Smriti Irani: स्मृति इरानी अगर ‘चीनी कम’ मूवी देख लेती, तो ‘पप्पू’ के PA से चुनाव न हारती, पढ़ें सफर शुक्ला की आंखों देखी रिपोर्ट…

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⏱️ 7 मिनट पढ़ने का समय|📝 860 शब्द|📅 05 Jun 2024

Smriti Irani: 25 मई 2007, यानि की 17 साल पहले 140 मिनट की फिल्म चीनी कम (Cheeni Kum) अगर अमेठी (Amethi) की पूर्व सांसद और पूर्व एक्टर स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने देखी होती तो शायद वो चुनाव नहीं हारती। यह कहते हुए राजा राम ने शर्मा टी स्टाल पर कौन बनेगा प्रधानमंत्री की बहस में ऐसे कूद पड़े जैसे 2024 के चुनाव नतीजे में PM की दावेदारी लेकर अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की सीक्रेट टीम।

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उधर, बगल में चाय की चुस्की लगाते हुए राम भवन के कानों ने जैसे ही सुना उसे दिमाग तक पहुंचाया ही था कि हाथ जैसे गिलास गिर ही जाता मुंह में जाने वाली चाय छलक ऐसे नीचे आ गिरी जैसे यूपी में बीजेपी। खैर, कहने लगे स्मृति ईरानी की हार और जीत से फिल्म का क्या ताल्लुक। सवाल वाजिब था, मैं भी मूक बनकर सब कुछ देखता रहा, जवाब क्या मिलेगा वो सोचता रहा।

PM Narendra Modi
PM Narendra Modi

राम भवन के सवाल सुनते ही राजा राम के चेहरे पर वैसी ही मुस्कान दिखी जैसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर कल शाम पार्टी के मुख्यालय पर दिखी थी। बड़े इत्मीनान से राजा राम कहने लगे स्मृति ईरानी इसलिए हारी क्योंकि उन्होंने चीनी 13 रूपए में बेचने का वादा किया था , पूरी कर न पाई । जबकि फिल्म में अमिताभ बच्चन ने वादा निभाया था, चीनी कम थी लेकिन एक्टिंग खूब थी, तब्बू भी थी।

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यह फ़िल्म डायबिटीज पेशेंट अब भी खूब देखते है, इन्होंने तो सास भी कभी बहू थी शो में आदर्श बहू थी, लेकिन वास्तव में चीनी कम हो गई, राहुल गांधी को हराने के बाद पप्पू कहकर जिसे ताना मारा करती थी उसी के निजी सहायक ने निजी हार का कलंक किशोरी लाल ने लगा दिया है, खैर हार जीत तो लगी रहती है।

Rahul Gandhi File Photo
Rahul Gandhi File Photo

राम भवन ने जवाब सुनते ही कहा कि स्मृति ईरानी वास्तव में जनता के बीच कम रही लेकिन उनकी कमी संसद और पीएम को खलती रहेगी, पार्टी की 5 स्टार है, अगर पीएम मोदी जी गलती न हुई तो 5 सरकार 5 साल तक वर्ना 5 मिनट का भरोसा नहीं। पलटी बाबू कब पलटी मार जाएं या फिर नायडू बाबू,बाबू बाबू कहते मोदी का दामन छोड़ हाथ कांग्रेस से मिला लिया तब कौन बनेगा पीएम ?

Nitish Kumar And Chandra Babu
Nitish Kumar And Chandra Babu

सवाल राजा राम पर सीधा था तभी बगल बैठे दशरथ बोल पड़े कि हमारी मानों या ना मानों बीजेपी को अहंकार हो गया था तभी सबक सिखाया है या तो यह बात हो सकती है या फिर स्वार्थी निकले ऐसे यूपी वाले जिन्होंने हरा दिया दोनों सवालों का जवाब एक ही है कि जो राम को लाएं हैं, उन्हें हम लाएंगे, यह एक भजन ने सारी गेम बिगाड़ी है।

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अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर श्री रामलला जी की पूजा करते होते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

हां राम जी को भवन दिया है, राजा राम के समय यानि राम राज्य की तुलना देने से यह केवल सबक मिला है लेकिन PM तो मोदी ही बनेंगे, यह सुनते ही राजा राम और राम भवन के चेहरे पर तसल्ली के लक्षण दिखे तो मैं भी चुप होकर बस तीनों सज्जन के नामों को अपने दिमाग में कैद कर मन ही मन यह सोचने लगा कि शायद मोदी जी के मन की बात गांव गांव पहुंच नहीं पाई क्योंकि जमाना मोबाइल का है।

Modi Yogi
Modi Yogi

दूसरी तरफ राजा वही जो राम जैसा हो वैसे इतनी मर्यादा मोदी जी में नामुमकिन है, ऐसे में मोदी और योगी के यूपी को लेकर कभी सोचा न होगा कि ऐसा होगा, वैसे आवारा पशु और आवारा लोग कभी भी पलट जाते हैं और जनता ऐसी है जो अब पूछती नही की चीनी कम है ज्यादा बल्कि चीनी टेबल पर रख देती है कि चीनी कम लोगे या ज्यादा।

Cheeni Kum
Cheeni Kum

अब ज्यादा लंबी नहीं बस चीनी कम से याद आया कि चीनी के बजाए गुड़ का प्रयोग करें चीनी कम हो ही नही सकती। चीनी से याद आया चीनी फिर आंख दिखाने के तक में है, अगर राहुल गांधी प्रधानमंत्री और अखिलेश यादव उप प्रधानमंत्री बन जाते है तब देश की बागडोर इन्हीं के हाथों में होगी।

Akhilesh Yadav
Akhilesh Yadav

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वैसे यह सोच रहा था तभी दिमाग ने हिलाया और कहा हिल गए हो क्या, बहुमत लाना है यह थोड़ी कि बहू मत लाना है, स्मृति ईरानी की यह बात अमेठी वाले सास भी कभी बहू थी की रील बहू को संसद लेकर नहीं गई।

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पहली बार योगी और अयोध्या नही

प्रधानमंत्री ने अब तक चुनाव में उत्तर प्रदेश का नाम पीएम बनने से पहले लिया करते थे, कल एक बार भी नाम नहीं लिया, योगी धर्म भूल गए योगी का नाम नहीं लिया, यह मन में सवाल तो उठा लेकिन जो जीता वहीं सिकंदर यह मुहावरा सोच सोच प्लेट की तरह पलट गई की कही पलटू राम पलटी न मार जाएं, तभी दिमाग बोला बहुत कुछ सीक्रेट है मोदी के पास, योगी के पास सब मैनेज हो जायेगा वर्ना फिर वही होगा जो राम जी जाने… (लेखक- रमेश शुक्ला सफर, वरिष्ठ पत्रकार हैं)

















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