Jalandhar Smart City Scam: जालंधर स्मार्ट सिटी के घोटाले की विजीलैंस जांच पड़ी ठंडी, अब तक किसी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं, MLA और मेयर की शिकायतें हुईं बेकार

Daily Samvad
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⏱️ 5 मिनट पढ़ने का समय|📝 533 शब्द|📅 30 Sep 2022

डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar Smart City Scam: जालंधर स्मार्ट सिटी के 1000 करोड़ रुपए में घोटाले की विजीलैंस जांच ठंडी पड़ गई है। इस बीच जालंधर स्मार्ट सिटी के नए सीईओ दविंदर सिंह ने अधिकारियों और ठेकेदारों से साफ कहा है कि जो भी काम होगा, पारदर्शिता रहेगी। उन्होंने काम न करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ पुलिस कमिश्नर को चिट्ठी लिखकर एफआईआऱ दर्ज करने की पैरवी की है। इससे ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है।

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आपको बता दें कि जालंधर स्मार्ट सिटी के प्रोजैक्ट मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट कुलविंदर सिंह और एलईडी लाइट प्रोजैक्ट देख रहे लखविंदर सिंह समेत कांग्रेस राज में करप्शन को बढ़ावा देने वाले उन सभी मुलाजिमों को हटा दिया गया है, जिन्होंने इस प्रोजैक्ट में जमकर लापरवाही की और सरकारी धन का दुरुपयोग किया।

विधायक रमन अरोड़ा और शीतल अंगुराल की मांग के बाद जालंधर स्मार्ट सिटी के 1000 करोड़ रुपए कामों में करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच विजीलैंस ने तो जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक विजीलैंस की तरफ से किसी को न तो गिरफ्तार किया गया और न ही किसी अधिकारी से पूछताछ शुरू की गई है। जिससे विजीलैंस ब्यूरो की जांच भी शक के घेरे में आ गई है।

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जालंधर में स्मार्ट सिटी के 1000 करोड़ रुपए से सरफेस वाटर, स्टार्म सीवरेज, चौकों का सौंदर्यीकरण, एलईडी लाइट, बायोमाइनिंग प्रोजैक्ट समेत अन्य कामों पर पैसा खर्च करना है। इसके लिए पूर्व सीईओ करणेश शर्मा के समय तेजी के साथ काम शुरू हुआ। जिसे लेकर मेयर जगदीश राजा, पूर्व मेयर सुनील ज्योति, AAP विधायक रमन अरोड़ा समेत डिप्टी मेयर हरसिमरनजीत सिंह बंटी ने घोटाले का आरोप लगाया।

AAP विधायक रमन अरोड़ा और शीतल अंगुराल ने स्थानीय निकाय मंत्री इंदरबीर सिंह निज्जर से विजीलैंस जांच की मांग की थी, इसके बाद विजीलैंस ने जांच शुरू कर दी। लेकिन जिस हिसाब से विजीलैंस जांच हो रही है, उससे लगता है कि इसे बडे़ स्तर पर निपटाने की तैयारी है।

स्मार्ट सिटी छोड़ कर जा चुके अधिकारियों को भी तलब करने की तैयारी

विजिलेंस ब्यूरो से जुड़े अधिकारियों ने नाम ना छापे जाने की शर्त पर बताया कि स्मार्ट सिटी के ज्यादातर अधिकारी या तो नौकरी छोड़ कर जा चुके हैं या अन्य पदों पर काम कर रहे हैं। उनके कार्यकाल में हुए प्रोजैक्टों दौरान जो-जो कमियां रही, उनके संबंध में तमाम पूर्व अधिकारियों को भी तलब किया जा सकता है।

ठेकेदारों के खिलाफ एक्शन, अधिकारियों को बचाया जा रहा है

जालंधर स्मार्ट सिटी के नए सीईओ दविंदर सिंह ने काम शुरू करते हुए उन ठेकेदारों के खिलाफ एक्शन लिया है, जिन्होंने पैसे लेने के बाद भी काम शुरू नहीं किया। जबकि स्मार्ट सिटी और नगर निगम से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्ऱवाई नहीं की जा रही है। सूत्र बता रहे हैं कि इस पूरे घोटाले में नगर निगम के कुछ अधिकारियों की प्रमुख भूमिका है। ये वे अधिकारी हैं, जो कांग्रेसी विधायकों के करीबी थी, जो घोटाले में पूरी तरह से संलिप्त हैं।

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