Saturday, 04 July 2026
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Punjab News: गोल्डन टेंपल में CM तीर्थ यात्रा योजना के श्रद्धालुओं के उतरवाए आई-कार्ड, सेवादारों ने जताई आपत्ति
डेली संवाद, अमृतसर।
Punjab News: श्री हरमंदिर साहिब (गोल्डन टेंपल) में शनिवार को उस समय विवाद की स्थिति बन गई, जब पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत पहुंचे श्रद्धालुओं से मुख्यमंत्री भगवंत मान की तस्वीर वाले पहचान पत्र (आई-कार्ड) उतरवा दिए गए।
जानकारी के अनुसार, पंजाब के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु योजना के तहत श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकने पहुंचे थे। प्रवेश के दौरान सेवादारों ने श्रद्धालुओं के गले में लटके आई-कार्ड पर आपत्ति जताई और उन्हें हटाने के लिए कहा।
गोल्डन टेंपल में CM तीर्थ यात्रा योजना के श्रद्धालुओं के उतरवाए आई-कार्ड[/caption]
गौरतलब है कि 15 जून को श्री अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पंथ विरोधी और गुरु विरोधी घोषित किया था। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने यह फैसला अमृतसर स्थित अकाल तख्त सचिवालय से सुनाया था।
अकाल तख्त के अनुसार, मुख्यमंत्री से जुड़ी एक कथित वायरल वीडियो और उस मामले में हुई चर्चा के बाद पांचों तख्तों के सिंह साहिबानों ने विचार-विमर्श कर यह निर्णय लिया था।
श्रद्धालुओं ने आई-कार्ड उतार दिए
सेवादारों का कहना था कि श्री अकाल तख्त साहिब पहले ही मुख्यमंत्री भगवंत मान को पंथ विरोधी (पंथ दोखी) घोषित कर चुका है। ऐसे में उनकी तस्वीर वाले पहचान पत्र पहनकर गुरु घर में प्रवेश करना उचित नहीं है। इसके बाद श्रद्धालुओं ने आई-कार्ड उतार दिए और दर्शन के लिए आगे बढ़े।यह भी पढ़ें: Japnoor Travels के सतनाम सिंह पर 45 लाख रुपए ठगी का आरोप, किसानों ने दफ्तर घेरा
वहीं, श्रद्धालुओं का कहना था कि ये पहचान पत्र उन्हें सरकारी व्यवस्था के तहत यात्रा के दौरान दिए गए थे। उनका उद्देश्य केवल श्री हरमंदिर साहिब में माथा टेकना और धार्मिक दर्शन करना था, किसी तरह का विवाद पैदा करना नहीं। [caption id="attachment_22674" align="aligncenter" width="1200"]
गोल्डन टेंपल में CM तीर्थ यात्रा योजना के श्रद्धालुओं के उतरवाए आई-कार्ड[/caption]
गौरतलब है कि 15 जून को श्री अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पंथ विरोधी और गुरु विरोधी घोषित किया था। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने यह फैसला अमृतसर स्थित अकाल तख्त सचिवालय से सुनाया था।
अकाल तख्त के अनुसार, मुख्यमंत्री से जुड़ी एक कथित वायरल वीडियो और उस मामले में हुई चर्चा के बाद पांचों तख्तों के सिंह साहिबानों ने विचार-विमर्श कर यह निर्णय लिया था।