Tuesday, 10 February 2026
जालंधर
Jalandhar News: जालंधर में पुलिस और नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, लतीफपुरा के अवैध कब्जे पर चली डिच
डेली संवाद, जालंधर।
Jalandhar News: जालंधर शहर के लतीफपुरा इलाके में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। करीब तीन साल बाद मंगलवार सुबह प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए जमीन पर बैठे कब्जाधारियों को हटाया। सुबह करीब 7 बजे भारी पुलिस बल इलाके में पहुंचा और लगभग एक घंटे चली कार्रवाई के दौरान टेंट लगाकर बैठे लोगों को वहां से उठा लिया गया।
पुलिस ने मौके से टेंट जब्त किए और जमीन को खाली कराना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई को ऐसे समय अंजाम दिया गया, जब जालंधर
(Jalandhar)
प्रशासन की ओर से इसी मामले में मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। अदालत में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को जमीन पर कब्जे की मौजूदा स्थिति को लेकर जवाब दाखिल करना है। इससे पहले ही प्रशासन ने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की और अवैध कब्जे हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
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Latifpura Jalandhar[/caption]
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पुलिस ने न सिर्फ मुख्य रास्तों बल्कि आसपास की गलियों को भी बंद कर दिया। इसका असर आम लोगों पर भी पड़ा। सुबह सैर या अन्य जरूरी कामों से घर से निकले कई लोग वापस अपने ही घर नहीं पहुंच पाए। पास के मोहल्लों की महिलाएं जब अपने घरों की ओर जाने लगीं तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। महिलाओं ने पुलिस से आगे जाने की अनुमति देने की गुहार लगाई, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया।
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उस वक्त लतीफपुरा के लोगों के समर्थन में किसान संगठनों सहित कई राजनीतिक दल भी सामने आए थे। किसानों और पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के बीच बहस और तनाव की स्थिति बन गई थी। मामला काफी तूल पकड़ गया था और लंबे समय तक चर्चा में रहा था।
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फिलहाल इलाके में पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
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कई मकानों को तोड़ा गया
गौरतलब है कि लतीफपुरा इलाके में करीब 100 परिवार वर्षों से इस जमीन पर रह रहे थे। वर्ष 2022 में प्रशासन ने इन परिवारों को यहां से खाली करवा दिया था। उस दौरान कई मकानों को तोड़ा गया था, जिसके बाद बेघर हुए लोग इसी जमीन पर टेंट लगाकर रहने को मजबूर हो गए थे। तभी से यह इलाका प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच विवाद का केंद्र बना हुआ है।विरोध की गुंजाइश नहीं छोड़ी
2022 में कब्जा हटाने के दौरान बड़े स्तर पर विरोध देखने को मिला था। लोगों ने पुलिस कार्रवाई का जमकर विरोध किया था और हालात काफी बिगड़ गए थे। इसी अनुभव से सबक लेते हुए इस बार पुलिस ने पहले से ही कड़े इंतजाम कर लिए थे। किसी भी तरह के विरोध को रोकने के लिए लतीफपुरा की कब्जे वाली जमीन के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई। बाहर से किसी को भी इलाके में प्रवेश नहीं करने दिया गया। [caption id="attachment_101987" align="aligncenter" width="1200"]
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पुलिस ने न सिर्फ मुख्य रास्तों बल्कि आसपास की गलियों को भी बंद कर दिया। इसका असर आम लोगों पर भी पड़ा। सुबह सैर या अन्य जरूरी कामों से घर से निकले कई लोग वापस अपने ही घर नहीं पहुंच पाए। पास के मोहल्लों की महिलाएं जब अपने घरों की ओर जाने लगीं तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। महिलाओं ने पुलिस से आगे जाने की अनुमति देने की गुहार लगाई, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पुलिस ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया।
2022 की कार्रवाई की यादें फिर ताजा
लतीफपुरा में इससे पहले 9 दिसंबर 2022 को भी प्रशासन ने भारी पुलिस फोर्स के साथ कार्रवाई की थी। उस समय पूरे इलाके को सील कर दिया गया था और सुबह-सुबह प्रशासन की टीम अवैध निर्माण गिराने पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान लोगों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी। कई लोगों ने तब साफ कहा था कि वे अपने घर खाली नहीं करेंगे, चाहे उनके ऊपर से मशीनें ही क्यों न चला दी जाएं। [caption id="attachment_101986" align="aligncenter" width="1200"]
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उस वक्त लतीफपुरा के लोगों के समर्थन में किसान संगठनों सहित कई राजनीतिक दल भी सामने आए थे। किसानों और पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के बीच बहस और तनाव की स्थिति बन गई थी। मामला काफी तूल पकड़ गया था और लंबे समय तक चर्चा में रहा था।
फिर उठे सवाल
मंगलवार की ताजा कार्रवाई के बाद एक बार फिर प्रशासन की भूमिका और प्रभावित परिवारों के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जहां प्रशासन इसे कोर्ट के आदेश और सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने की प्रक्रिया बता रहा है, वहीं स्थानीय लोग इसे गरीब और बेघर लोगों पर सख्ती के तौर पर देख रहे हैं। [caption id="attachment_101985" align="aligncenter" width="1200"]
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फिलहाल इलाके में पुलिस बल तैनात है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।