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Wednesday, 08 July 2026

Satluj: आखिर क्यों विवादों में घिरी दिलजीत की 'सतलुज'? जानिए भारत में बैन और OTT से हटने की पूरी कहानी

Satluj Movie
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डेली संवाद, नई दिल्ली। Satluj: अभिनेता दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) की बहुचर्चित फिल्म ‘सतलुज’ एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय तक सेंसर बोर्ड की मंजूरी न मिलने के कारण रिलीज से वंचित रही यह फिल्म हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर दर्शकों के लिए उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि, रिलीज के महज दो दिन बाद ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इस फैसले के बाद फिल्म को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है और सोशल मीडिया से लेकर फिल्म जगत तक इसकी चर्चा तेज हो गई है। यह फिल्म पहले ‘पंजाब 95’ के नाम से बनाई गई थी। इसकी कहानी प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है।

तीन साल तक अटकी रही फिल्म

खालरा ने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में कथित तौर पर हुए मानवाधिकार उल्लंघनों और हजारों अज्ञात शवों के गुप्त अंतिम संस्कार के मामलों को उजागर किया था। उनके खुलासों ने राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे। फिल्म लंबे समय से रिलीज का इंतजार कर रही थी, लेकिन केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से प्रमाणपत्र नहीं मिलने के कारण इसकी रिलीज टलती रही। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बोर्ड ने फिल्म में 127 कट लगाने का सुझाव दिया था।

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फिल्म निर्माताओं का दावा था कि केवल कट ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण बदलावों की भी मांग की गई थी। यहां तक कि जसवंत सिंह खालरा का नाम बदलने का सुझाव भी दिया गया था, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ। निर्माताओं का कहना था कि इतने व्यापक बदलावों के बाद फिल्म की मूल भावना और ऐतिहासिक संदर्भ प्रभावित हो जाते। इसी कारण फिल्म लंबे समय तक रिलीज नहीं हो सकी। [caption id="attachment_22817" align="aligncenter" width="1200"] Diljit Dosanjh Satluj Row Diljit Dosanjh Satluj Row[/caption]

क्या है फिल्म की कहानी?

‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की उस ऐतिहासिक लड़ाई को दिखाती है, जिसमें उन्होंने पंजाब में उग्रवाद के दौर के दौरान कथित फर्जी मुठभेड़ों और गुप्त अंतिम संस्कारों के मामलों की जांच की थी। उन्होंने ऐसे दस्तावेज और रिकॉर्ड जुटाए थे, जिनसे दावा किया गया कि कई लोगों के शवों का अंतिम संस्कार उनके परिवारों को बिना जानकारी दिए कर दिया गया था। उनकी इस जांच ने देश और विदेश में मानवाधिकार संगठनों का ध्यान आकर्षित किया। वर्ष 1995 में उनका अपहरण कर लिया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। इस मामले में बाद में कई पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया गया था।

ZEE5 से अचानक क्यों हटाई गई फिल्म?

फिल्म 3 जुलाई को ZEE5 पर स्ट्रीम हुई और दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने लगी। लेकिन 5 जुलाई को अचानक इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। ZEE5 ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि “मौजूदा हालात को देखते हुए ‘सतलुज’ अगली सूचना तक भारत में उपलब्ध नहीं होगी।” हालांकि, प्लेटफॉर्म ने यह स्पष्ट नहीं किया कि फिल्म को हटाने के पीछे कोई कानूनी आदेश, सेंसर बोर्ड से जुड़ा विवाद या अन्य प्रशासनिक कारण हैं। ZEE5 ने यह भी कहा कि वह फिल्म और उसके निर्माताओं के साथ खड़ा है तथा उचित प्रक्रिया के तहत जल्द से जल्द इसे दोबारा दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास करेगा।
 
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आखिर क्यों विवादों में है ‘सतलुज’?

फिल्म की विषयवस्तु बेहद संवेदनशील मानी जाती है। इसमें पंजाब के उस दौर को दिखाया गया है, जिसे राज्य के इतिहास का सबसे अशांत और विवादास्पद समय माना जाता है। फिल्म में लोकतांत्रिक व्यवस्था, प्रशासनिक कार्रवाई और मानवाधिकारों से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को उठाया गया है।

फिल्म के विवादित होने के पीछे कई प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं—

1. लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल: फिल्म यह दिखाने का प्रयास करती है कि उग्रवाद के दौर में किस तरह आम नागरिकों के अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों पर असर पड़ा। 2. मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा: कहानी में कथित अवैध हिरासत, गुप्त अंतिम संस्कार और मानवाधिकार हनन जैसे गंभीर आरोपों को प्रमुखता से दिखाया गया है। 3. फर्जी मुठभेड़ों का जिक्र: फिल्म में कथित फर्जी एनकाउंटर और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े कई संवेदनशील घटनाक्रम शामिल हैं, जो लंबे समय से बहस का विषय रहे हैं। 4. पंजाब के कठिन दौर की झलक: 1980 और 1990 के दशक के सामाजिक और राजनीतिक माहौल को फिल्म में विस्तार से प्रस्तुत किया गया है, जिसे कई लोग राज्य के इतिहास का काला अध्याय मानते हैं। 5. राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर टिप्पणी: फिल्म सत्ता, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे विषयों पर भी सवाल उठाती है, जिसके कारण इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है।

कलाकार और निर्देशन

‘सतलुज’ का निर्देशन हनी त्रेहान ने किया है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिका में नजर आए हैं, जबकि अर्जुन रामपाल और सुविंदर विक्की ने भी अहम किरदार निभाए हैं। फिल्म को एक बायोपिक ड्रामा के रूप में तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य जसवंत सिंह खालरा के संघर्ष और मानवाधिकारों के लिए उनकी लड़ाई को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करना है। फिलहाल फिल्म भारत में स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध नहीं है। ZEE5 ने भरोसा दिलाया है कि वह सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद इसे दोबारा दर्शकों के लिए उपलब्ध कराने का प्रयास करेगा। हालांकि, फिल्म की वापसी कब होगी, इस पर अभी कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है। ऐसे में ‘सतलुज’ का रिलीज सफर फिलहाल एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में पहुंच गया है।