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Monday, 05 October 2026

Jalandhar News: मैरिटन होटल को अवैध बताकर खाली करवाने वाले नगर निगम के अफसर हुए 'लाचार', कोर्ट में लिखित जवाब भी नहीं दे सके अधिकारी, 14 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

Jalandhar News: मैरिटन होटल को अवैध बताकर खाली करवाने वाले नगर निगम के अफसर हुए 'लाचार', कोर्ट में लिखित जवाब भी नहीं दे सके अधिकारी, 14 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar News: जालंधर नगर निगम और मैरिटन होटल के मालिकों के बीच चल रहा विवाद अब अदालत की चौखट तक पहुंच चुका है। नगर निगम की ओर से मैरिटन होटल को लेकर नोटिस जारी करने और कार्रवाई की कोशिशों के बाद होटल के मालिक गौतम कुकरेजा ने अदालत का रुख किया। मामले में अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए नगर निगम को कानून के मुताबिक प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए थे।

मजेदार बात तो यह है कि नगर निगम के अफसर जिस ताकत के साथ मैरिटन होटल को खाली करवाने और सील करने के लिए लगातार नोटिस भेज रहे थे, मामला कोर्ट में जाने के बाद यही अफसर अब ढीले पड़ गए हैं। कोर्ट की लगातार तारीखों में नगर निगम के अफसर और उनके वकील अपना पक्ष ही नहीं रख सके हैं।

नगर निगम के अफसर नहीं दे रहे जवाब

अब इस मामले में नगर निगम की ओर से Written Statement (लिखित बयान) और Order 39 Rule 1 एवं 2 सहपठित Section 151 CPC के तहत दायर आवेदन का Reply दाखिल नहीं किया गया है। अदालत ने नगर निगम को इसके लिए 14 अक्टूबर 2026 तक अंतिम अवसर (Last Opportunity) दिया है।

हैरानी की बात तो यह है कि नगर निगम मैरिटन होटल को अवैध बता कर कई नोटिस भेजे, नगर निगम के अधिकारी कहते रहे कि होटल का कंपलीशन ही नहीं है। इसे लेकर सत्ताधारी नेताओं समेत कई आरटीआई एक्टिविस्ट और शिकायतकर्ता कार्ऱवाई को लेकर लगे हुए थे। लेकिन कुछ समय पहले सत्ताधारी नेताओं ने इसका आपस में समझौता करवा दिया।

नगर निगम के वकील को अंतिम मौका

नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक नगर निगम की तरफ से अधिवक्ता बृजेश बख्शी अदालत में पेश हुए और वकालतनामा दाखिल किया। इसके बाद नगर निगम की Written Statement दाखिल करने के लिए अगली तारीख मिली।

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इसके बाद भी निर्धारित तारीखों पर लिखित बयान दाखिल नहीं किया गया। नगर निगम के अधिवक्ता के अनुरोध पर मामले को आगे की तारीखों तक स्थगित किया गया। अब 30 सितंबर 2026 की सुनवाई के बाद अदालत ने Written Statement और आवेदन का Reply दाखिल करने के लिए 14 अक्टूबर 2026 को अंतिम अवसर दिया है।

क्या है पूरा मैरिटन होटल विवाद?

मामले में वादी और मैरिटन होटल के मालित गौतम कुकरेजा की ओर से अदालत में दायर आवेदन में आरोप लगाया गया कि जमीन वादी और अन्य सह-मालिकों ने अलग-अलग सेल डीड के जरिए खरीदी थी। बाद में यह संपत्ति M/s Mariton Hoteliers Pvt. Ltd. को लीज पर दी गई, जहां होटल का निर्माण कर कारोबार शुरू किया गया। वादी के अनुसार, संबंधित साइट प्लान नगर निगम द्वारा स्वीकृत था और निर्माण स्वीकृत नक्शे के मुताबिक किया गया था।

वादी की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि संबंधित दस्तावेज नगर निगम के समक्ष जमा करवाए गए थे और 24 जुलाई 2026 को Partial Completion Certificate जारी किया गया था। साथ ही, विभिन्न विभागों से आवश्यक NOC प्राप्त करने और संबंधित औपचारिकताएं पूरी करने का दावा भी किया गया।

नगर निगम पर क्या लगाए गए आरोप?

वादी की ओर से आरोप लगाया गया कि नगर निगम ने होटल को नोटिस जारी किए और होटल के कारोबार में हस्तक्षेप किया। आवेदन में यह भी कहा गया कि संपत्ति को सील करने या गिराने की धमकी दी गई तथा निगम अधिकारियों ने संपत्ति में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया।

हालांकि, ये वादी की ओर से अदालत में रखे गए आरोप हैं। इन आरोपों पर नगर निगम का विस्तृत पक्ष Written Statement और Reply के जरिए सामने आना बाकी है।

अदालत ने क्यों दी अंतरिम राहत?

अदालत ने रिकॉर्ड पर पेश किए गए सेल डीड, लीज डीड, प्रमाणपत्र, साइट प्लान और विभिन्न विभागों के दस्तावेजों पर विचार करने के बाद प्रथम दृष्टया वादी के पक्ष में मामला पाया। अदालत ने माना कि यदि इस स्तर पर अंतरिम राहत नहीं दी गई तो मुकदमा दायर करने का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।

इसके बाद अदालत ने नगर निगम को निर्देश दिया कि वह अगले आदेश तक वादी के शांतिपूर्ण कब्जे में अवैध एवं जबरन हस्तक्षेप नहीं करेगा तथा संपत्ति को सील करने या उसके किसी हिस्से को नुकसान पहुंचाने अथवा गिराने की कार्रवाई नहीं करेगा, सिवाय कानून के अनुसार उचित प्रक्रिया के।

अब 14 अक्टूबर को क्या होगा?

मामले में अब नगर निगम की ओर से Written Statement और Order 39 Rule 1 एवं 2 के आवेदन का Reply दाखिल किया जाना है। अदालत ने इसके लिए 14 अक्टूबर 2026 को अंतिम अवसर दिया है।

ऐसे में अब सबकी नजरें 14 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी हैं। नगर निगम अपना लिखित पक्ष अदालत के सामने रखता है या नहीं, यह अगली सुनवाई में स्पष्ट होगा।

मैरिटन होटल विवाद में फिलहाल अदालत की अंतरिम सुरक्षा जारी है और नगर निगम का विस्तृत पक्ष Written Statement दाखिल होने के बाद सामने आने की उम्मीद है।