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Wednesday, 23 September 2026

CDSCO Drug Alert 2026: देशभर में 221 दवाओं के सैंपल फेल, बच्चों के सिरप से लेकर हार्ट-किडनी की मेडिसिन है शामिल

CDSCO Drug Alert 2026: देशभर में 221 दवाओं के सैंपल फेल, बच्चों के सिरप से लेकर हार्ट-किडनी की मेडिसिन है शामिल

डेली संवाद, नालागढ़। CDSCO Drug Alert 2026: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के अगस्त 2026 के ड्रग अलर्ट ने देश के फार्मा सेक्टर में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त के राष्ट्रीय ड्रग अलर्ट में देशभर की 220 दवाओं के सैंपल ‘Not of Standard Quality’ (NSQ) पाए गए, जिनमें हिमाचल प्रदेश में निर्मित 62 दवाएं शामिल हैं।

हिमाचल प्रदेश देश के प्रमुख फार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब में शामिल है। अगस्त अलर्ट में राज्य के बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, पांवटा साहिब, कालाअंब, सोलन, कांगड़ा और ऊना समेत कई क्षेत्रों में स्थित दवा इकाइयों में बने उत्पादों के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।

बच्चों के सिरप से लेकर इंजेक्शन तक शामिल

गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए उत्पादों में अलग-अलग श्रेणी की दवाएं शामिल हैं। इनमें बच्चों की दवाएं, एंटीबायोटिक, बुखार और खांसी की दवाएं, पेट संबंधी दवाएं, हृदय और किडनी से संबंधित दवाएं, आंखों की दवाएं, इंजेक्शन और विटामिन उत्पाद शामिल बताए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार कुछ सैंपल में assay content, dissolution और product description से जुड़ी कमियां सामने आईं। कुछ इंजेक्शन में particulate matter पाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

हिमाचल की फार्मा इंडस्ट्री पर बढ़ी निगरानी

हिमाचल में बड़ी संख्या में दवा कंपनियां होने के कारण राज्य का फार्मा सेक्टर लगातार नियामक एजेंसियों की निगरानी में रहता है। अगस्त के अलर्ट में फेल हुए सैंपलों को लेकर एक बार फिर राज्य की दवा निर्माण इकाइयों में गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर सवाल उठे हैं।

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उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल के कई फार्मा क्लस्टरों में निर्मित दवाएं इस सूची में शामिल हैं। कुछ कंपनियों के एक से अधिक उत्पादों के सैंपल भी गुणवत्ता जांच में फेल हुए हैं।

फेल सैंपल वाली कंपनियों को नोटिस

हिमाचल के स्टेट ड्रग कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर के अनुसार, जिन कंपनियों के दवा सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल हुए हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई शुरू की गई है।

संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। प्रभावित बैचों की बिक्री और वितरण रोकने तथा बाजार में उपलब्ध स्टॉक को वापस मंगाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

‘NSQ’ का मतलब क्या है?

किसी दवा के सैंपल का Not of Standard Quality (NSQ) घोषित होना यह दर्शाता है कि परीक्षण के दौरान वह निर्धारित गुणवत्ता मानकों में से किसी एक या अधिक पैरामीटर पर खरी नहीं उतरी। इसका मतलब अपने आप में यह नहीं है कि हर ऐसी दवा नकली या मिलावटी है।

CDSCO और राज्य ड्रग कंट्रोलर ऐसे मामलों में संबंधित बैच, निर्माता और गुणवत्ता संबंधी कमी की जांच करते हैं। CDSCO अपनी वेबसाइट पर ड्रग अलर्ट जारी करता है और गुणवत्ता जांच में फेल सैंपलों की जानकारी सार्वजनिक करता है।

इंजेक्शन में पार्टिकुलेट मैटर की चिंता

अगस्त के ड्रग अलर्ट से जुड़ी रिपोर्ट में कुछ इंजेक्शन में particulate matter मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार इनमें Amikacin Sulphate, Rabeprazole Sodium और Meropenem जैसे इंजेक्शन शामिल थे।

विशेषज्ञों के अनुसार इंजेक्शन में बाहरी कणों की मौजूदगी गुणवत्ता से जुड़ी गंभीर समस्या हो सकती है। हालांकि किसी विशेष उत्पाद के उपयोग से संभावित जोखिम का आकलन संबंधित जांच और उत्पाद की प्रकृति के आधार पर किया जाता है।

पंजाब की दवा कंपनियां भी जांच के दायरे में

ड्रग अलर्ट में पंजाब में निर्मित दवाओं के सैंपल भी गुणवत्ता जांच में फेल होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे मामलों में संबंधित राज्य ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी द्वारा निर्माता और संबंधित बैच की जांच की जाती है।

दवा के किसी बैच के NSQ पाए जाने की स्थिति में संबंधित कंपनियों को नियामक निर्देशों के मुताबिक बाजार से स्टॉक वापस लेने और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा जा सकता है।

CDSCO की जांच के बाद सामने आएगा अंतिम विवरण

दवाओं के सैंपल फेल होने के बाद संबंधित निर्माता कंपनियों के खिलाफ नियामकीय प्रक्रिया शुरू होती है। संबंधित बैच की बिक्री पर रोक, बाजार से स्टॉक वापस लेने और कंपनी से जवाब मांगने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

ऐसे में अगस्त ड्रग अलर्ट के बाद पंजाब और हिमाचल प्रदेश की संबंधित दवा इकाइयों पर नियामक निगरानी बढ़ने की संभावना है। CDSCO की आधिकारिक ड्रग अलर्ट सूची में प्रत्येक फेल सैंपल के उत्पाद, निर्माता, बैच और परीक्षण संबंधी विवरण देखे जा सकते हैं।