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Monday, 26 October 2026

Salary Scam: ₹1.10 करोड़ के वेतन घोटाले में फंसे पुलिसकर्मियों को मिल सकती है राहत, SIT ने पूरी की जांच

Salary Scam: ₹1.10 करोड़ के वेतन घोटाले में फंसे पुलिसकर्मियों को मिल सकती है राहत, SIT ने पूरी की जांच

डेली संवाद, चंडीगढ़। Salary Scam: चंडीगढ़ पुलिस के वेतन घोटाले से जुड़े मामले में बड़ी अपडेट सामने आई है। करीब ₹1.10 करोड़ के इस घोटाले में जांच का सामना कर रहे 152 पुलिसकर्मियों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) अपनी जांच पूरी कर चुकी है और चार बार अदालत में चार्जशीट पेश कर चुकी है।

इस मामले में करीब 170 पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच भी चल रही है। घोटाले के कारण कई कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित हुई है, जबकि रिटायर हो चुके कुछ कर्मचारियों की पेंशन से जुड़े मामले भी अटके हुए हैं। हालांकि, बाकी पुलिसकर्मियों को राहत मिलने का अंतिम फैसला संबंधित विभाग और अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।

कैग के ऑडिट में सामने आया ₹1.10 करोड़ का घोटाला

चंडीगढ़ पुलिस के सैलरी घोटाले का खुलासा वर्ष 2020 में एक शिकायत के बाद हुआ था। पुलिस कर्मचारियों के वेतन रिकॉर्ड की जांच के दौरान दिसंबर 2019 के वेतन विवरण में 35 बैंक खातों में निर्धारित वेतन से अधिक रकम जमा होने का पता चला।

इसके बाद पुलिस विभाग के अनुरोध पर कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) ने वर्ष 2015 से 2020 तक के वेतन रिकॉर्ड का विशेष ऑडिट किया। ऑडिट में करीब ₹1.10 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान का पता चला। इसके बाद मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच में विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई।

ई-सेवार्थ पोर्टल की खामियों का उठाया गया फायदा

जांच में सामने आया कि पुलिस मुख्यालय में तैनात कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर ई-सेवार्थ पोर्टल की खामियों का फायदा उठाकर वेतन भुगतान में गड़बड़ी की थी।

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आरोप है कि वाहन भत्ता, राशन भत्ता और एरियर यानी बकाया वेतन से संबंधित फर्जी प्रविष्टियां दर्ज करके कुछ पुलिसकर्मियों के बैंक खातों में निर्धारित वेतन से अधिक रकम जमा कराई गई। इस तरह सरकारी खजाने से अतिरिक्त भुगतान किए जाने का मामला सामने आया।

अकाउंट्स ब्रांच में तैनात दो कर्मचारी गिरफ्तार

इस मामले में सेक्टर-3 थाना पुलिस ने 25 फरवरी 2023 को केस दर्ज किया था। इसमें भारतीय दंड संहिता की धाराओं 201, 409, 420, 467, 468, 471, 477ए और 120बी के अलावा भ्रष्टाचार निरोधक कानून के प्रावधान भी लगाए गए थे। जांच के दौरान एएसआई विनोद कुमार और कांस्टेबल राजबीर सिंह को गिरफ्तार किया गया।

बताया गया कि घोटाले की अवधि के दौरान दोनों अकाउंट्स ब्रांच में तैनात थे। विनोद कुमार ट्रेजरी से संबंधित ड्यूटी संभालता था, जबकि राजबीर सिंह वेतन बिल, बकाया वेतन और एलटीसी (लीव ट्रैवल कन्सेशन) से जुड़े भुगतान तथा लीव इनकैशमेंट का काम देखता था।

खातों में रकम जमा कराकर हिस्सा बांटने का आरोप

जांच के अनुसार, अतिरिक्त वेतन की रकम अलग-अलग पुलिसकर्मियों के बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिए खाताधारकों को रकम का कुछ हिस्सा अपने पास रखने और शेष रकम संबंधित लोगों में बांटने का लालच दिया जाता था।

इस कथित तरीके से वेतन रिकॉर्ड में हेरफेर कर सरकारी धन का गलत भुगतान किए जाने की आशंका सामने आई। मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका और उनके खातों में जमा हुई रकम को लेकर जांच की गई।

152 पुलिसकर्मियों की पदोन्नति और पेंशन पर असर

सैलरी घोटाले में कुल 210 पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए थे। इनमें से 30 को पहले ही राहत मिल चुकी है। अब बाकी 152 पुलिसकर्मियों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

मामले के कारण विभागीय स्तर पर कार्रवाई और जांच का सामना कर रहे कर्मचारियों की पदोन्नति प्रभावित हुई है। वहीं, सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन से जुड़े कुछ मामले भी लंबित बताए गए हैं।

Chandigarh Police Salary Scam: आगे क्या होगा?

SIT की जांच पूरी होने के बाद अब संबंधित कर्मचारियों को राहत मिलने की संभावना पर नजर है। हालांकि, राहत किसे और किस आधार पर मिलेगी, यह विभागीय समीक्षा, उपलब्ध साक्ष्यों और अदालत के आदेशों पर निर्भर करेगा।

इस मामले में SIT चार बार अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और 18 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। अब जांच पूरी होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों की विभागीय स्थिति और लंबित मामलों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।