Sunday, 20 September 2026
पंजाब
Jalandhar News: कभी ट्रस्ट के प्लॉट खरीदने को लगती थी लाइन, अब नीलामी में भी नहीं मिल रहे खरीदार!
डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar News: एक समय था जब जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की जमीन खरीदने के लिए लोग लाइन लगाते थे, लेकिन आज वही ट्रस्ट अपनी जायदादें बेचने के लिए बार-बार ई-नीलामी कर रहा है और बड़ी संख्या में संपत्तियां खरीदारों का इंतजार कर रही हैं।
सूर्या एंक्लेव वेलफेयर सोसाइटी के प्रधान एवं प्रॉपर्टी कारोबारी राजीव धमीजा ने कहा कि पिछले लगभग डेढ़ वर्ष में ट्रस्ट की करीब 200 जायदादें पांच बार नीलामी में रखी गईं, लेकिन केवल 16 संपत्तियां ही बिक सकीं।
लगातार पांच ई-नीलामी आयोजित की
उनके अनुसार यह आंकड़ा स्वयं बताता है कि समस्या केवल खरीदारों की नहीं, बल्कि ट्रस्ट की नीलामी नीति और रिजर्व प्राइस की भी गंभीर समीक्षा की जरूरत है। धमीजा ने कहा कि 20 अगस्त 2025, 4 नवंबर 2025, 7 जनवरी 2026, 23 फरवरी 2026 और 14 अप्रैल 2026 को लगातार पांच ई-नीलामी आयोजित की गईं।
उन्होंने सवाल किया कि जब पांच बार नीलामी के बावजूद बड़ी संख्या में संपत्तियां नहीं बिक रहीं तो सरकार को यह पूछना चाहिए कि आखिर खरीदार ट्रस्ट की जमीन क्यों नहीं खरीद रहे?
“समस्या जनता में नहीं, नीति में तलाशनी होगी”
धमीजा ने कहा कि आज सबसे बड़ा खतरा यह है कि पिछली नीलामी में संपत्ति नहीं बिकी तो अधिकारी उसके कारणों का वास्तविक अध्ययन करने के बजाय अगली फाइल में फिर रिजर्व रेट बढ़ा दें और नई नीलामी निकाल दें। उन्होंने कहा— “यदि मौजूदा कीमत पर जमीन नहीं बिक रही तो उसका रेट और बढ़ाना बाजार की समस्या का समाधान नहीं है। सरकार को फाइलों में बैठकर नहीं, जमीन पर जाकर बाजार की वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए।”
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धमीजा ने कहा कि ट्रस्ट की कई संपत्तियों के रिजर्व प्राइस तय करते समय वास्तविक बाजार मांग, लोकेशन, सड़क, सीवरेज, बिजली, आसपास के विकास और commercial potential को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हर साल 5 से 7 प्रतिशत रिजर्व रेट बढ़ाना फाइल में आसान है, लेकिन उस कीमत पर खरीदार मौजूद है या नहीं, यह जानना ज्यादा जरूरी है।

जनता का ट्रस्ट से विश्वास क्यों टूटा?
राजीव धमीजा ने कहा कि पिछले लगभग पांच वर्षों की कार्यप्रणाली के कारण लोगों का इंप्रूवमेंट ट्रस्ट से विश्वास कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि निजी बिल्डर अपने ग्राहक को documentation, transfer और registry जैसी प्रक्रियाओं में सहयोग देते हैं, जबकि ट्रस्ट के अनेक ग्राहक NDC, Record Entry और Registry के लिए लंबे समय तक कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर होते हैं।
धमीजा ने कहा कि पिछले वर्षों में कई अलॉटियों से 10-12 वर्ष पुराने मामलों में पहले जमा करवाए जा चुके खर्चों की दोबारा मांग किए जाने से भी लोगों में रोष पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि संभावित खरीदारों में ट्रस्ट की संपत्ति खरीदने को लेकर भरोसा कम हुआ है।
सरकार तक जमीनी हकीकत पहुंचाना जरूरी
धमीजा ने कहा कि पंजाब सरकार को केवल ट्रस्ट अधिकारियों की फाइलों और रिपोर्टों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। सरकार को स्थानीय प्रॉपर्टी कारोबारियों, अलॉटियों, नागरिक संगठनों और आम जनता से सीधे फीडबैक लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट पर न्यायिक मामलों से जुड़ी भारी देनदारियां हैं और शहर के विकास कार्यों के लिए भी धन की आवश्यकता है। ऐसे में ट्रस्ट के पास मौजूद संपत्तियों को बेचकर राजस्व जुटाना जरूरी हो सकता है, लेकिन बिक्री तभी होगी जब कीमत बाजार के अनुकूल होगी।
अगली नीलामी से पहले 40% तक रिजर्व प्राइस कम करने की मांग
धमीजा ने पंजाब सरकार से मांग की कि अगली ई-नीलामी से पहले सभी अनबिकी संपत्तियों का Independent Market Assessment करवाया जाए और वास्तविक बाजार परिस्थितियों के अनुसार कम से कम 40 प्रतिशत तक रिजर्व प्राइस कम करने पर विचार किया जाए।
उन्होंने साथ ही मांग की कि—
• पिछली पांचों नीलामियों का property-wise result सार्वजनिक किया जाए।
• कितनी संपत्तियां बिकीं और कितनी नहीं बिकीं, इसकी पूरी जानकारी जारी की जाए।
• लगातार असफल संपत्तियों के रिजर्व रेट की दोबारा समीक्षा हो।
• NDC, Record Entry और Registry के लिए Single Window System बनाया जाए।
• पुराने भुगतान विवादों में अलॉटियों को पूरी account statement दी जाए।
• प्रत्येक नीलामी संपत्ति की title, dues, litigation और development status की जानकारी पहले से ऑनलाइन उपलब्ध हो।
“पहले जनता का विश्वास बनाइए, फिर जमीन बेचिए”
धमीजा ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल ट्रस्ट की आलोचना करना नहीं, बल्कि पंजाब सरकार को वास्तविक स्थिति से अवगत करवाना है ताकि अगली नीलामी में वही गलती दोबारा न हो।
उन्होंने कहा— “सरकार फाइलों में रेट बढ़ाने के बजाय जमीन पर जाकर बाजार देखे। जनता की बात सुने और अधिकारियों से जवाब मांगे कि लगातार नीलामियों के बावजूद संपत्तियां क्यों नहीं बिक रहीं।”
उन्होंने कहा कि उचित कीमत, पारदर्शी प्रक्रिया, आसान documentation और सम्मानजनक व्यवहार के बिना ट्रस्ट जनता का विश्वास वापस हासिल नहीं कर सकता। “ट्रस्ट की आर्थिक बदहाली दूर करने का रास्ता जनता पर बोझ डालना नहीं, जनता को खरीदार बनाना है।”