पंजाब में उच्च अधिकारियों के नाम से फर्जी WhatsApp आईडी बनाकर ठगी का प्रयास, FIR दर्ज, आप भी रहें सावधान

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⏱️ 4 मिनट पढ़ने का समय|📝 505 शब्द|📅 25 May 2022

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डेली संवाद, चंडीगढ़
पंजाब पुलिस के स्टेट साईबर क्राइम सैल ने आज पंजाब के लोगों के लिए एक एडवाइजऱी जारी करके वरिष्ठ अधिकारियों/गणमान्य व्यक्तियों की नकली वाट्सऐप आईडी का प्रयोग करके वित्तीय/प्रशासनिक माँग करने वाले सन्देशों से सचेत रहने का सुझाव दिया है। साईबर क्राइम सैल ने उनको यह भी कहा कि यदि ऐसा मामला उनके संज्ञान में आता है तो वह तुरंत टोल फ्री नंबर ‘1930’ पर सूचना दें।

अन्य विवरणों का खुलासा करते हुए इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजीपी) स्टेट साईबर क्राइम आर.के. जायसवाल ने कहा कि एक महीने से भी कम समय में ऐसे दो मामले सामने आए हैं, जिनमें धोखाधड़ी करने वालों ने वीवीआईपी की पहचान अपनाकर निर्दोष लोगों को धोखा देने की कोशिश की।

सोशल सिक्योरिटी नंबर साझा ना करने की सलाह

तुरंत कार्रवाई करते हुए पंजाब स्टेट साईबर क्राइम ने थाना स्टेट साईबर क्राइम, एस.ए.एस. नगर में 26 अप्रैल, 2022 को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 और 511, आईटी एक्ट की धाराएं सी एवं डी और 19 मई, 2022 को आईटी एक्ट की धारा सी के अंतर्गत दो एफआईआर दर्ज की हैं। उन्होंने कहा कि स्टेट साईबर क्राइम द्वारा दोषियों को पकडऩे के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

आईजीपी आर.के. जायसवाल ने लोगों को वाट्सऐप/सोशल मीडिया प्रोफाईलों पर डिस्पले तस्वीर/नाम के आधार पर प्रतिक्रिया करने, संदिग्ध की वैबसाईटों (टोरैंट, शॉर्ट-एंड यूआरएल आदि) का प्रयोग करने से गुरेज़ करने के साथ-साथ अपने आप को धोखाधड़ी वाले/नकली सोशल मीडिया खातों द्वारा धोखे का शिकार होने से बचाने के लिए गुप्त जानकारी जैसे कि ओटीपी, बैंक खाते, क्रेडिट/डेबिट कार्ड या सोशल सिक्योरिटी नंबर साझा ना करने की सलाह दी है।

मोबाइल फोनों तक अनाधिकृत तरीके से पहुँच

दर्ज किए गए दो मामलों में आरोपी व्यक्तियों की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी देते हुए डीआईजी स्टेट साईबर क्राइम नीलांबरी जगदले ने कहा कि दोषियों का मुख्य उद्देश्य भोले-भाले व्यक्तियों को धोखा देना था और इस तरह की धोखाधड़ी पूरे भारत में प्रचलित है। उन्होंने कहा कि यह असामाजिक तत्व अलग-अलग आधुनिक तरीकों का प्रयोग करके अलग-अलग लोगों को निशाना बनाते हैं और उनके मोबाइल फोनों तक अनाधिकृत तरीके से पहुँच करते हैं।

डीआईजी ने कहा, ‘‘इसके बाद, दोषी अपने आप को वरिष्ठ अधिकारियों/गणमान्य व्यक्तियों के रूप में पेश करते हैं और ऐमाज़ॉन गिफ्ट वाउचर के रूप में या मेडिकल एमरजेंसी के बहाने या किसी भी तरह की आपातकालीन स्थिति पैदा करके पैसों की माँग करते हैं।’’ उन्होंने आगे कहा कि आगे की जांच तकनीकी ढंग से की जा रही है और साईबर क्राइम टीमें बहुत से तथ्यों को एकत्र कर रही हैं और अपराध में शामिल दोषियों तक पहुँचने के लिए ज़रूरी कडिय़ाँ को जोड़ रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि वे बेकसूर लोगों के साथ धोखाधड़ी करने वाले दोषियों को काबू करने के काफ़ी करीब हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2020-2021 के दौरान ऐसी घटनाएँ भी सामने आईं, जिसमें स्टेट साईबर क्राइम, पंजाब ने नेटवर्क को तोड़ते हुए देश के अलग-अलग हिस्सों से मुख्य आरोपियों को काबू करके बड़ी सफलता हासिल की।

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