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Tuesday, 01 September 2026

Jalandhar News: जालंधर नगर निगम बिल्डिंग ब्रांच में अचानक फेरबदल, सत्ताधारी पार्षद की कॉलोनी को पास करने के लिए मांगी गई 'ऊपरी फीस', मेयर ने लिया बड़ा एक्शन

Jalandhar News: जालंधर नगर निगम बिल्डिंग ब्रांच में अचानक फेरबदल, सत्ताधारी पार्षद की कॉलोनी को पास करने के लिए मांगी गई 'ऊपरी फीस', मेयर ने लिया बड़ा एक्शन

डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar News: जालंधर नगर निगम के बिल्डिंग ब्रांच में कमिश्नर संदीप ऋषि द्वारा किए गए अचानक फेरबदल को लेकर नई जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, इस फेरबदल के पीछे जालंधर सेंट्रल हलके के एक सत्ताधारी पार्षद की कॉलोनी से जुड़ा मामला अहम वजह बताया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, संबंधित पार्षद अपनी कॉलोनी से जुड़े जरूरी काम और नियमों के तहत लगने वाली फीस जमा करवाने के लिए तैयार था। आरोप है कि इसके बावजूद बिल्डिंग ब्रांच के निचले स्तर के कुछ अधिकारी मामले में अड़ंगा लगा रहे थे।

पार्षद फीस जमा करवाने को तैयार

सूत्रों का दावा है कि पार्षद की ओर से सभी सरकारी और नियमानुसार फीस जमा कराने की बात कही गई थी, लेकिन निचले स्तर के अधिकारियों पर अलग से रकम मांगने के आरोप लगाए गए। इस कारण कॉलोनी से संबंधित प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही थी।

बताया जा रहा है कि संबंधित पार्षद जालंधर सेंट्रल हलके के प्रभारी नितिन कोहली के करीबी हैं। मामला जब नितिन कोहली के संज्ञान में आया तो उन्होंने इस संबंध में जालंधर के मेयर वनीत धीर से चर्चा की।

मेयर ने लिया सख्त एक्शन

सूत्रों के अनुसार, मेयर वनीत धीर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम कमिश्नर संदीप ऋषि को संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव कर दिया गया।

जानकारी के अनुसार एटीपी के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया। एटीपी से उक्त इलाके का चार्ज लेकर दूसरे इलाके में भेज दिया गया है, इसका खामियाजा एमटीपी को भुगतना पड़ा, उनके कार्यक्षेत्र में भी बदलाव कर दिया गया है। हालांकि इस मामले में किस अफसर की गलती है, अभी तक कोई खुलकर नहीं बोल रहा है।

एटीपी का कार्यक्षेत्र बदला

नगर निगम के इस अचानक हुए फेरबदल के बाद बिल्डिंग ब्रांच में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि, अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव को लेकर निगम की ओर से कोई आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।

अब देखना होगा कि इस मामले में आगे कोई विभागीय जांच होती है या फिर अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में किया गया बदलाव ही अंतिम कार्रवाई साबित होता है। वहीं, बिल्डिंग ब्रांच में पारदर्शिता और अवैध निर्माणों से जुड़े मामलों को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।