डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar Sarvodya Hospital Medical Fraud Case: जालंधर (Jalandhar) के बहुचर्चित सर्वोदय अस्पताल (Sarvodya Hospital) मेडिकल फ्रॉड मामले में नामजद आरोपियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। धोखाधड़ी से जुड़े इस Non-Bailable केस में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस से आरोपियों की गिरफ्तारी की स्थिति को लेकर रिपोर्ट तलब की है।
यह अहम कार्यवाही माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी–8, जालंधर (Jalandhar) की अदालत में डॉ. पंकज त्रिवेदी (Dr. Pankaj Trivedi) बनाम डॉ. राजेश अग्रवाल (Dr. Rajesh Agarwal) मामले में हुई है। मामले में शिकायतकर्ता की ओर से अदालत में धारा 75 Cr.P.C./79 BNSS के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी करने संबंधी अर्जी दायर की गई थी।

FIR दर्ज करने के बाद गिरफ्तारी नहीं
इस अर्जी पर संज्ञान लेते हुए माननीय अदालत ने जालंधर (Jalandhar) के थाना नवी बारादरी के SHO को निर्देश दिए हैं कि वे FIR नंबर 233, दिनांक 23.12.2025 में नामजद सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की वर्तमान स्थिति को लेकर विस्तृत रिपोर्ट अदालत में दाखिल करें।
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अदालत ने यह रिपोर्ट 31 जनवरी 2026 तक प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में आवश्यक आदेश 14 जनवरी 2026 को पारित किया गया। गौरतलब है कि इससे पहले इसी एफआईआर में गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की ओर से बार-बार यह कहा जाता रहा है कि मामले की इन्वेस्टीगेशन चल रही है या फिर विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर दिया गया है।

कोर्ट ने पुलिस से तलब की रिपोर्ट
हालांकि, अब अदालत द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस ने अब तक क्या ठोस कार्रवाई की है और जांच किस स्तर पर पहुंची है। जानकारी के अनुसार, दिनांक 23 दिसंबर 2025 को थाना नवी बारादरी, जालंधर (Jalandhar) में एफआईआर नंबर 233 दर्ज की गई थी।
इस एफआईआर में सर्वोदय अस्पताल (Sarvodya Hospital) से जुड़े डॉक्टर राजेश अग्रवाल, डॉ. कपिल गुप्ता, डॉ. संजय मित्तल, डॉ. अनवर खान तथा नोएडा निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट संदीप कुमार सिंह को नामजद किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी), 467, 468, 471 (फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल), 477-A (हिसाब-किताब में हेराफेरी) और 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

Non-Bailable श्रेणी में धाराएं लगी
पीड़ित के वकील के अनुसार ये सभी धाराएं गंभीर और Non-Bailable श्रेणी में आती हैं। एफआईआर के अनुसार, आरोपी डॉक्टरों पर अपने ही पार्टनर डॉक्टरों के साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने के गंभीर आरोप हैं। शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से दस्तावेजों में हेरफेर की और फर्जी लेखा-जोखा दिखाकर सर्वोदय अस्पताल को घाटे में दर्शाया, जिससे अन्य पार्टनर्स को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
आरोप यह भी है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में वित्तीय दस्तावेजों को मैनेज करने के लिए CA संदीप कुमार सिंह की भूमिका भी संदिग्ध रही है। मामले में अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी न होने के चलते शिकायतकर्ता ने अदालत का रुख किया था और गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग की थी। अदालत द्वारा अब SHO से रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है।
अगली सुनवाई 31 जनवरी को
अब सभी की निगाहें 31 जनवरी 2026 पर टिकी हैं, जब पुलिस अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करेगी। इसी रिपोर्ट से यह तय होगा कि सर्वोदय अस्पताल (Sarvodya Hospital) मेडिकल फ्रॉड केस में आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है और आरोपियों पर कानून का शिकंजा कितना कसता है।








