Sunday, 02 August 2026
राजनीति
Punjab News: पंजाब कांग्रेस टूट की कगार पर, चन्नी-वडिंग की लड़ाई में कांग्रेस की नैया डूबना तय!
महाबीर जायसवाल
डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब विधानसभा चुनाव में करीब सात महीने का समय बचा है, लेकिन उससे पहले ही कांग्रेस (Congress) में गुटबाजी खुलकर सामने आने लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग (Amarinder Singh Raja Warring) अब सार्वजनिक मंचों से एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। एक दूसरे के समर्थक मारपीट कर रहे हैं, एक दूसरे पर कुर्सियां फेंक रहे हैं।
हालात ऐसे बन गए हैं कि पार्टी के भीतर टूट और बड़े राजनीतिक बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर खींचतान अब खुलकर सामने आ चुकी है। हाल के घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि पार्टी के अंदर दो स्पष्ट गुट बन चुके हैं।
रील से शुरू हुआ विवाद
विवाद तब और बढ़ गया जब पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) और उनके बेटे रिदमजीत सिंह ने सोशल मीडिया पर एक रील साझा की। रील में डायलॉग था, "कुछ लोग गलतफहमी में हैं कि हम जवाब नहीं देंगे। तैयारी थोड़ी बड़ी है, सब्र रखो, पल-पल का हिसाब लेंगे।"
हालांकि किसी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसे सीधे तौर पर पंजाब कांग्रेस (Punjab Congress) नेतृत्व पर निशाना माना गया। इसके जवाब में राजा वड़िंग (Amarinder Singh Raja Warring) ने कहा कि -
"रील ज्यादा डालने से कोई चुनाव नहीं जीतता। अगर सोशल मीडिया से चुनाव जीते जाते तो सिद्धू मूसेवाला कभी चुनाव नहीं हारते। उनके वीडियो और रीलों पर करोड़ों व्यूज आते थे।"
वड़िंग (Amarinder Singh Raja Warring) ने यह भी कहा कि चुनाव जीतने के लिए जनता के बीच काम करना जरूरी है, केवल सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने से सफलता नहीं मिलती।
मदनलाल जलालपुर को पार्टी से निकाला
पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल (Punjab Congress Incharge Bhupesh Baghel) के खिलाफ बयान देने पर घनौर के पूर्व विधायक मदनलाल जलालपुर को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। लेकिन इसके कुछ ही समय बाद चरणजीत सिंह चन्नी स्वयं जलालपुर के घर पहुंचे।
चन्नी (Charanjit Singh Channi) ने कहा कि यह समय नेताओं को जोड़ने का है, तोड़ने का नहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की असली लड़ाई भाजपा, आम आदमी पार्टी और अकाली दल जैसी विरोधी पार्टियों से है, न कि अपने ही नेताओं से।
उधर, जलालपुर ने भी खुलकर दावा किया कि राजा वड़िंग का प्रदेश अध्यक्ष पद से हटना तय है और जल्द ही कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिलेगा।
2022 की हार को लेकर भी आमने-सामने
राजा वड़िंग ने 2022 विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए चन्नी पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि मालवा क्षेत्र में उस चुनाव में बड़े-बड़े नेता हार गए थे और कांग्रेस केवल दो सीटें जीत सकी थी।
वड़िंग ने यह भी कहा कि चुनाव हारने के बाद वह विदेश नहीं गए, बल्कि लगातार पार्टी को मजबूत करने में जुटे रहे। उनका इशारा चन्नी की ओर था, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद वह कई महीनों तक विदेश में रहे।
संगरूर और पटियाला में खुलकर दिखी गुटबाजी
1 अगस्त को संगरूर और पटियाला में आयोजित कांग्रेस कार्यक्रमों में पार्टी की अंदरूनी कलह सार्वजनिक रूप से सामने आ गई।
पटियाला के समाना में आयोजित कार्यक्रम के दौरान चन्नी समर्थकों ने राजा वड़िंग की हूटिंग की और "चरणजीत चन्नी जिंदाबाद" के नारे लगाए।
वहीं संगरूर के कैलिफोर्निया रिजॉर्ट में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के दो गुटों में तीखी झड़प हो गई। कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर कुर्सियां तक फेंकी। इस दौरान "भूपेश बघेल मुर्दाबाद" और "चन्नी जिंदाबाद" के नारे भी लगाए गए। घटना ने कांग्रेस की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
भूपेश बघेल के दौरे का चन्नी ने किया बहिष्कार
पार्टी सूत्रों के अनुसार, चरणजीत सिंह चन्नी ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के संगठनात्मक दौरे से दूरी बना रखी है। कांग्रेस की बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने की मुहिम में भी चन्नी और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा शामिल नहीं हो रहे हैं।
फतेहगढ़ साहिब में आयोजित कार्यक्रम में भी चन्नी की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही। कार्यक्रम में केवल राजा वड़िंग और उनके समर्थक नेता मौजूद थे।
CM फेस और नेतृत्व की लड़ाई बनी मुख्य वजह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा विवाद केवल व्यक्तिगत बयानबाजी तक सीमित नहीं है। इसके पीछे पंजाब कांग्रेस में मुख्यमंत्री चेहरे और संगठन पर नियंत्रण की लड़ाई भी बड़ी वजह मानी जा रही है।
चन्नी समर्थकों का तर्क है कि पंजाब में करीब 32 प्रतिशत दलित आबादी को देखते हुए पार्टी को जल्द मुख्यमंत्री चेहरे को स्पष्ट करना चाहिए। वहीं राजा वड़िंग का कहना है कि कांग्रेस आलाकमान का फैसला सर्वोपरि है और वह हर निर्णय स्वीकार करेंगे।
वड़िंग ने हाल ही में कहा था कि यदि पार्टी नेतृत्व उन्हें अध्यक्ष पद से हटा भी देता है या टिकट नहीं देता, तब भी वह कांग्रेस के सिपाही की तरह पार्टी के साथ रहेंगे।
चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखना है। लगातार बढ़ती बयानबाजी, नेताओं की नाराजगी और कार्यकर्ताओं के बीच झड़पों ने पार्टी की चुनावी तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि कांग्रेस नेतृत्व जल्द इस विवाद को सुलझाने में सफल नहीं होता, तो चुनावी साल में इसका सीधा राजनीतिक फायदा आम आदमी पार्टी, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल को मिल सकता है। आने वाले दिनों में पार्टी आलाकमान इस संकट से कैसे निपटता है, इस पर पूरे पंजाब की राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।