GST Bogus Billing Scam: पंजाब में पुराने तांबा-पीतल खरीदने और बेचने में रोजाना लाखों की टैक्स चोरी, स्क्रैप के बिल पर होता खेल

Daily Samvad
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⏱️ 5 मिनट पढ़ने का समय|📝 579 शब्द|📅 26 Feb 2024

डेली संवाद, अमृतसर/जालंधर/लुधियाना। GST Bogus Billing Scam: पंजाब की भगवंत मान सरकार टैक्स चोरों के खिलाफ सख्त एक्शन ले रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से टैक्स चोर नए नए फार्मूले निकाल लेते हैं। पुराने तांबा और पीतल के खरीदने और बेचने में लाखों रुपए की रोजाना टैक्स चोरी हो रही है।

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जानकारी के मुताबिक जालंधर, लुधियाना और अमृतसर में स्क्रैप की आड़ में पुराना तांबा और पीतल बेचकर रोजाना लाखों रुपए की टैक्स चोरी किया जा रहा है। इस खेल में जीएसटी के कुछ अफसर भी मिले हुए हैं, जो पीतल से लोड गाड़ियों को स्क्रैप के बिल पर पासिंग करवा रहे हैं। इससे सरकार को न केवल लाखों रुपए रोज का नुकसान हो रहा है, वहीं टैक्स चोरों के हौसले बुलंद हैं।

तांबा पीतल कारोबारियों को स्क्रैप (लोहा) का फर्जी बिल

सूत्र बता रहे हैं कि लुधियाना में बोगस बिलिंग के जरिए जालंधर के तांबा पीतल कारोबारियों को स्क्रैप (लोहा) का फर्जी बिल काटा जाता है। इस फर्जी बिल के आधार पर जालंधर और लुधियाना के कुछ कारोबारी रोज लाखों रुपए की टैक्स चोरी कर रहे हैं।

लाखों रुपए की टैक्स चोरी की जाती

जीएसटी विभाग से जुड़े सूत्र बता रहे हैं कि विभाग के कुछ बड़े अधिकारी तांबा और पीतल के लोड गाड़ियों को पास करवाते हैं। अगर कार्रवाई की बात आती है तो तांबा और पीतल से लोड गाड़ियों को स्क्रैप दिखा कर मामूली जुर्माना कर दिया जाता है। इसके बाद लाखों रुपए की टैक्स चोरी की जाती है।

टैक्स चोरी की गणित ऐसे समझें

जालंधर में स्क्रैप का रेट महज 35 रुपए किलो है। जबकि पुराने तांबा और पीतल का रेट इससे कई गुना ज्यादा है। तांबा का रेट 600 रुपए किलो है, जबकि पीतल का रेट 450 रुपए किलो है। अगर बात स्क्रैप, तांबा और पीतल पर 18 फीसदी जीएसटी लगती है।

अगर एक गाड़ी में 1 टन (10 कुंतल) तांबा लोड है, तो इसकी कीमत करीब 6 लाख रुपए बनेगी। इस पर 18 फीसदी जीएसटी करीब 108,000 रुपए बनती है। इस हिसा से 1 टन तांबा का बिल 7,08,000 रुपए बनती है। जबकि 1 टन स्क्रैप की कीमत महज 35000 रुपए होती है, इस पर 18 फीसदी जीएसटी 6300 रुपए बनती है।

1 टन में लाख रुपए की टैक्स चोरी

जिस तांबे की जीएसटी 1.08 लाख से ऊपर बनती थी, उसे स्क्रैप दिखा कर महज 6300 रुपए बना दी जाती है, यानि 1 टन तांबे पर सीधे 1 लाख रुपए की जीएसटी चोरी होती है। अगर बिल काटते हैं तो 1 टन पर 1 लाख रुपए की जीएसटी चोरी की जाती है, अगर बिल नहीं काटते हैं तो पूरी चोरी हो रही है।

कुछ ऐसा ही पीतल की गाड़ियों के साथ है। 1 टन पीतल की कीमत करीब 4.50 लाख रुपए होती है। इस पर 18 फीसदी जीएसटी 81000 रुपए होती है। जबकि इसे स्क्रैप दिखाकर सीधे 1 टन पर 80 हजार से ज्यादा जीएसटी की चोरी की जाती है। ये बड़ा खेल जालंधर में चल रहा है।

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इस संबंध में विभागीय अधिकारी आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से परहेज कर रहे हैं। जीएसटी के अधिकारियों को जब इस खेल के बारे में पूछा गया तो वे इससे पूरी तरह से अनभिज्ञ नजर आए। फिलहाल तांबा और पीतल को स्क्रैप दिखाकर सरकार को रोज लाखों रुपए का चूना लगाया जा रहा है।

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