
डेली संवाद, जालंधर
सूर्या एंक्लेव में जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट द्वारा बनाई गई सड़क 60 दिन तक नहीं टिक सकी है। हैरानी की बात तो यह है कि 16 साल के लंबे इंतजार के बाद सूर्या एंक्लेव की सड़क को बनाने का काम शुरू हुआ था। इलाके की सड़कों को लेकर 1.50 करोड़ रुपए का टेंडर पारित हुआ और ठेकेदारों ने इसमें बंदरबांट शुरू कर दिया। मजेदार बात तो यह है कि ट्रस्ट का इंजीनियरिंग विंग रोड निर्माण के दौरान एक बार भी चेकिंग नहीं की।
इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के इंजीनियरिंग विंग के मुखिया सतिंदर सिंह और उनकी टीम ने क्या इस घटिया मैटेरियल का सैंपल भरा, यह भी बड़ा सवाल है। क्योंकि जब रोड कंस्ट्रक्शन शुरू होता है तो मौके पर संबंधित महकमे के इंजीनियरिंग विंग का इंजीनियर होना अनिवार्य होता है। लेकिन सूर्या एंक्लेव की जिस तरह से ठेकेदार ने सड़क बनाई है, उससे बिल्कुल नहीं लगता कि मौके पर एसई सतिंदर सिंह या उनका कोई इंजीनियर चेकिंग पर गया होगा।
सूर्या एंक्लेव के लोगों का आरोप है कि ठेकेदार जब रोड बनाने का काम कर रहा था, तभी घटिया मैटेरियल पर लोगों ने विरोध किया था। लेकिन ठेकेदार और ट्रस्ट के इंजीनियरों की मिलीभगत से काम को न तो रोका गया और न ही मैटेरियल सही किया गया। जिसका नतीजा यह है कि महज 60 दिन यानि 2 महीने में सड़क कई जगहों से उखड़ने लगी है।
इंजीनियरिंग विंग ने सैंपल नहीं लिया
इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के सूत्र बताते हैं कि यह रोड उसी ठेकेदार ने बनाया है, जो पिछले कई सालों से ट्रस्ट के इंजीनियरिंग विंग पर कब्जा जमा कर बैठा है। ठेकेदार की पहुंच इतनी है कि ट्रस्ट के चेयरमैन चाहकर भी कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। इस ठेकेदार का नैक्सेस सीधे चंडीगढ़ में कुछ अफसरों के साथ है, जो इस भ्रष्टाचार के हिस्सेदार भी हैं।
जानकारी मिली है कि ट्रस्ट का इंजीनियरिंग विंग ने रोड बनने से पहले मैटेरियल का सैंपल तक चेक नहीं किया। ठेकेदार पर इंजीनियरिंग विंग के मुखिया और इंजीनियरों की इतनी कृपा है कि बिना सैंपल जांच के ही रोड बनवा डाली। बड़ी बात तो यह है कि उस वक्त स्थानीय लोगों ने घटिया मैटेरियल लगाने का शिकायत भी की थी। लेकिन इंजीनियरिंग विंग ने कोई कार्रवाई नहीं की।
मैटेरियल के सैंपल लेकर करवाएंगे जांच, होगी बड़ी कार्रवाई : चेयरमैन
इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन दलजीत सिंह आहलूवालिया ने कहा है कि इस संबंध में इंजीनियरिंग विंग से पूछताछ की जाएगी। उन्होंने कहा कि सड़क ही नहीं किसी भी काम में भ्रष्टाचार बिल्कुल बरदाश्त नहीं है। सड़क निर्माण में जिस भी ठेकेदार ने घटिया मैटेरियल लगाया है कि उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यही नहीं, इंजीनियरिंग ब्रांच के संबंधित इंजीनियर पर भी कार्ऱवाई होगी।









