डेली संवाद, लुधियाना। Fake Encounter: फर्जी पुलिस मुठभेड़ में दो भाइयों के मारे जाने के आठ साल से अधिक समय बाद, लुधियाना की एक स्थानीय अदालत ने मामले में दो पुलिसकर्मियों सहित तीन लोगों को दोषी ठहराया है। अदालत ने दो पुलिसकर्मियों समेत तीन लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, इस मामले में दो पुलिसकर्मियों पर 37-37 हजार रुपये जबकि तीसरे आरोपी पर 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
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बता दें कि 27 सितंबर 2014 को माछीवाड़ा पुलिस के सिपाही यादविंदर सिंह, पंजाब होम गार्ड के जवान अजीत सिंह, बलदेव सिंह और अकाली नेता गुरजीत सिंह लुधियाना के जमालपुर एरिया की आहलुवालिया कालोनी में हरिंदर सिंह और जतिंदर सिंह नामक दो युवकों की पुलिस की गोली से मौत हो गई थी। पुलिस ने इसे एनकाउंटर बताया था मगर बाद में यह पूरी तरह से फर्जी मामला साबित हुआ था।
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जांच के दौरान, आईपीसी की धारा 148 (दंगा, घातक हथियारों से लैस) और 149 (गैरकानूनी सभा), 120-बी (आपराधिक साजिश) और एससी / एसटी अधिनियम की धाराएं जोड़ी गईं। इस मामले में आरोपी गुरजीत सिंह सैम, कांस्टेबल यादविंदर सिंह, पंजाब होमगार्ड अजीत सिंह, पीएचजी बलदेव सिंह को गिरफ्तार किया गया था, जबकि इंस्पेक्टर मनजिंदर सिंह, जिसे बाद में बर्खास्त कर दिया गया था।
शिकायतकर्ताओं के वकील सरबजीत सिंह वेरका ने कहा कि सुनवाई के दौरान 51 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। गुरजीत सिंह सैम, कांस्टेबल यदविंदर सिंह और अजीत सिंह (पीएचजी) को हत्या, आपराधिक साजिश और शस्त्र अधिनियम का दोषी ठहराया गया था, लेकिन SC / ST अधिनियम की धाराओं के तहत बरी कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि इस मामले में बलदेव सिंह को बरी कर दिया गया है।
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