली दल, लोक इन्साफ पार्टी, शिरोमणि अकाली दल डेमोक्रेटिक पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, सी.पी.आई. और सी.पी.आई. (एम) पार्टियों ने शिरकत की और आम आदमी पार्टी की किसानों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए पंजाब पुलिस को दिल्ली सरहदों पर भेजने की अनुचित माँग न मानने पर आप द्वारा वॉकआउट किया गया।
किसानों को श्रद्धाँजलि देते हुए 2 मिनट का मौन
किसानी आंदोलन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धाँजलि देते हुए 2 मिनट का मौन रखकर मीटिंग की शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन विरोध प्रदर्शनों में अब तक पंजाब के 88 किसान अपनी जान गंवा चुके हैं।
‘‘पंजाब के विरुद्ध शुरु की गई बड़ी साजिश’’ के खि़लाफ़ सर्वसम्मति की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ ने कहा कि जब भी पंजाब को किसी बाहरी या अंदरूनी चुनौती का सामना करना पड़ा है तो हर पंजाबी ने एक होकर इसका सामना किया है।
उन्होंने कहा कि हमारे राजनैतिक मतभेद बने रहेंगे, परन्तु इस संकट की घड़ी में हम सभी को फिर से एकजुट होने की ज़रूरत है। उन्होंने भाजपा द्वारा मीटिंग का बायकॉट करने के फ़ैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि उनको अपने विचार सामने रखने चाहिए थे। उन्होंने बताया कि पंजाब विधानसभा ने खेती कानूनों को नकारते हुए सर्वसम्मति के साथ एक प्रस्ताव पास किया था और सभी पार्टियाँ मुख्यमंत्री के साथ राज्यपाल के पास गई थीं।
लाल किले में जो कुछ हुआ वह निंदनीय
श्री जाखड़ ने दिल्ली सरहद पर मौजूदा स्थिति बारे केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए स्टील की छड़ों, हथियारबंद रक्षक, सीमेंट के साथ की गई नाकाबंदी और नोकदार कीलों के साथ खड़े दिल्ली पुलिस के जवानों की आज मीडिया में आईं तस्वीरों की तरफ ध्यान दिलाया। इन तस्वीरों को भयानक बताते हुए उन्होंने कहा कि यह तस्वीरें गलवान घाटी में मौजूद चीनी सेना की याद दिलाती हैं। उन्होंने कहा की लाल किले में जो कुछ हुआ वह निंदनीय था परन्तु किसानों के आंदोलन को बदनाम करने और हिंसा के लिए जि़म्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए सही जांच होनी चाहिए। उन्होंने किसानों को गुंडा, आतंकवादी, खालिस्तानी और राष्ट्र विरोधी नामों के साथ संबोधन करने पर भारत सरकार की कड़ी निंदा की।
श्री जाखड़ ने रेल सेवाओं को निरस्त, आर.डी.एफ. बंद करने आदि समेत आर्थिक नाकेबन्दी के द्वारा पंजाब के किसानों को अपना हथियार बनाकर पंजाब पर झूठे दोष लगाने के लिए केंद्र सरकार की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के कारण पंजाब को 36000 करोड़ रुपए का नुक्सान हुआ है। किसानों के शांतमयी आंदोलन के लिए प्रशंसा करते हुए, जिसकी सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रशंसा की, श्री जाखड़ ने कहा कि काले खेती कानून जारी होने के बाद जो विरोध प्रदर्शन चल रहे थे, वह अब सुनामी का रूप धारण कर चुके हैं और दिल्ली की सरहदों तक पहुँच गए हैं।
देश को संदेश देना चाहिए कि पंजाब एकजुट है
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान ने सभी पार्टियों से अपील की कि वह किसानों को खेती कानूनों से बचाने के लिए एकजुट हों जो कि शांता कुमार कमेटी की भावना अनुसार बनाए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी एम.एस.पी. को देश की आर्थिकता पर सबसे बड़ा बोझ करार दिया है। उन्होंने खेती कानूनों को रद्द करने और किसानों के सुरक्षित घर वापस लौटने की माँग करते हुए कहा कि राजनैतिक तौर पर भाजपा को अलग-थलग करने की रणनीति के साथ हमें देश को संदेश देना चाहिए कि पंजाब एकजुट है।
श्री जाखड़ के विचारों की हिमायत करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के भगवंत मान ने कहा कि जिस तरह बैरीकेट लगाए गए हैं और दिल्ली बॉर्डर पर सडक़ों को उखाड़ा गया है उससे ऐसा लगता है कि पंजाब के किसान दुश्मन की सरहद के पार बैठे हैं और हरियाणा उनको रोकने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनके लोकतंात्रिक अधिकारों के प्रयोग से रोकने के लिए सब कुछ किया जा रहा है। श्री मान ने कहा की लाल $िकले की हिंसा पहले से योजनाबद्ध लगती है जहाँ उच्च सुरक्षा वाले स्मारक को सुरक्षा बलों ने ऐसे ही छोड़ दिया जबकि एक बड़ा मीडिया समूह वहां मौजूद था।
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