Friday, 13 March 2026
जालंधर
Jalandhar News: जालंधर में MBD ग्रुप के मल्होत्रा परिवार को लगा बड़ा झटका, कृष्णा रिजॉर्ट्स मामले में आया अहम फैसला
डेली संवाद, जालंधर।
Jalandhar News: जालंधर-फगवाड़ा हाईवे पर स्थित कृष्णा रिजॉर्ट्स से जुड़े करीब 10 साल पुराने धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट गुरचरण सिंह सियाल को बरी कर दिया है। यह फैसला अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) हरप्रीत कौर की अदालत ने सुनाया। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि शिकायतकर्ता अपने आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका, जिसके चलते गुरचरण सिंह सियाल को आरोपों से मुक्त कर दिया गया।
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के इस मामले में गुरचरण सिंह सियाल (Gurcharan Singh Syal) की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दर्शन सिंह दयाल (Darshan Singh Dayal) ने बताया कि यह मामला एमबीडी ग्रुप (MBD Group) से जुड़ी कंपनी मैसर्स कृष्णा रियल एस्टेट एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित था। वर्ष 2016 में गुरचरण सिंह सियाल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 465, 466 और 468 के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों में केस दर्ज किया गया था।
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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी लॉ बोर्ड ने अपने आदेशों में गुरचरण सिंह सियाल की स्थिति को बहाल रखते हुए उन्हें कंपनी का डायरेक्टर माना था। अदालत की कार्यवाही के दौरान भी उन्हें डायरेक्टर के रूप में ही संबोधित किया जाता रहा। फैसले में कहा गया कि सियाल ने कंपनी की मोहर या वकालतनामे पर हस्ताक्षर करते समय किसी भी तरह के अवैध या अनधिकृत तरीके का उपयोग नहीं किया।
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वित्तीय नुकसान हुआ?
अदालत ने मामले की गहन जांच और सुनवाई के बाद अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि गुरचरण सिंह सियाल ने डायरेक्टर के तौर पर हस्ताक्षर किए गए वकालतनामे में किसी प्रकार की जालसाजी या धोखाधड़ी की मंशा से कार्य किया था। अदालत ने यह भी माना कि शिकायतकर्ता यह साबित नहीं कर पाया कि सियाल के किसी कदम से उसे या कंपनी को कोई वित्तीय नुकसान हुआ है।यह भी पढ़ें: Japnoor Travels के सतनाम सिंह पर 45 लाख रुपए ठगी का आरोप, किसानों ने दफ्तर घेरा
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने जिरह में यह भी स्वीकार किया कि वह न तो कंपनी का डायरेक्टर था और न ही कर्मचारी। इसके अलावा उसके पास इस मामले में आपराधिक शिकायत दर्ज कराने का अधिकार भी नहीं था। अदालत ने इसे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू माना।एमबीडी ग्रुप के डायरेक्टर ने नहीं दी गवाही
फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि एमबीडी ग्रुप (MBD Group) की मुख्य कंपनी की डायरेक्टर सतीश बाला मल्होत्रा, सोनिका मल्होत्रा और मोनिका मल्होत्रा ने इस मामले में कभी पुलिस के सामने गवाही नहीं दी। न ही उनके बयान जांच अधिकारी द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 161 के तहत दर्ज किए गए थे। अदालत ने जांच प्रक्रिया में इन कमियों को भी अपने आदेश में दर्ज किया। [caption id="attachment_80464" align="aligncenter" width="1200"]
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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी लॉ बोर्ड ने अपने आदेशों में गुरचरण सिंह सियाल की स्थिति को बहाल रखते हुए उन्हें कंपनी का डायरेक्टर माना था। अदालत की कार्यवाही के दौरान भी उन्हें डायरेक्टर के रूप में ही संबोधित किया जाता रहा। फैसले में कहा गया कि सियाल ने कंपनी की मोहर या वकालतनामे पर हस्ताक्षर करते समय किसी भी तरह के अवैध या अनधिकृत तरीके का उपयोग नहीं किया।