Wednesday, 04 November 2026
पंजाब
North Wood Project: फगवाड़ा-चंडीगढ़ हाईवे पर North Wood प्रोजैक्ट के खिलाफ विजीलैंस ब्यूरो में शिकायत, जालंधर के STP और चीफ टाउन प्लानर की भूमिका की भी जांच की मांग, 60 फीट सड़क और श्मशान घाट के पास निर्माण पर विवाद
डेली संवाद, जालंधर। North Wood Project: फगवाडा-चंडीगढ़ हाईवे पर गांव चक्कमंढेर में बन रही कमर्शियल कॉलोनी नार्थ वुड (North Wood) को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कॉलोनी के लेआउट प्लान की मंजूरी और निर्माण से जुड़े नियमों के उल्लंघन को लेकर RTI एक्टिविस्ट करणप्रीत सिंह ने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को शिकायत भेजकर स्वतंत्र जांच की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कॉलोनी के स्वीकृत लेआउट प्लान में मास्टर प्लान के तहत प्रस्तावित सड़क की चौड़ाई, गांव की फिरनी सीमा और साथ लगते श्मशान घाट से संबंधित नियमों को उचित तरीके से ध्यान में नहीं रखा गया। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले में टाउन प्लानिंग विभाग के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करवाने की मांग की है।
60 फीट सड़क की जगह को लेकर उठाए सवाल
शिकायत के मुताबिक, नार्थ वुड (North Wood) कॉलोनी के साथ लगती मौजूदा 4 करम चौड़ी सड़क को मास्टर प्लान के तहत 60 फीट (18.30 मीटर) तक चौड़ा करने का प्रस्ताव बताया गया है। आरोप है कि स्वीकृत लेआउट प्लान में सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई और इसके लिए जरूरी जमीन को सही तरीके से दर्शाया नहीं गया।
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शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच में यह पता लगाया जाए कि सड़क चौड़ीकरण के लिए कितनी जमीन छोड़ी जानी थी और क्या उस जमीन को कॉलोनी के नेट डेवलपमेंट एरिया से बाहर रखा गया था। साथ ही यह भी जांचने की मांग की गई है कि कहीं सड़क के लिए आरक्षित जमीन की गणना करके अतिरिक्त शोरूम या कमर्शियल यूनिट को मंजूरी तो नहीं दी गई।

गांव की फिरनी और 100 मीटर प्रतिबंध का मुद्दा
शिकायत में गांव चक्क मंढेर की फिरनी सीमा और कमर्शियल कॉलोनी के निर्माण पर 100 मीटर प्रतिबंध का मुद्दा भी उठाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह जांच जरूरी है कि मंजूरी देते समय संबंधित नियम लागू थे या नहीं और कॉलोनी की वास्तविक दूरी गांव की फिरनी सीमा से कितनी है। इसके लिए राजस्व विभाग के रिकॉर्ड, आधिकारिक सीमांकन और साइट की स्वतंत्र तकनीकी जांच करवाने की मांग की गई है।
श्मशान घाट के साथ ग्रीन बेल्ट नहीं होने का आरोप
नार्थ वुड (North Wood) कॉलोनी के साथ लगते श्मशान घाट को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि स्वीकृत लेआउट प्लान में श्मशान घाट के साथ बफर जोन या ग्रीन बेल्ट नहीं दिखाई गई।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मौके पर संयुक्त निरीक्षण करवाकर यह जांचा जाए कि श्मशान घाट की वास्तविक सीमा क्या है और संबंधित मास्टर प्लान, यूनिफाइड जोनिंग रेगुलेशन 2018 तथा अन्य लागू नियमों के तहत वहां किसी बफर जोन या निर्धारित दूरी की आवश्यकता थी या नहीं।

तीन टाउन प्लानिंग अधिकारियों की भूमिका जांचने की मांग
शिकायत में टाउन प्लानिंग विभाग के तीन अधिकारियों की भूमिका की जांच करने को कहा गया है। शिकायत में कहा गया है कि जालंधर के सीनियर टाउन प्लानर (STP) अमित सिंह मिन्हास, सीनियर टाउन प्लानर (मुख्यालय) सरबजीत सिंह और पंजाब के चीफ टाउन प्लानर मनदीप कौर की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पहले भी इस प्रोजेक्ट को लेकर संबंधित अधिकारियों और सरकार के विभिन्न विभागों को शिकायतें दी गई थीं, लेकिन उनके अनुसार कोई संतोषजनक कार्रवाई सामने नहीं आई।
अब विजिलेंस से यह जांचने की मांग की गई है कि पहले दी गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई, क्या कोई तकनीकी रिपोर्ट तैयार की गई और क्या किसी अधिकारी ने किसी कथित अनियमितता को नजरअंदाज किया।
PAPRA और अन्य नियमों के तहत जांच की मांग
शिकायत में पंजाब अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट (PAPRA), 1995, यूनिफाइड जोनिंग रेगुलेशन 2018, संबंधित मास्टर प्लान और बिल्डिंग बायलॉज के तहत कॉलोनी की मंजूरी और निर्माण की जांच करने की मांग की गई है।
इसके अलावा शिकायतकर्ता ने संभावित अतिरिक्त कमर्शियल एरिया से मिलने वाले आर्थिक लाभ और सरकारी नुकसान का आकलन करवाने की भी मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
अपनी शिकायत में करणप्रीत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया है। इनमें ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार, पी. सिराजुद्दीन बनाम स्टेट ऑफ मद्रास, विनीत नारायण बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य फैसले शामिल हैं।
इन फैसलों के जरिए शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच, भ्रष्टाचार के आरोपों की उचित जांच और जहां संज्ञेय अपराध सामने आए वहां कानून के अनुसार FIR दर्ज करने की मांग की है।
विजिलेंस से क्या-क्या मांग की गई?
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच टाउन प्लानिंग विभाग से स्वतंत्र किसी वरिष्ठ विजिलेंस अधिकारी को सौंपी जाए। कॉलोनी की मंजूरी से जुड़ी मूल फाइल, स्वीकृत नक्शा, तकनीकी रिपोर्ट, ई-ऑफिस रिकॉर्ड और अधिकारियों के बीच हुई पत्राचार को सुरक्षित रखा जाए।
इसके अलावा राजस्व और टाउन प्लानिंग अधिकारियों की संयुक्त टीम से मौके का निरीक्षण करवाकर फोटो और जियो-रेफरेंस माप सहित रिपोर्ट तैयार करने, नियमों का उल्लंघन साबित होने पर संबंधित विभाग से कानूनी कार्रवाई करवाने और संज्ञेय अपराध सामने आने पर FIR दर्ज करने की मांग की गई है।