Thursday, 17 September 2026
पंजाब
Punjab News: ₹680 करोड़ गबन मामले में IDFC बैंक ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा: CBI से ट्रायल में मदद की अनुमति मांगी
डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: हरियाणा के 8 सरकारी विभागों और चंडीगढ़ क्रेस्ट से जुड़े करीब 680 करोड़ रुपए के कथित गबन मामले में नया मोड़ आया है। सेक्टर-32 स्थित IDFC बैंक ने CBI कोर्ट में याचिका दाखिल कर खुद को इस मामले में ‘पीड़ित’ घोषित करने और शिकायतकर्ता का दर्जा देने की मांग की है।
बैंक का दावा है कि कथित धोखाधड़ी के कारण सरकारी खजाने को वास्तविक आर्थिक नुकसान नहीं हुआ, क्योंकि मामला सामने आने के बाद बैंक ने हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ क्रेस्ट को ब्याज सहित पूरी रकम वापस कर दी थी। बैंक के अनुसार, रकम वापस करने से आर्थिक नुकसान उसे उठाना पड़ा है।
CBI कोर्ट ने एजेंसी को जारी किया नोटिस
IDFC बैंक ने अपनी याचिका में कोर्ट से मांग की है कि उसे मामले की ट्रायल प्रक्रिया में शामिल होने और CBI की सहायता करने की अनुमति दी जाए।
इसके साथ ही बैंक ने मामले में दाखिल चार्जशीट और संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग भी की है। कोर्ट ने बैंक की याचिका पर CBI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब मामले में CBI के जवाब पर आगे की सुनवाई होगी।
सरकारी पैसा वापस करने का बैंक का दावा
IDFC बैंक की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि बैंक के भीतर हुई कथित धोखाधड़ी के कारण हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों और चंडीगढ़ (Chandigarh) क्रेस्ट के फंड में हेराफेरी हुई।
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बैंक के अनुसार, जैसे ही कथित धोखाधड़ी का पता चला, उसने संबंधित सरकारी संस्थाओं को पूरी रकम वापस कर दी। बैंक का कहना है कि इस वजह से सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान नहीं हुआ, जबकि रकम लौटाने का वित्तीय बोझ बैंक को उठाना पड़ा।
क्रेस्ट को ब्याज सहित 82.25 करोड़ रुपए मिलने का दावा
बैंक ने चंडीगढ़ प्रशासन की फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। याचिका के मुताबिक, कमेटी ने पुष्टि की है कि IDFC बैंक की ओर से चंडीगढ़ क्रेस्ट को ब्याज सहित 82.25 करोड़ रुपए प्राप्त हो चुके हैं। बैंक ने इसी आधार पर कोर्ट के सामने खुद को मामले में प्रभावित संस्था यानी पीड़ित के तौर पर स्वीकार करने की मांग रखी है।
तत्कालीन बैंक मैनेजर पर गंभीर आरोप
याचिका में IDFC बैंक की तत्कालीन शाखा प्रबंधक रिभव ऋषि पर अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सरकारी फंड में कथित हेराफेरी करने के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है।
मामले में हरियाणा सरकार के 8 सरकारी विभागों के अलावा चंडीगढ़ क्रेस्ट से संबंधित फंड भी जांच के दायरे में हैं। याचिका के अनुसार, क्रेस्ट से जुड़े करीब 76 करोड़ रुपए की राशि भी कथित हेराफेरी का हिस्सा बताई गई है।
बैंक ने कहा- धोखाधड़ी उसके सिस्टम के भीतर हुई
IDFC बैंक का कहना है कि कथित धोखाधड़ी बैंक के भीतर हुई और मामला सामने आने के बाद उसने संबंधित सरकारी संस्थाओं को भुगतान कर दिया।
इसी आधार पर बैंक चाहता है कि उसे भी इस केस में पीड़ित संस्था के रूप में शामिल किया जाए। बैंक ने कोर्ट से ट्रायल के दौरान CBI की सहायता करने और केस से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने की अनुमति भी मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
IDFC बैंक ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा है कि जिस व्यक्ति या संस्था को किसी अपराध के कारण वास्तविक नुकसान हुआ हो, उसे कानून की नजर में पीड़ित माना जा सकता है।
इसी आधार पर बैंक ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 2(1)(y) के तहत खुद को पीड़ित स्वीकार करने की मांग की है।
क्रेस्ट की FIR के शिकायतकर्ता पर भी आरोप
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। चंडीगढ़ क्रेस्ट की ओर से FIR दर्ज कराने वाले तत्कालीन प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह अबरोल पर बाद की जांच में कथित साजिश में शामिल होने के आरोप लगे।
यानी जिस अधिकारी की ओर से क्रेस्ट की तरफ से मामले की शिकायत दर्ज कराई गई थी, जांच आगे बढ़ने पर उसी अधिकारी पर कथित साजिश का हिस्सा होने के आरोप सामने आए। इससे मामले की जांच और कथित गबन की रकम के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।
अब CBI के जवाब पर नजर
IDFC बैंक की याचिका पर CBI कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब सबकी नजर जांच एजेंसी के जवाब पर है। CBI को बैंक की उस मांग पर अपना पक्ष रखना है, जिसमें उसने पीड़ित का दर्जा, शिकायतकर्ता की भूमिका, ट्रायल में CBI की सहायता और चार्जशीट की प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की है।
CBI के जवाब और कोर्ट की अगली सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस मामले की आगे की ट्रायल प्रक्रिया में IDFC बैंक को किस कानूनी हैसियत से शामिल किया जाता है।जवाब के बाद यह स्पष्ट होगा कि बैंक को इस मामले की आगे की ट्रायल प्रक्रिया में किस हैसियत से शामिल किया जाता है।