डेली संवाद, जालंधर।
Monsoon Child Care: बारिश का मौसम बच्चों के लिए खेल-कूद और मस्ती लेकर आता है, लेकिन इसी दौरान संक्रमण, एलर्जी और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। मानसून में हवा में नमी बढ़ने, घर में सीलन, फंगस, गंदे पानी और दूषित खाने की वजह से बच्चे जल्दी बीमार पड़ सकते हैं। खासकर छोटे बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण उन्हें सर्दी, खांसी, वायरल फीवर, पेट दर्द, उल्टी-दस्त, स्किन एलर्जी और फंगल इन्फेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, साफ पानी, सुरक्षित भोजन और अच्छी हाइजीन की आदतें बच्चों को कई तरह के संक्रमण से बचाने में मदद करती हैं। मानसून के दौरान माता-पिता को घर की सफाई, बच्चों के कपड़े, जूते, खिलौने और खाने-पीने की चीजों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
सॉफ्ट टॉयज की सफाई जरूरी
बच्चों के सॉफ्ट टॉयज में नमी के कारण धूल, डस्ट माइट्स और फंगस जमा हो सकते हैं। इससे एलर्जी, छींक, खांसी और अस्थमा की समस्या बढ़ सकती है। बच्चे के बिस्तर पर केवल धोए जा सकने वाले सॉफ्ट टॉयज ही रखें। इन्हें समय-समय पर गर्म पानी से धोकर अच्छी धूप या हवा में अच्छी तरह सुखाएं। गीले या बदबू वाले खिलौनों को बच्चों से दूर रखें।
टूथब्रश को सही जगह रखें
मानसून में टूथब्रश की सफाई और स्टोरेज भी बहुत जरूरी है। टूथब्रश को टॉयलेट सीट या वॉशबेसिन के बहुत पास न रखें। ब्रश को धोने के बाद सीधा खड़ा रखें, ताकि वह हवा में सूख सके। फ्लश करते समय टॉयलेट का ढक्कन बंद रखें। टूथब्रश पर रोजाना कैप लगाने से नमी फंस सकती है, इसलिए कैप का इस्तेमाल केवल यात्रा के समय करना बेहतर माना जाता है।
घर की सीलन और फंगस हटाएं
घर की दीवारों, कोनों, बाथरूम और एसी के आसपास सीलन या फंगस दिखे तो उसे नजरअंदाज न करें। नमी और फंगस बच्चों में एलर्जी, आंखों में जलन, सांस फूलना, रात में खांसी और अस्थमा जैसी परेशानी बढ़ा सकते हैं। यदि बच्चा बिना बुखार के लगातार खांस रहा है, तो घर की दीवारों, पर्दों, मैट्रेस और एसी फिल्टर की जांच करें। बदबू छिपाने के बजाय सीलन की असली वजह दूर करना जरूरी है।
बारिश में सही फुटवियर पहनाएं
बारिश के मौसम में बच्चों को ऐसे जूते पहनाएं जो जल्दी सूख जाएं। रबर या EVA क्रॉक्स जैसे फुटवियर कैनवास और चमड़े के जूतों की तुलना में कम नमी सोखते हैं। हालांकि केवल सही जूते पहनना काफी नहीं है। बच्चों के पैर धोने के बाद उंगलियों के बीच की जगह अच्छी तरह सुखाएं। गीले मोजे या जूते लंबे समय तक पहनने से फंगल इन्फेक्शन हो सकता है।
गीले कपड़े और तौलिए तुरंत सुखाएं
बारिश या पसीने से भीगे कपड़ों को बिना सुखाए अलमारी में न रखें। नमी वाले कपड़ों और तौलियों में फंगस तेजी से पनप सकता है। केवल आयरन करने से फंगस पूरी तरह खत्म नहीं होते, इसलिए कपड़ों को अच्छी तरह धोना और सुखाना जरूरी है। यदि घर में किसी व्यक्ति को फंगल इन्फेक्शन है, तो उसके कपड़े और तौलिए अलग रखें तथा गर्म पानी से धोएं।
एसी का ड्राई मोड उपयोग करें
मानसून में घर में नमी अधिक होने पर एसी का ड्राई मोड या डिह्यूमिडिफायर उपयोगी हो सकता है। इससे कमरे की नमी कम होती है और फंगस व डस्ट माइट्स बढ़ने का खतरा घटता है। एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखें। कमरे को जरूरत से ज्यादा ठंडा न करें और एसी फिल्टर की नियमित सफाई जरूर कराएं।
बच्चों को ताजा और सुरक्षित भोजन दें
मानसून में बाहर का कटा हुआ फल, सड़क किनारे मिलने वाला जूस, बर्फ वाले ड्रिंक्स और लंबे समय से रखा खाना बच्चों को न दें। दूषित पानी और भोजन से पेट में संक्रमण, उल्टी-दस्त और टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। फल, सलाद और हरी पत्तेदार सब्जियों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर ही खिलाएं।
दही, छाछ और दूध जैसी चीजें हमेशा ताजा और सही तरीके से स्टोर की हुई हों। यदि बच्चे को लगातार उल्टी, दस्त, तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, शरीर पर दाने या बहुत अधिक कमजोरी महसूस हो, तो घरेलू इलाज पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।