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Tuesday, 11 August 2026

Punjab News: आग से झुलसने के बाद लंबा इलाज, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 265 मरीजों को कैशलेस उपचार

Punjab News: आग से झुलसने के बाद लंबा इलाज, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 265 मरीजों को कैशलेस उपचार

डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: आग कुछ ही मिनटों में बुझ सकती है, लेकिन इससे होने वाला नुकसान काफी लंबे समय तक रह सकता है। आग से गंभीर रूप से झुलसने वाले व्यक्ति के लिए आग की लपटों से बाहर निकलना सिर्फ शुरुआत होती है। इसके बाद बार-बार ड्रेसिंग, विभिन्न मेडिकल प्रक्रियाएं, पुनर्निर्माण और महीनों तक रिकवरी चल सकती है।

265 इलाज मुहैया कराए

मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSVY) के तहत पंजाब में आग से झुलसने के इलाज से संबंधित ताजा आंकड़े इस मुश्किल सफर को बयान करते हैं। योजना के तहत 1.39 करोड़ रुपये की लागत से जलने के 265 इलाज मुहैया कराए गए हैं।

शॉर्ट सर्किट के कारण घर में आग लगने से 24 साल का अर्जुन कुमार जख्मी हो गया। उसे इलाज के लिए बठिंडा ले जाया गया, जहां लगभग 50,000 रुपये का इलाज योजना के तहत कैशलेस मुहैया कराया गया। अपने अनुभव को याद करते हुए उन्होंने कहा, "सब कुछ बहुत तेजी से हुआ।" इलाज कैशलेस होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने कहा कि वे अस्पताल के खर्चों की चिंता करने की बजाय अपने स्वस्थ होने पर ध्यान केंद्रित कर सके।

पुरुषों के 61 इलाज किए

पंजाब राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 31 से 45 साल की आयु वर्ग के पुरुषों के 61 इलाज किए गए, जो सभी आयु वर्गों में सबसे अधिक हैं। इन इलाजों पर 31.82 लाख रुपये खर्च हुए। 0 से 18 साल की आयु वर्ग के लड़कों के 39 इलाज हुए, जबकि इसी आयु वर्ग की लड़कियों के 27 इलाज किए गए।

महिलाओं में 19 से 30 साल की आयु वर्ग में सबसे अधिक 26 इलाज दर्ज किए गए, जबकि 31 से 45 साल की आयु वर्ग की महिलाओं के 21 इलाज किए गए। सरल शब्दों में कहा जाए तो इलाज कराने वाले लाभार्थियों में बच्चों, नौजवानों और कामकाजी आयु वर्ग के लोगों की बड़ी संख्या रही।

कामकाजी उम्र में गंभीर रूप से प्रभावित

पंजाब के ये आंकड़े, आग से झुलसने के कारण होने वाले जख्मों के लंबे समय तक रहने वाले प्रभावों संबंधी मेडिकल रिसर्च के नतीजों से भी मेल खाते हैं। PubMed के अनुसार, पंजाब के एक तृतीयक देखभाल अस्पताल में आग से झुलसने से पीड़ित 892 मरीजों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि 79 प्रतिशत मरीज 15 से 45 साल की आयु के थे, जो यह दर्शाता है कि आग से झुलसने की घटनाएं लोगों को उनकी कामकाजी उम्र में गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। अध्ययन के दौरान भारत में सुलभ और किफायती बर्न केयर की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

इस संबंधी स्वास्थ्य और परिवार भलाई मंत्री डा. बलबीर सिंह ने कहा, "आग से झुलसने के कारण होने वाले जख्म आग बुझने के साथ खत्म नहीं होते। कई मरीजों के लिए स्वास्थ्य लाभ का मतलब बार-बार होने वाली मेडिकल प्रक्रियाएं, पुनर्वास और लंबे समय तक देखभाल होता है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि इन परिवारों के लिए आर्थिक तंगी एक और जख्म न बन जाए। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मरीजों को इस चिंता की बजाय कि इलाज का खर्च कैसे किया जाएगा, अपनी स्वास्थ्य लाभ, रिकवरी और जिंदगी को पटरी पर लाने पर ध्यान केंद्रित करने के योग्य होना चाहिए।"

38.90 लाख रुपये खर्च

सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ों में से एक पोस्ट-बर्न कॉन्ट्रैक्चर से संबंधित हैं, जिसके 75 इलाज किए गए और इन पर 38.90 लाख रुपये खर्च हुए।

पोस्ट-बर्न कॉन्ट्रैक्चर झुलसने के जख्मों के बाद बनने वाले स्कार टिशू के सिकुड़ने के कारण हो सकता है। इससे शरीर की गतिविधियां सीमित हो जाती हैं और रोजाना के आम काम करना भी मुश्किल हो सकता है। इस तरह, जलने के कारण होने वाले जख्मों का प्रभाव त्वचा के ठीक हो जाने के काफी समय बाद तक भी बना रह सकता है।

अन्य इलाज प्रक्रियाओं में शरीर की कुल सतह के जले हुए हिस्से का इलाज, टिशू एक्सपैंडर, इलेक्ट्रिकल और रसायनों के कारण झुलसने के मामलों का इलाज, एंटीबायोटिक ड्रेसिंग, स्किन फ्लैप, डिब्राइडमेंट और कान/नाक का पुनर्निर्माण शामिल है। ये सिर्फ सुंदरता से संबंधित समस्याएं नहीं हैं। कुछ मरीजों के लिए ये इलाज उनकी गतिविधियों, कार्यक्षमता और आत्मविश्वास को फिर से हासिल करने के लिए जरूरी होते हैं।

बठिंडा में सबसे अधिक लाभार्थी दर्ज

सूचीबद्ध जिलों में से बठिंडा में सबसे अधिक लाभार्थी दर्ज किए गए, जहां 57 लोगों को 63 इलाज मुहैया कराए गए और यहां इलाज पर 33.51 लाख रुपये खर्च हुए। इसके बाद फरीदकोट में 40 और पटियाला में 39 लाभार्थी दर्ज किए गए। सबसे कम लाभार्थी रूपनगर, एस.ए.एस. नगर और फतेहगढ़ साहिब में दर्ज किए गए, जहां एक-एक लाभार्थी था।

डा. बलबीर सिंह ने कहा कि इलाज से संबंधित आंकड़े आग से झुलसने वाले मरीजों, खास तौर पर बच्चों, नौजवानों और कामकाजी आयु वर्ग के लोगों को समय पर व्यापक इलाज मुहैया कराने के महत्व को दर्शाते हैं, क्योंकि लाभार्थियों में इन वर्गों की संख्या काफी है। उन्होंने कहा, "ऐसी घटना कुछ ही सेकंडों में किसी व्यक्ति की जिंदगी बदल सकती है, लेकिन स्वस्थ होने में अक्सर काफी ज्यादा समय लगता है। इसलिए आग से झुलसने से पीड़ित व्यक्ति के लिए कैशलेस इलाज का मतलब बहुत व्यावहारिक है; जब आग आखिरकार बुझ जाती है तो परिवार को एक और आग, यानी अस्पताल के बिल का सामना नहीं करना पड़ता।"