Saturday, 31 January 2026
जालंधर
Jalandhar News: शिक्षा को जाति के आधार पर बांटा जा रहा है, समानता की शुरुआत शिक्षा से होनी चाहिए- संजय सहगल
डेली संवाद, जालंधर।
Jalandhar News: कांग्रेस नेता संजय सहगल ने कहा कि पंजाब में शिक्षा को जाति के आधार पर बांटा जा रहा है, जो समानता और सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है। शिक्षा का काम छात्रों को जोड़ना है, उन पर लेबल लगाना नहीं, और मुख्यमंत्री भगवंत मान (
Bhgawant Mann
) से शिक्षा नीति में संशोधन कर जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को भी छात्रवृत्ति देने की मांग की।
संजय सहगल ने कहा, “सहायता जरूरत और मेरिट के आधार पर होनी चाहिए, सिर्फ श्रेणी के आधार पर नहीं। वंचित वर्गों को समर्थन देना जरूरी है, लेकिन जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को पूरी तरह नजरअंदाज करना यह संदेश देता है कि उनकी मेहनत और परेशानी की कोई कीमत नहीं है।”
सहगल ने कहा कि एससी छात्रों को छात्रवृत्ति देना जरूरी है ताकि हाशिए पर पड़े वर्गों को आगे बढ़ाया जा सके, लेकिन जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बाहर रखना अन्याय की भावना पैदा करता है। “इस तरह की नीतियां मेरिट, निष्पक्षता और समान अवसर को बढ़ावा देने के बजाय चुपचाप जातिवाद के बीज बो देती हैं,”
“जातिवाद समाज से नहीं, शिक्षा से शुरू होता है। जब छात्रवृत्तियां मेरिट या जरूरत के बजाय जाति के आधार पर तय होती हैं, तो जनरल कैटेगरी के छात्र खुद को कमतर महसूस करते हैं। सच्ची समानता का मतलब है हर छात्र को समान अवसर।”
संजय सहगल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग की कि शिक्षा नीति की तुरंत समीक्षा कर उसमें संशोधन किया जाए और सभी वर्गों के छात्रों को आर्थिक स्थिति और मेरिट के आधार पर छात्रवृत्ति दी जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था अधिक समावेशी, निष्पक्ष और वास्तव में समान बन सके।
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उन्होंने कहा कि केवल जाति के आधार पर दी जाने वाली छात्रवृत्तियां शिक्षा व्यवस्था में भेदभाव की भावना पैदा करती हैं। “जाति आधारित विभाजन की जड़ें शिक्षा से ही शुरू होती हैं, जहां समानता सिखाई जानी चाहिए, भेदभाव नहीं। शिक्षा समानता का साधन होनी चाहिए, विभाजन का नहीं,”
सहगल ने कहा कि एससी छात्रों को छात्रवृत्ति देना जरूरी है ताकि हाशिए पर पड़े वर्गों को आगे बढ़ाया जा सके, लेकिन जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बाहर रखना अन्याय की भावना पैदा करता है। “इस तरह की नीतियां मेरिट, निष्पक्षता और समान अवसर को बढ़ावा देने के बजाय चुपचाप जातिवाद के बीज बो देती हैं,”
“जातिवाद समाज से नहीं, शिक्षा से शुरू होता है। जब छात्रवृत्तियां मेरिट या जरूरत के बजाय जाति के आधार पर तय होती हैं, तो जनरल कैटेगरी के छात्र खुद को कमतर महसूस करते हैं। सच्ची समानता का मतलब है हर छात्र को समान अवसर।”
संजय सहगल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग की कि शिक्षा नीति की तुरंत समीक्षा कर उसमें संशोधन किया जाए और सभी वर्गों के छात्रों को आर्थिक स्थिति और मेरिट के आधार पर छात्रवृत्ति दी जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था अधिक समावेशी, निष्पक्ष और वास्तव में समान बन सके।