Thursday, 22 October 2026
पंजाब
Punjab News: पंजाब के 40 कॉलेजों में शुरू होंगे ‘संगत’ मानसिक स्वास्थ्य क्लब, युवाओं को नशे से दूर रखने की सरकार की पहल
डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब सरकार ने अपने प्रमुख अभियान ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ के तहत युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता मजबूत करने, शुरुआती स्तर पर हस्तक्षेप को प्रोत्साहित करने और नशे की लत को रोकने में मदद करने के लिए राज्यभर के 40 कॉलेजों में ‘संगत’ मानसिक स्वास्थ्य क्लब शुरू किए हैं।
आदित्य बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट (एबीईटी) के सहयोग और पंजाब के उच्च शिक्षा विभाग के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य शैक्षणिक परिसरों में ऐसा दोस्ताना वातावरण तैयार करना है, जहां विद्यार्थी भावनात्मक परेशानी को पहचान सकें, उचित सहायता प्राप्त कर सकें और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा कर सकें।
एक महत्वपूर्ण और अनूठा कदम
इस अनूठी पहल के शुभारंभ के दौरान पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने क्लब के प्रतिभागियों के साथ बातचीत की तथा युवा सशक्तीकरण को आगे बढ़ाने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया। इस चर्चा के दौरान सामाजिक कलंक को कम करने, युवाओं को मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करने और नशों की समस्या से निपटने में शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों तथा साथियों के नेटवर्क के बीच आपसी तालमेल के महत्व पर जोर दिया गया।
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मोहाली स्थित प्लाक्षा यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि ‘संगत’ युवाओं को जागरूकता, साथियों के सहयोग और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों तथा नशे की लत से निपटने में सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और अनूठा कदम है।
सही मार्गदर्शन और परामर्श की आवश्यकता होती
उन्होंने कहा, ‘‘भगवान श्रीकृष्ण का साथ होने के बावजूद महान योद्धा अर्जुन को भी मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। यह हमें याद दिलाता है कि युवाओं को भी सही मार्गदर्शन और परामर्श की आवश्यकता होती है। नशा करना गर्व की बात नहीं है। किसी व्यक्ति को गलत संगति से बाहर निकलने का रास्ता खोजने में मदद करना बहुत नेक कार्य है। ‘संगत’ को युवाओं द्वारा, युवाओं के लिए तैयार किया गया है, ताकि साथियों के सहयोग से मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया जा सके और युवाओं को अधिक स्वस्थ विकल्प चुनने में मदद मिल सके।’’
‘आदित्य बिड़ला एजुकेशन ट्रस्ट’ और ‘एमपावर’ की संस्थापक एवं चेयरपर्सन नीरजा बिड़ला ने युवाओं में भावनात्मक चुनौतियों, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और नशे की लत के आपसी संबंधों को दूर करने के लिए निरंतर और टिकाऊ रोकथाम उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘आज युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियां केवल नशों के सेवन तक सीमित नहीं हैं।
भावनात्मक कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण समस्या के शुरुआती चरण में ही हस्तक्षेप करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। ‘एमपावर’ में ‘सीओपीई’ के साथ किए गए हमारे कार्यों के माध्यम से हमने देखा है कि भावनात्मक परेशानी, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी उपेक्षित समस्याएं और नशों का सेवन किस प्रकार एक-दूसरे से जुड़े हो सकते हैं। यह स्थिति निरंतर और प्रभावी रोकथाम उपायों की आवश्यकता को रेखांकित करती है।’’
सामाजिक नेताओं को एक साझा उद्देश्य के तहत एकजुट किया
पंजाब सरकार के विभिन्न पक्षों को साथ लेकर किए जा रहे दूरदर्शी प्रयासों की सराहना करते हुए नीरजा बिड़ला ने कहा, ‘‘मैं पंजाब सरकार की सराहना करती हूं कि उसने सरकारी विभागों, नागरिक समाज संगठनों, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों और सामाजिक नेताओं को एक साझा उद्देश्य के तहत एकजुट किया है। इसका लक्ष्य विभिन्न स्तरों पर बिखरे हुए प्रयासों से आगे बढ़कर रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल करने के लिए एक टिकाऊ ढांचा तैयार करना है।
ऐसे सहयोगात्मक मॉडल पंजाब के युवाओं और उनके परिवारों के जीवन पर स्थायी एवं सार्थक प्रभाव डालने की क्षमता रखते हैं।’’ अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अभिनेता अपारशक्ति खुराना ने ऐसा सकारात्मक वातावरण बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जहां युवा अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर बात कर सकें।
अच्छी संगति बहुत जरूरी है
उन्होंने कहा, ‘‘हम अक्सर युवाओं से मजबूत बनने के लिए कहते हैं, लेकिन मजबूती का अर्थ यह भी है कि आप जो कुछ अनुभव कर रहे हैं, उसके बारे में ईमानदारी से बात कर सकें और जरूरत पड़ने पर मदद मांग सकें। युवाओं पर पड़ने वाला दबाव हमेशा दिखाई नहीं देता। इसलिए दोस्तों, परिवारों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए ऐसा दोस्ताना माहौल बनाना जरूरी है, जहां युवाओं की बात सुनी जाए, न कि उन्हें सही-गलत के आधार पर परखा जाए।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘मेरी दादी कहा करती थीं कि जीवन में कितनी भी चुनौतियां क्यों न आएं, अच्छी संगति बहुत जरूरी है।’’ उन्होंने कहा कि ‘संगत’ जैसी पहल युवाओं को एक-दूसरे का ध्यान रखने और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में अधिक खुलकर बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं।
प्रशिक्षण दिया जाएगा और प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे
इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक भाग लेने वाले कॉलेज के 25 विद्यार्थियों को ‘यूथ मेंटल हेल्थ फर्स्ट एड’ (वाईएमएचएफए) का 14 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा और प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। यह प्रशिक्षण विद्यार्थियों को भावनात्मक चुनौतियों के संकेतों को पहचानने, शुरुआती स्तर पर अपने साथियों की मदद करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें पेशेवर सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करने में सक्षम बनाएगा।
ये क्लब मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, भावनात्मक चुनौतियों के बारे में खुलकर बातचीत करने और नशे की लत से दूर रहने के लिए कॉलेज परिसरों में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन करेंगे। प्रशिक्षित साथियों के नेतृत्व और पेशेवर सहायता के माध्यम से यह पहल समय रहते समस्याओं की पहचान करने तथा कॉलेजों में ऐसी संस्कृति विकसित करने का प्रयास करती है, जिसमें मदद मांगने को कमजोरी नहीं, बल्कि एक सकारात्मक कदम माना जाए और इसके लिए प्रोत्साहित किया जाए। यह कार्यक्रम एबीईटी की सहायक इकाई ‘एमपावर’ द्वारा इसके ‘सीओपीई’ (काउंसलिंग एंड आउटरीच फॉर पीयर इनपावरमेंट) ढांचे के तहत लागू किया जा रहा है।
कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति दी
शुभारंभ कार्यक्रम में ‘युवा’ के सह-संस्थापक एवं प्रमुख निखिल तनेजा और बॉलीवुड अभिनेता अपारशक्ति खुराना शामिल हुए। उन्होंने युवाओं के कल्याण तथा ऐसे स्थान विकसित करने के महत्व पर चर्चा की, जहां युवाओं की बात ध्यानपूर्वक सुनी और समझी जाए तथा उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए। ‘कॉमिक सिंह’ के नाम से प्रसिद्ध पंजाबी कॉमेडियन मनप्रीत सिंह ने भी इस कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के अधिकारी, भाग लेने वाले कॉलेजों के नोडल प्रोफेसर, ‘संगत’ के विद्यार्थी सदस्य और एबीईटी के प्रतिनिधि शामिल हुए।
मानसिक स्वास्थ्य को रोकथाम की रणनीति का आधार बनाकर ‘संगत’ विद्यार्थियों को अपने साथियों की मदद करने, शुरुआती हस्तक्षेप को मजबूत बनाने और कॉलेज परिसरों में अधिक खुले एवं सहयोगपूर्ण वातावरण को बढ़ावा देने के लिए सशक्त बनाने का प्रयास करता है। यह पहल पंजाब सरकार के ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के तहत रोकथाम, जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से नशों की समस्या से निपटने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।