Monday, 26 October 2026
राजनीति
Punjab Congress: पंजाब कांग्रेस के नेताओं को केसी वेणुगोपाल की सख्त हिदायत, कहा- किसी ने व्यक्तिगत कैंपेन चलाया तो...
डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab Congress: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने 26 अक्टूबर को चंडीगढ़ दौरे के दौरान पंजाब के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में पंजाब कांग्रेस के नेताओं को संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने, व्यक्तिगत चुनावी अभियान से बचने और आगामी रैलियों के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को जुटाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में पंजाब प्रभारी सचिन पायलट भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, नेताओं को राहुल गांधी की 4 नवंबर को प्रस्तावित संगरूर रैली में करीब एक लाख लोगों की भीड़ जुटाने का लक्ष्य दिया गया। इस रैली को पंजाब में कांग्रेस के चुनावी अभियान की शुरुआत के तौर पर पेश किया जा रहा है।
राहुल गांधी की संगरूर रैली से चुनावी अभियान
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक में कहा गया कि संगरूर रैली के बाद पंजाब के अलग-अलग जोन में राहुल गांधी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की रैलियां तथा रोड शो आयोजित किए जाएंगे। इसके जरिए पार्टी विधानसभा चुनाव से पहले अपने संगठन को सक्रिय करने और जनता तक पहुंच बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
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वेणुगोपाल और सचिन पायलट ने नेताओं को संदेश दिया कि फिलहाल सभी को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के बजाय पार्टी की जीत पर ध्यान देना चाहिए। बैठक में कथित तौर पर यह भी कहा गया कि पार्टी में मुख्यमंत्री, मंत्री और बोर्डों के चेयरमैन जैसे पदों पर पहुंचने का अवसर संगठन के नेताओं को ही मिलेगा, लेकिन अभी सामूहिक रूप से चुनाव जीतने पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी है।
व्यक्तिगत कैंपेन नहीं, पार्टी के नाम पर काम करने की हिदायत
बैठक में पंजाब कांग्रेस के नेताओं को निर्देश दिया गया कि विधानसभा चुनाव को लेकर कोई भी नेता अपना अलग व्यक्तिगत अभियान न चलाए। चुनावी गतिविधियां पार्टी के साझा कार्यक्रम और रणनीति के तहत ही संचालित की जाएं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, वेणुगोपाल और सचिन पायलट ने अनुशासनहीनता और भीतरघात को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में किसी भी स्तर पर अनुशासन तोड़ने या संगठन को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे संबंधित नेता कितना ही वरिष्ठ क्यों न हो।
नशे को लेकर कांग्रेस का हमला
बैठक से पहले केसी वेणुगोपाल ने पंजाब की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि राज्य बदलाव की ओर देख रहा है। उन्होंने कानून-व्यवस्था और नशे की समस्या को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।
वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य पंजाब में दोबारा सरकार बनाना और राज्य को सामाजिक बुराइयों से बचाना है। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करेगी।
पंजाब कांग्रेस को 50 हजार लोगों का लक्ष्य
पंजाब में चुनावी तैयारियों के साथ कांग्रेस का ध्यान दिल्ली में होने वाली महारैली पर भी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में वोट चोरी के मुद्दे पर प्रस्तावित रैली के लिए पंजाब कांग्रेस को करीब 50 हजार लोगों को जुटाने का लक्ष्य दिया गया है।
इस रैली में राहुल गांधी सहित कांग्रेस और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं के शामिल होने की संभावना बताई गई है। कांग्रेस इस आयोजन के जरिए मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रही है।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान कई जगह मतदाताओं के नाम हटाए गए या अनियमितताएं हुईं। इसी मुद्दे पर विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। ये विपक्ष के आरोप हैं; इनके संबंध में संबंधित चुनावी प्राधिकारियों का पक्ष अलग से देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचाने की तैयारी
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली रैली में पंजाब से कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जिलों के स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। नेताओं को कार्यकर्ताओं से संपर्क करने और रैली के लिए लोगों को जुटाने की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से सांसदों को 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक दिल्ली में उपस्थित रहने के निर्देश दिए जाने की बात भी सामने आई है। रैली में INDIA गठबंधन के नेताओं की भागीदारी के जरिए विपक्ष एकजुटता दिखाने की कोशिश करेगा।
2027 चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस की एकजुटता पर जोर
केसी वेणुगोपाल का चंडीगढ़ दौरा ऐसे समय हुआ है, जब पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। संगरूर रैली के लिए बड़ा लक्ष्य तय करना और नेताओं को व्यक्तिगत अभियान से दूर रहने की हिदायत देना कांग्रेस की संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अब पार्टी के सामने दो अहम चुनौतियां हैं—दिल्ली की महारैली के लिए निर्धारित संख्या में कार्यकर्ताओं को जुटाना और संगरूर से पंजाब में चुनावी अभियान को गति देना। इन आयोजनों में पार्टी की भागीदारी और नेताओं के बीच तालमेल पर सबकी नजर रहेगी।