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Monday, 21 September 2026

Punjab News: कनाडा में 2 गुरुद्वारों की प्रॉपर्टी पर ₹102 करोड़ का लोन, कर्ज न चुकाने पर कोर्ट ने लगाई रोक

Punjab News: कनाडा में 2 गुरुद्वारों की प्रॉपर्टी पर ₹102 करोड़ का लोन, कर्ज न चुकाने पर कोर्ट ने लगाई रोक

डेली संवाद, जालंधर। Punjab News: कनाडा में दो प्रमुख गुरुद्वारों की संपत्तियों को लोन से जुड़े मामले में सिक्योरिटी के तौर पर इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। ओंटारियो स्थित सिख स्पिरिचुअल सेंटर टोरंटो और नानकसर ठाठ ईशर दरबार, ब्रैम्पटन से जुड़ी प्रॉपर्टी के आधार पर कथित तौर पर करीब 1.5 करोड़ कनाडाई डॉलर (लगभग ₹102.6 करोड़) तक की लोन सुविधा बनाई गई थी।

अदालती दावे के मुताबिक, इसमें से करीब ₹82.1 करोड़ की राशि जारी की गई, लेकिन भुगतान को लेकर विवाद पैदा होने के बाद मामला ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस पहुंच गया। इस मामले में कनाडा के पूर्व लिबरल सांसद और वकील राजविंदर ग्रेवाल तथा संबंधित लॉ फर्म की भूमिका भी कानूनी विवाद का हिस्सा बताई गई है।

अप्रैल 2025 में दिया गया था लोन

अदालत में दाखिल दस्तावेजों के मुताबिक, कर्ज देने वाली कंपनियों SSMT Management Inc. और Oculus Mortgage GP Inc. ने 25 अप्रैल 2025 को सिख स्पिरिचुअल सेंटर टोरंटो को 1 करोड़ कनाडाई डॉलर तक का लोन उपलब्ध कराया था।

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इसके बाद 20 मई 2025 को इसकी सीमा बढ़ाकर 1.5 करोड़ कनाडाई डॉलर कर दी गई। इसके तहत ब्रैम्पटन स्थित नानकसर गुरुद्वारे की संपत्ति को भी सिक्योरिटी के तौर पर शामिल किया जाना था। लोनदाता पक्ष का दावा है कि करीब ₹82.1 करोड़ जारी किए गए, लेकिन निर्धारित भुगतान नहीं होने के कारण बकाया और ब्याज की रकम तेजी से बढ़ी।

15% से बढ़कर 24% हुआ ब्याज

दावे के मुताबिक, शुरुआत में लोन पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज तय किया गया था। समय पर भुगतान नहीं होने के बाद ब्याज दर बढ़ाकर 24 प्रतिशत कर दी गई।

लोनदाता की ओर से अदालत में 1.3 करोड़ कनाडाई डॉलर से अधिक की बकाया राशि को लेकर सिविल दावा किया गया है। हालांकि ये रकम और देनदारियां फिलहाल कानूनी कार्यवाही का विषय हैं।

गुरुद्वारे की प्रॉपर्टी की सिक्योरिटी को लेकर विवाद

इस मामले में एक प्रमुख विवाद ब्रैम्पटन गुरुद्वारे की संपत्ति पर कानूनी सिक्योरिटी दर्ज कराने को लेकर है। लोनदाता का आरोप है कि संपत्ति पर आवश्यक सेकेंड चार्ज दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

इसी मुद्दे को लेकर संबंधित पक्षों और कानूनी प्रतिनिधियों की भूमिका भी जांच और अदालती कार्यवाही के दायरे में है।

कोर्ट ने प्रॉपर्टी बेचने और नया लोन लेने पर लगाई रोक

मामले में ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट के जज फ्रेडरिक एल. मायर्स ने 11 सितंबर को आदेश जारी करते हुए अगली सुनवाई तक ब्रैम्पटन स्थित संबंधित गुरुद्वारा संपत्ति को बेचने या उस पर नया लोन लेने पर रोक लगाई है।

मामले की स्थिति को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। पूर्व सांसद ग्रेवाल की ओर से पेश वकील साइमन बीबर के मुताबिक विवाद का समाधान हो चुका है, जबकि ऋणदाता पक्ष की वकील मारिया नाइमार्क का कहना है कि कानूनी मामला अभी जारी है।

गुरुद्वारों और लॉ फर्म के बीच लेन-देन भी जांच के दायरे में

मामले से जुड़े रिकॉर्ड में संबंधित लॉ फर्म के ट्रस्ट अकाउंट और गुरुद्वारों के बीच हुए कुछ वित्तीय लेन-देन का भी उल्लेख है। इन लेन-देन की प्रकृति और कानूनी स्थिति को लेकर कार्यवाही जारी बताई गई है।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी लोन सुविधा किस उद्देश्य से ली गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से लोन के उद्देश्य को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है।