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Saturday, 24 October 2026

Punjab News: पंजाब में सरकारी जमीन आवंटन पर उठे सवाल: दरें बढ़ीं, फिर भी पुराने रेट पर मिलते रहे प्लॉट

Punjab News: पंजाब में सरकारी जमीन आवंटन पर उठे सवाल: दरें बढ़ीं, फिर भी पुराने रेट पर मिलते रहे प्लॉट

डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब में सरकारी जमीन के आवंटन को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के अनुसार, गमाडा (GMADA) ने विस्थापितों के कोटे के तहत बढ़ी हुई कीमतों के बजाय पुराने रेट पर प्लॉट आवंटित किए। जांच एजेंसी ने इस वजह से पंजाब सरकार को करीब 400 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का अनुमान जताया है।

जांच के मुताबिक, वर्ष 2018 में प्लॉटों की दर 25 हजार रुपये प्रति वर्ग गज तय थी। इसके बाद जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई और दर 65 हजार रुपये प्रति वर्ग गज तक पहुंच गई। इसके बावजूद 2025-26 तक पुराने रेट पर आवंटन पत्र जारी होने का मामला जांच के दायरे में है।

441 प्लॉट पुराने रेट पर आवंटित करने का मामला

ED की जांच के अनुसार, वर्ष 2019 से 2026 के बीच मोहाली की आईटी सिटी में विस्थापितों के कोटे के तहत कुल 441 प्लॉट आवंटित किए गए। इनमें सेक्टर-82 अल्फा के 100 और सेक्टर-66 बीटा के 341 प्लॉट शामिल हैं। इसके अलावा, इन दोनों सेक्टरों में कुल 169 आवेदन अभी लंबित बताए गए हैं।

इनमें सेक्टर-82 अल्फा के 39 और सेक्टर-66 बीटा के 130 आवेदन शामिल हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि जमीन की कीमतें बढ़ने के बावजूद विस्थापितों को पुराने रेट पर प्लॉट क्यों दिए गए और आवंटन के दौरान संशोधित दरों को लागू क्यों नहीं किया गया।

25 हजार से बढ़कर 65 हजार रुपये प्रति वर्ग गज हुई दर

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गमाडा ने समय-समय पर प्लॉटों की दरों में बढ़ोतरी की थी। वर्ष 2018-19 और 2019-20 में दर 25 हजार रुपये प्रति वर्ग गज थी। बाद के वर्षों में कीमतों में इजाफा हुआ और दर बढ़कर 65 हजार रुपये प्रति वर्ग गज तक पहुंच गई। ED की जांच में पुराने और नए रेट के बीच के अंतर को सरकारी राजस्व के संभावित नुकसान की अहम वजह माना गया है।

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एजेंसी के अनुसार, यदि प्लॉटों का आवंटन संशोधित दरों पर किया जाता, तो पंजाब सरकार को अधिक राजस्व मिल सकता था।हालांकि, करीब 400 करोड़ रुपये के नुकसान का यह आंकड़ा जांच में सामने आया अनुमान है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट होंगे।

जून 2020 की कमेटी बैठक भी जांच के दायरे में

जांच में जून 2020 में हुई एक कमेटी की बैठक का भी उल्लेख किया गया है। इस बैठक में गमाडा और पुडा के वरिष्ठ अधिकारियों, एस्टेट ऑफिसर (प्लॉट्स) तथा कानूनी सलाहकार ने विस्थापितों के कोटे के तहत प्लॉट आवंटित करने की दरों पर चर्चा की थी।

अब जांच का अहम सवाल यह है कि बैठक में नई दरों पर चर्चा होने के बावजूद बाद के वर्षों में आवंटन के दौरान संशोधित दरें लागू क्यों नहीं की गईं। ED यह भी जांच कर रही है कि पुराने रेट पर आवंटन जारी रखने के पीछे क्या कारण थे और इस प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका रही।

सरकारी खजाने को नुकसान कैसे हुआ?

जांच एजेंसी के अनुसार, जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद भी यदि प्लॉट पुराने रेट पर आवंटित किए गए, तो सरकार को संभावित रूप से कम राजस्व मिला। इसी अंतर के आधार पर करीब 400 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

फिलहाल मामले में आवंटन प्रक्रिया, दरों में संशोधन, कमेटी की बैठक और संबंधित अधिकारियों के फैसलों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।