Wednesday, 02 September 2026
पंजाब
Punjab News: पंजाब में BC प्रमाणपत्र को लेकर बड़ा ऐलान, अब माता-पिता की स्थिति से तय होगी पात्रता
डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब की सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने आज घोषणा की कि बैकवर्ड क्लास (बी.सी.) प्रमाणपत्रों संबंधी फैले भ्रम को दूर करने और हर योग्य व्यक्ति को उसका बनता हक सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर विशेष जागरूकता और सुविधा मुहिम शुरू की जाएगी।
आज यहां पंजाब भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सरकार के ध्यान में यह बात आई है कि कई स्थानों पर नियमों की गलत व्याख्या के कारण योग्य आवेदकों को बी.सी. प्रमाणपत्र जारी करवाने में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार बी.सी. प्रमाणपत्रों संबंधी नियमों को पूरे राज्य में एकसमान, पारदर्शी और सुचारु ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बलजीत कौर ने किया स्पष्ट
डॉ. बलजीत कौर ने स्पष्ट किया कि बी.सी. प्रमाणपत्र के लिए पात्रता का निर्धारण केवल आवेदक के माता-पिता की स्थिति के आधार पर किया जाता है। जीवनसाथी की नौकरी, आय या सामाजिक स्थिति का इससे कोई संबंध नहीं है। इसी प्रकार चाचा, ताया या किसी अन्य रिश्तेदार की स्थिति को भी पात्रता तय करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
उन्होंने बताया कि संवैधानिक पदों पर तैनात व्यक्तियों, निर्धारित श्रेणियों के क्लास-एक और क्लास-दो अधिकारियों, कुछ पेशेवरों तथा निर्धारित संपत्ति या क्रीमी लेयर की शर्तों में आने वाले परिवारों के बच्चे बी.सी. श्रेणी के लाभों के हकदार नहीं होते। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्लास-तीन और क्लास-चार कर्मचारियों के मामलों में केवल वार्षिक आय के आधार पर क्रीमी लेयर लागू करके बी.सी. प्रमाणपत्र से इनकार करना नियमों के विपरीत है।
नया आवेदन रद्द नहीं किया जा सकता
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के माता-पिता या परिवार में पहले कभी बी.सी. प्रमाणपत्र नहीं बना, तो इस आधार पर नया आवेदन रद्द नहीं किया जा सकता। नियमों के अनुसार योग्य हर व्यक्ति पहली बार भी बी.सी. प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कर सकता है।
डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि नियमों का एकसमान पालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य के सभी डिप्टी कमिश्नरों के साथ बैठकें की जाएंगी। इसके अलावा सेवा केंद्रों, डी.सी. कार्यालयों और अन्य प्रमाणपत्र जारी करने वाले केंद्रों में सरल हिदायतें प्रदर्शित की जाएंगी। जागरूकता पोस्टर और मुद्रित दिशा-निर्देश भी उपलब्ध करवाए जाएंगे, ताकि लोग स्वयं समझ सकें कि वे क्रीमी लेयर में आते हैं या बी.सी. श्रेणी के लाभों के हकदार हैं।
कई महत्वपूर्ण कदम उठाए
उन्होंने कहा कि मान सरकार ने पिछड़ी श्रेणियों की भलाई के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वर्ष 2022 से अब तक आशीर्वाद योजना के तहत करीब 76 हजार बी.सी. लाभार्थियों को लगभग 391 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। इसी तरह पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का लाभ भी बी.सी. विद्यार्थियों तक पहुंचाया गया है और छात्रवृत्ति की राशि में वृद्धि के लिए भारत सरकार के पास लगातार मांग की जा रही है।
मंत्री ने बताया कि बैकफिंको के माध्यम से बी.सी. वर्ग से संबंधित योग्य लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए रियायती ऋण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला में लड़कों और लड़कियों के लिए 100-100 सीटों वाले दो छात्रावास स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा टॉप क्लास एजुकेशन योजना के तहत 12 नामवर संस्थानों में 210 सीटें आरक्षित की गई हैं, जिनके लिए इस वर्ष करीब 179 विद्यार्थियों ने आवेदन किया है।
पोर्टल पर अपलोड की जाएगी सूची
उन्होंने बताया कि टॉप क्लास स्कूल एजुकेशन योजना के तहत सूचीबद्ध स्कूलों में पढ़ रहे योग्य बी.सी. विद्यार्थियों को नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए लगभग 75 हजार रुपये तथा ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के लिए करीब 1.25 लाख रुपये प्रति वर्ष की वित्तीय सहायता दी जाएगी। लगभग 6,000 स्कूलों की सूची डॉ. भीमराव अंबेडकर पोर्टल पर अपलोड की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को पूरी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सके।
डॉ. बलजीत कौर ने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि बी.सी. प्रमाणपत्र शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने का मुख्य आधार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विभाग की यह विशेष जागरूकता मुहिम भ्रम दूर करेगी, नियमों का एकसमान पालन सुनिश्चित करेगी और हर योग्य लाभार्थी को उसका बनता हक दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।