Ram Mandir Pran Pratishtha: क्यों होती है मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा? जाने प्राण प्रतिष्ठा के बारे में

Daily Samvad
4 Min Read
Ayodhya Ram Mandir
Punjab Government
WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now
⏱️ 4 मिनट पढ़ने का समय|📝 459 शब्द|📅 22 Jan 2024

डेली संवाद, नई दिल्ली। Ram Mandir Pran Pratishtha: अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा आज (22 जनवरी) अभिजीत मुहूर्त में की जाएगी। प्राण प्रतिष्ठा को लेकर देशभर उत्सव जैसा माहौल देखने को मिल रहा है।

ये भी पढ़ें: जालंधर के Board to Abroad के ट्रेवल एजैंट पर महिला ने लगाए सनसनीखेज आरोप

प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान की शुरुआत कुछ दिन पहले से हो गई है। इसके लिए महाभव्य तैयारी की गई है। प्रकांड पंडितों की मानें तो बिना प्राण प्रतिष्ठा के मूर्ति पूजा नहीं करनी चाहिए।

अनदेखी करने से व्यक्ति को पूजा का शुभ फल प्राप्त नहीं होता है। लेकिन क्या आपको पता है कि क्यों मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है?

क्या है प्राण प्रतिष्ठा ?

धर्म गुरुओं की मानें तो मंदिर या घर पर मूर्ति स्थापना के समय प्रतिमा रूप को जीवित करने की विधि को प्राण प्रतिष्ठा कहते हैं। सनातन धर्म में प्राण प्रतिष्ठा का विशेष महत्व है। मूर्ति स्थापना के समय प्राण प्रतिष्ठा अवश्य ही किया जाता है।

साल 2024 में 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर में भी प्राण प्रतिष्ठा किया जाएगा। इसमें रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इसकी शुरुआत 16 जनवरी से है। इस दिन से ही प्राण प्रतिष्ठा हेतु अनुष्ठान किए जाएंगे। धार्मिक मत है कि प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात मूर्ति रूप में उपस्थ्ति देवी-देवता की पूजा-उपासना की जाती है।

प्राण प्रतिष्ठा का अभिप्राय

धर्म गुरु एवं आचार्यों की मानें तो प्राण प्रतिष्ठा का अभिप्राय मूर्ति विशेष में देवी-देवता या भगवान की शक्ति स्वरूप की स्थापना करनी है। इस समय पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और मंत्रों का जाप किया जाता है।

शास्त्रों में घर पर पत्थर की प्रतिमा न रखने की सलाह दी गई है। पत्थर की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात प्रतिदिन पूजा अनिवार्य है। अतः मंदिरों में सदैव पत्थर की प्रतिमा स्थापित की जाती है।

प्राण प्रतिष्ठा हेतु मंत्र

मानो जूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिमं

तनोत्वरिष्टं यज्ञ गुम समिमं दधातु विश्वेदेवास इह मदयन्ता मोम्प्रतिष्ठ ।।

अस्यै प्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणाः क्षरन्तु च अस्यै

देवत्व मर्चायै माम् हेति च कश्चन ।।

ॐ श्रीमन्महागणाधिपतये नमः सुप्रतिष्ठितो भव

प्रसन्नो भव, वरदा भव ।।

प्राण प्रतिष्ठा की विधि

प्रतिमा को गंगाजल या विभिन्न (कम से कम 5) नदियों के जल से स्नान कराएं। इसके पश्चात, मुलायम वस्त्र से मूर्ति को पोछें और देवी-देवता के रंग अनुसार नवीन वस्त्र धारण कराएं। अब प्रतिमा को शुद्ध एवं स्वच्छ स्थान पर विराजित करें और चंदन का लेप लगाएं।

ये भी पढ़ें: कनाडा सरकार दे रही है मुफ्त में जमीन, नौकरी के साथ PR पाना भी हुआ आसान

इसी समय मूर्ति विशेष का सिंगार करें और बीज मंत्रों का पाठ कर प्राण प्रतिष्ठा करें। इस समय पंचोपचार कर विधि-विधान से भगवान की पूजा करें। अंत में आरती-अर्चना कर प्रसाद वितरित करें।

प्रभु श्रीराम के आगमन की खुशी में चारों तरफ है उल्लास

















Share This Article
Follow:
Daily Samvad एक विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट है, जहां हम देश-दुनिया, राजनीतिक विश्लेषण, प्रदेश, शिक्षा, बिज़नेस, मनोरंजन, खेल, स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र की ख़बरें सरल भाषा में आप तक पहुंचाते हैं। हमारा उद्देश्य है—जनता की आवाज़ बनकर निष्पक्ष पत्रकारिता को आगे बढ़ाना। डेली संवाद ऑनलाइन के महाबीर जायसवाल फाउंडर चीफ एडिटर हैं। वे राजनीति, अपराध, देश-दुनिया की खबरों पर दमदार पकड़ रखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता करियर की शुरुआत राजनीति की खबरों से की, जबकि उनके पास, अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग से लेकर एडिटर तक 25 साल से अधिक पत्रकारिता का अनुभव है। वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारत सरकार के कैबिनेट मंत्री गजेंद्र शेखावत के Media Consultant भी रहे हैं। उन्होंने इलाहाबाद की यूनिवर्सिटी से मास कॉम्यूनिकेशन, बीए और एमए की डिग्री हासिल की है। संपर्क नंबर: +91-98881-90945 ईमेल: mmmmediahouse@gmail.com
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *