Advertising Scam in Jalandhar: जालंधर में अब विज्ञापन घोटाला, बगैर टैंडर के बंद कमरे में चहेते ठेकेदार को दे दिया करोड़ों का ठेका, विजीलैंस से शिकायत की तैयारी

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⏱️ 6 मिनट पढ़ने का समय|📝 777 शब्द|📅 24 Aug 2022

डेली संवाद, जालंधर। Advertising Scam in Jalandhar: स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्टों में करोड़ों के घोटालों की जांच पूरी नहीं हो सकी कि नगर निगम जालंधर में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। निगम अफसरों पर अब विज्ञापन टेंडर में धांधली के आरोप लगे हैं। सूत्र बता रहे हैं कि बंद कमरे में बिना किसी ई-टैंडर के ही करोड़ों रुपए का ठेका दे दिया गया। कहा जा रहा है कि निगम कमिश्नर दविंदर सिंह इसके पक्ष में नहीं थे, बावजूद इसके एक चहेते ठेकेदार को हर महीने लाखों रुपए फायदा पहुंचाने के मकसद ये गलत काम किया गया।

नगर निगम के अधिकारियों ने बिना ई-टेंडरिंग और ई-नीलामी करवाए मॉडल टाउन जोन के 26 यूनिपोल्ज का ठेका बंद कमरे के अंदर जालंधर की नई कंपनी कंपैक्ट एडवरटाइजिंग को देते हुये पंजाब सरकार की आउटडोर विज्ञापन पॉलिसी पर बड़ा बट्टा लगाया है। निगम की ओर से नियमों की अनदेखी की शिकायत निकाय मंत्री और चंडीगढ़ में बैठे उच्च अधिकारियों को कर दी गई है।

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जानकारी के मुताबिक इसी साल मार्च में विज्ञापन ठेका खत्म होने के बाद पुरानी क्रिएटिव कंपनी को 10 प्रतिशत बढ़ाकर नया ठेका दे दिया गया था, लेकिन अब नई कंपैक्ट कंपनी को रेट बढ़ाकर बंद कमरे में ठेका अलॉट कर दिया। सूत्रों के मानी तो यह ठेका 5 साल के लिये लगभग 5 करोड़ रुपये में हुआ है जबकि कुछ कंपनियां ऐसी भी थी जो इससे ज्यादा ऑफर कर रही थीं।

आपको बता दें कि साल 2018 में सरकार द्वारा जारी आउटडोर एडवरटाइजिंग पॉलिसी में प्रावधान है कि नगर निगम हाउस से प्रस्ताव की मंजूरी के बाद टेंडर या ई-ऑक्शन के माध्यम से विज्ञापन ठेका किसी को दिया जा सकता है। बता दें कि साल 2017 में निगम ने क्रिएटिव डिजाइनर्स को मॉडल टाउन जोन के 59 यूनिपोल के विज्ञापन का ठेका 8.88 करोड़ में दिया था जो 5 साल के लिये था। ठेका कंपनी ने 26 यूनिपोल से कमाई की और बाद में हाईकोर्ट में केस कर 2019 के अंत में 33 और यूनिपोल लगाकर कमाई शुरु कर दी।

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जिसके बाद निगम अधिकायियों और पार्षदों में काफी विवाद हुआ था। टेंडर के अनुसार मार्च में 26 यूनिपोल के 5 साल को दिये ठेके की अवधि पूरी हो गई, जबकि बाद में लगाये 33 यूनिपोल का टेंडर 2024 तक पूरा होना है। तब मार्च में पूर्व कमिश्नर ने क्रिएटिव डिजायनर्स को ठेका दे दिया था लेकिन जुलाई के अंत में निगम कमिश्नर ने बगैर कोई टैंडर करयो क्रिएटिव डिजायनर्स से ठेका लेकर जालंधर की कंपैक्ट एडवरटाइजिंह नाम की फर्म को दे दिया। जबकि ठेका के बेहतर रेट के लिये टेंडर के जरिये इच्छुक कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा का प्रावधान है जिसे नजर अंदाज किया गया।

विज्ञापन टेंडर की ये हैं नियम और शर्तें

सरकारी नियमों के मुताबिक सबसे पहले निगम किस जोन में कितने यूनीपोल्ज का ठेका देगा, उसकी लिस्टिंग होगी। निगम विज्ञापन ठेके के लिये ई-टेडरिंग और ई-ऑक्शन होगी। इसमें शहर या बाहर की कंपनियां अपनी कोटेशन पेश करेंगी। निगम ठेका शॉर्ट टर्म में 7 दिन और नॉर्मल तरीके से नीलामी में 21 दिन का समय देता है।

नगर निगम की ओर से दिये गये समय में विज्ञापन ठेके में टेंडर डालने वाली कंपनियां पेपर पूरे कर सकें। नगर निगम सभी कंपनियों के टेंडर रिव्यू करेगा और फिर ई-नीलामी होगी। ई-नीलामी में जो कंपनी ज्यादा राजस्व का ऑफर करेगी उसे ठेका दिया जायेगा। विज्ञापन पॉलिसी के तहत निगम हाउस में मंजूरी के बाद ठेका मिलता है।

विजीलैंस से करेंगे शिकायत – सुनील ज्योति

भाजपा के नेता और जालंधर के पूर्व मेयर सुनील ज्योति ने कहा कि पूरा शहर विकास के लिये तरस रहा है और जिन रास्तों से निगम को कमाई हो सकती है उनमें अनियमिततायें बरतकर सरकार और निगम को करोड़ो का चूना लगाया जा रहा है। नगर निगम में विज्ञापन टेंडर में हुये करोड़ों के घोटाले को लेकर वे विजीलैंस से शिकायत करेंगे। इसमें आम आदमी पार्टी के नेता, मेयर जगदीश राजा और कमिश्नर दविंदर सिंह की मिलीभगत है।

मेरी जानकारी में नहीं है – जगदीश राजा

उधर, मेयर जगदीश राजा ने कहा है कि इस टैंडर के बारे में उन्हें कोई जानकारी नही हैं। बिना टेंडर के किसी भी कंपनी को ठेका देना नियमों के विरुद्ध है, ठेका कैसे और किसने दिया, किस ने कितने पैसे खाये इन सभी सवालों के जबाव कमिश्नर से देंगे। मुझे टेंडर के बारे में पता नहीं था लेकिन अब संज्ञान में आने के बाद हाउस में प्रस्ताव लाकर नया विज्ञापन ठेका रद्द करेंगे, क्योंकि इसमें किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया।

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