Tarantaran Attack: पंजाब में आतंकी हमले के बाद SHO पर गिरी गाज, NIA ने शुरू की जांच

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डेली संवाद, तरनतारन। Tarantaran Attack: पंजाब के तरनतारन के सरहाली कलां पुलिस स्टेशन में रविवार को बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड के सदस्य पहुंचे और जांच की। वहीं पंजाब पुलिस ने थाना सरहाली पर हुए राकेट लांचर अटैक के बाद थाना के एसएचओ प्रकाश सिंह का तबादला कर दिया है।

आतंकी हमले के अलर्ट के बीच तरनतारन के सरहाली पुलिस थाने पर शुक्रवार रात करीब साढ़े 11 बजे आरपीजी (रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड) से हमला किया गया था। यह सात महीने में दूसरा आरपीजी अटैक है। जिस वक्त यह हमला हुआ उस समय एसएचओ समेत आठ से दस पुलिसकर्मी थाने में मौजूद थे। हमले में कोई हताहत नहीं हुआ है। हालांकि थाने से सटे सांझ केंद्र की इमारत की खिड़कियों के शीशे क्षतिग्रस्त हो गए।

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घटनास्थल का दौरा करने पहुंचे डीजीपी गौरव यादव ने माना था कि यह आतंकी हमला है। हमले में इस्तेमाल आरपीजी एक सैन्य-ग्रेड हार्डवेयर है, जिसे रॉकेट लांचर से दागा गया था। इसे पाकिस्तान से तस्करी कर लाया गया है। उन्होंने कहा, बीएसएफ और केंद्रीय एजेंसियों के समन्वय से पंजाब पुलिस मामले की जांच करेगी। इस बीच, एनआईए ने भी जांच शुरू कर दी है।

देर शाम जांच एजेंसी के दो अधिकारियों ने सरहाली थाने का दौरा किया। इस दौरान पुलिस ने सात संदिग्धों को उठाया है। तरनतारन एसएसपी गुरमीत सिंह चौहान ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि कुछ संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। वहीं, आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (एसजेएफ) के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने हमले की जिम्मेदारी ली है।

पुलिस थाने को निशाना

पुलिस के मुताबिक रात 11 बजकर 22 मिनट पर अज्ञात लोगों ने अमृतसर-बठिंडा हाईवे से सरहाली पुलिस थाने को निशाना बनाते हुए आरपीजी दागा। वह थाने के लोहे के गेट से टकराकर साथ बने सांझ केंद्र में जा गिरा। यह केंद्र एफआईआर की कॉपी, पासपोर्ट सत्यापन और अनापत्ति प्रमाण पत्र जैसी सेवाएं प्रदान करता है। ग्रेनेड गिरते ही पुलिस कर्मी थाने से बाहर निकल आए, लेकिन तब तक हमलावर फरार हो चुके थे।

घटनास्थल की जांच के लिए फोरेंसिक टीम और सेना का एक दस्ता भी पहुंचा। पुलिस ने इस संबंध में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ग्रेनेड सीधे थाने में जाकर फटता तो बड़ा नुकसान हो सकता था।

आरपीजी का इस्तेमाल

यह भी जानकारी मिली है कि हमले में रूस में बने आरपीजी का इस्तेमाल किया गया है, जो मोटी दीवारों को भेदने में सक्षम है। आतंकी हमले की शुरुआती जांच में पुलिस ने रॉकेट लांचर और प्रोपेलर बरामद कर लिया है। पुलिस के हाथ एक सीसीटीवी फुटेज भी लगी है, जिसमें हमले का असर दिख रहा है।

रॉकेट हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने ली है। पुलिस ने इस दिशा में जांच शुरू कर दी है। हालांकि सीनियर अधिकारियों का कहना है कि यह जांच से भटकाने की कोशिश हो सकती है। हमले के बाद इस आतंकी संगठन की एक ऑडियो क्लिप वायरल है, जिसमें संगठन प्रमुख पन्नू आतंकी हमले की जिम्मेदारी ले रहा है।

मोहाली जैसा अटैक

एक सवाल के जवाब में डीजीपी ने कहा कि इस हमले और मोहाली आरपीजी हमले की घटना के बीच कई समानताएं प्रतीत होती हैं। शुरुआती जांच में मोहाली जैसा अटैक लग रहा है। हालांकि फोरेंसिक विवरणों की जांच की जा रही है।

इसी साल नौ मई को मोहाली स्थित पुलिस के खुफिया मुख्यालय पर आरपीजी अटैक किया गया था। हमले में सिर्फ बिल्डिंग को नुकसान पहुंचा था। मोहाली अटैक के तार कनाडा के आतंकी लखबीर सिंह लंडा से जुड़े थे। हमले में शामिल अधिकतर लोगों को पुलिस ने पकड़ लिया था, लेकिन मुख्य साजिशकर्ता तक पुलिस नहीं पहुंच पाई।

घटनास्थल का दौरा करने के बाद डीजीपी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि हमारा दुश्मन देश बौखलाया हुआ है और इससे ध्यान भटकाने के लिए रात में कायरतापूर्ण हमला किया गया। दरअसल पिछले एक महीने के भीतर उसने ड्रोन से जो हथियार-हेरोइन और गोला बारूद भेजे थे, वह सब पकड़े गए।

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इस साल अकेले 200 से अधिक ड्रोन सीमा पार से आए। इनमें अधिकतर ड्रोन पकड़ा गया है। पुलिस तमाम एंगल और थ्योरी खंगाल रही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में बैठे आतंकियों की स्थानीय लिंक की जांच की जा रही है।

पंजाब के कई पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि राज्य के पुलिस थाने और सरकारी इमारतों पर आतंकी हमले का अलर्ट था। पिछले हफ्ते खुफिया एजेंसियों की ओर से यह जानकारी आला अधिकारियों को दी गई थी। इसी के तहत राज्य के कई थानों और इमारतों की पुलिस सुरक्षा बढ़ाई गई थी। कई जिलों में पुलिस अधिकारियों ने बैठकें कर पुलिसकर्मियों को सचेत रहने के निर्देश दिए थे।



















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