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Tuesday, 03 November 2026

Punjab News: भगवंत मान सरकार द्वारा ‘मेरा घर, मेरे नाम’ योजना के तहत अब तक 1,377 गांवों में 2.19 लाख से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड वितरित

Punjab News: भगवंत मान सरकार द्वारा ‘मेरा घर, मेरे नाम’ योजना के तहत अब तक 1,377 गांवों में 2.19 लाख से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड वितरित

डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा अपनी महत्वपूर्ण योजना ‘मेरा घर, मेरे नाम’ को तेजी से लागू किया जा रहा है। इस योजना के तहत 2 नवंबर, 2026 तक राज्य के सभी 23 जिलों के 1,377 गांवों में लाभार्थियों को 2.19 लाख से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। इस पहल का उद्देश्य ड्रोन सर्वेक्षण और अधिकारों के प्रमाणिक रिकॉर्ड तैयार करके लाल लकीर (आबादी देह) के भीतर रहने वाले निवासियों को उनकी संपत्तियों का कानूनी मालिकाना हक प्रदान करना है, ताकि संपत्ति के स्वामित्व से संबंधित दशकों पुरानी कमियों को दूर किया जा सके।

यहां पंजाब भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पंजाब के राजस्व, पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य पंजाब के सभी 10,689 गांवों के लाल लकीर अथवा आबादी देह क्षेत्रों में स्थित संपत्तियों के स्पष्ट मालिकाना अधिकार स्थापित करना है।

यह प्रक्रिया प्रतिदिन निर्बाध रूप से जारी

इसके लिए ड्रोन सर्वेक्षण और अधिकारों के प्रमाणिक रिकॉर्ड तैयार करने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वास्तविक मालिकों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जा रहे हैं, ताकि उनके पास स्वामित्व का कानूनी रूप से मान्य दस्तावेजी प्रमाण हो। राजस्व मंत्री ने बताया कि प्रॉपर्टी कार्ड के वितरण की शुरुआत 7 अक्टूबर, 2026 को संगरूर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह के दौरान की गई थी और तब से यह प्रक्रिया प्रतिदिन निर्बाध रूप से जारी है।

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योजना के क्रियान्वयन की समय-सीमा के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के सभी गांवों को चार चरणों में कवर किया जा रहा है। पहले चरण के तहत 2,284 गांवों का काम 15 नवंबर, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसी तरह दूसरे चरण के तहत 1,680 गांवों का काम नवंबर के अंत तक और तीसरे चरण के तहत 1,152 गांवों का काम दिसंबर के मध्य तक पूरा करने का लक्ष्य है।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य

चौथे चरण के तहत शेष 5,579 गांवों को जनवरी 2027 तक कवर किए जाने की संभावना है। राजस्व मंत्री ने कहा कि गांव स्तरीय समितियों और ग्राम सभाओं के सहयोग से गांवों के नक्शों से संबंधित अधूरी जानकारी पूरी करने और आपत्तियों का निपटारा करने का काम भी साथ-साथ किया जा रहा है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य राजस्व रिकॉर्ड में शुद्धता और पूर्णता सुनिश्चित करना है।

हरदीप सिंह मुंडियां ने आगे बताया कि तकनीकी कारणों से जिन गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण नहीं हो सका है, वहां विभाग द्वारा जमीनी स्तर पर सत्यापन (ग्राउंड ट्रुथिंग) के माध्यम से यह कार्य पूरा किया जाएगा। इस पहल के दूरगामी लाभों के बारे में उन्होंने कहा कि गांवों के निवासियों के मालिकाना हक दशकों से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे, जबकि कई परिवार पीढ़ियों से इन घरों में रह रहे हैं। इस योजना के माध्यम से अब प्रत्येक पात्र परिवार को स्वामित्व का आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध करवाकर लंबे समय से चली आ रही इस कमी को दूर किया जा रहा है।

कोई प्रमाणिक सरकारी रिकॉर्ड नहीं था

उन्होंने कहा कि गांवों के आबादी देह क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के पास कई बार 30 से 40 वर्षों से घरों में रहने के बावजूद मालिकाना हक साबित करने के लिए कोई प्रमाणिक सरकारी रिकॉर्ड नहीं था। यह पहल परिवारों को स्वामित्व का स्थायी दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध करवाएगी और संपत्ति संबंधी विवादों तथा अनावश्यक प्रशासनिक परेशानियों को कम करने में सहायक होगी।

हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि इस योजना का विशेष लाभ आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और अनुसूचित जातियों के परिवारों को मिलेगा, जिनके लिए आबादी देह में स्थित घर अक्सर एकमात्र अचल संपत्ति होते हैं। संपत्तियों का औपचारिक रूप से उनके नाम पर दर्ज होना इन परिवारों को अपने मालिकाना हक सुरक्षित रखने और अपनी संपत्ति का बेहतर उपयोग करने के लिए आधिकारिक दस्तावेज मिलेगा।

योजना बनाने और उन्हें लागू करने में सुधार आएगा

उन्होंने आगे कहा कि प्रॉपर्टी कार्ड के माध्यम से मालिक अपनी संपत्ति के आधार पर बैंकों से ऋण प्राप्त कर सकेंगे और संपत्ति का पंजीकरण करवाने की सुविधा भी हासिल कर सकेंगे। इस पहल से ग्राम पंचायतों को गांवों के सही नक्शे उपलब्ध होंगे, जिससे विकास कार्यों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने में सुधार आएगा। इसके साथ ही प्रशासन के लिए गांव स्तर पर डिजिटल और विश्वसनीय संपत्ति रिकॉर्ड बनाए रखना भी आसान होगा।

सभी पात्र परिवारों तक इस योजना का लाभ पहुंचाने के लिए मान सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि सभी निर्धारित गांवों को कवर किए जाने तक प्रॉपर्टी कार्डों का वितरण प्रतिदिन जारी रहेगा। प्रॉपर्टी कार्डों में किसी भी प्रकार की गलती अथवा विसंगति को ठीक करवाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए स. हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि यदि किसी कार्ड में लिखने की गलती या कोई अन्य त्रुटि है तो संबंधित निवासी अपने क्षेत्र के पटवारी अथवा तहसीलदार के पास अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं।

उन्होंने घोषणा की कि गलतियों में सुधार के लिए आवेदन करने हेतु जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया जा रहा है, जिसके माध्यम से लोग घर बैठे ही संशोधन के लिए अपना आवेदन भेज सकेंगे। राज्य के निवासियों से अपने प्रॉपर्टी कार्ड प्राप्त करने और उनमें दर्ज विवरणों की सावधानीपूर्वक जांच करने की अपील करते हुए मंत्री ने कहा कि किसी भी प्रकार की गलती की समय रहते पहचान करके उसे ठीक करवाया जाए, ताकि ‘मेरा घर, मेरे नाम’ योजना का पूरा लाभ उठाया जा सके।

भगवंत मान सरकार द्वारा 'मेरा घर, मेरे नाम' के तहत पंजाब के लाल लकीर क्षेत्रों के निवासियों को दिए जा रहे हैं कानूनी मालिकाना अधिकार

पंजाब सरकार की प्रमुख 'मेरा घर मेरे नाम' योजना राज्य भर में लाल लकीर (आबादी देह) क्षेत्रों के निवासियों को कानूनी मालिकाना दस्तावेज प्रदान कर रही है, जिससे गांव की संपत्ति के रिकॉर्ड में लंबे समय से चल रहे अंतर को भरा जा रहा है। इस पहल के तहत पंजाब के ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में घरों और प्लॉटों के लिए अधिकारों का एक प्रामाणिक रिकॉर्ड तैयार करने के लिए ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण किए जा रहे हैं और मालिकाना के दस्तावेजी सबूत के रूप में सही मालिकों को प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए जा रहे हैं।

योजना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

पंजाब के ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्र, जिन्हें लाल लकीर या आबादी देह के रूप में भी जाना जाता है, दशकों तक औपचारिक राजस्व सर्वेक्षणों और रिकॉर्डों से बाहर रहे। परिणामस्वरूप 30 से 40 सालों से अपने घरों में रह रहे परिवारों के पास मालिकाना या संपत्ति पर दावा पेश करने के लिए कोई आधिकारिक नक्शा या सरकारी दस्तावेज नहीं होता था। इससे मालिकाना साबित करने में कठिनाइयां पेश आती थीं, पड़ोस और परिवारों में आंतरिक विवाद होते थे और मालिकों को बैंक ऋणों के लिए सिक्योरिटी के रूप में अपने घरों का उपयोग करने से रोका जाता था।

सही नक्शों की अनुपस्थिति ने गांव के विकास कार्यों की योजनाबंदी को भी काफी प्रभावित किया। 'मेरा घर मेरे नाम' योजना के तहत पंजाब सरकार द्वारा 'आबादी देह' में मौजूद प्रत्येक घर और प्लॉट के लिए 'अधिकारों का रिकॉर्ड' तैयार किया जा रहा है और संबंधित मालिकों को 'प्रॉपर्टी कार्ड' जारी किए जा रहे हैं। यह योजना विशेष रूप से गरीब और अनुसूचित जाति परिवारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जिनके पास 'आबादी देह' से बाहर कोई जमीन नहीं है क्योंकि अक्सर उनका घर ही उनकी एकमात्र अचल संपत्ति होता है।

योजना और कानूनी ढांचा

दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली पंजाब कैबिनेट ने अधिनियम में संशोधन किया। इस संशोधन से अब आपत्ति और अपीलें दायर करने और उन पर निर्णय संबंधी समय-सीमा को घटाकर 30 दिन कर दिया गया है, जबकि पहले यह समय-सीमा क्रमशः 90 और 60 दिन होती थी।

'अधिकारों का रिकॉर्ड' कैसे तैयार किया जा रहा है

इस प्रक्रिया के तहत सरकार द्वारा 'आबादी देह' क्षेत्र को रिकॉर्ड में शामिल करने के लिए अधिसूचना जारी करके अधिनियम की धारा 5 तहत गांव में 'मुनादी' करवाकर लोगों को इस बारे में सूचित किया जा रहा है। इसके बाद ए.आर.आर.ओ. द्वारा धारा 8 तहत एक 'गांव स्तरीय कमेटी' का गठन किया जा रहा है। फिर 'सर्वे ऑफ इंडिया' द्वारा 'आबादी देह' क्षेत्र का ड्रोन सर्वेक्षण किया जाता है और धारा 6 तहत विभिन्न घरों और प्लॉटों के नक्शे तैयार किए जाते हैं।

पटवारी या सर्वेक्षण अधिकारी गांव स्तरीय कमेटी के सहयोग से प्रत्येक घर का दौरा किया जा रहा है ताकि धारा 9 अंतर्गत 'मैप-1' के माध्यम से घर के मालिक की पहचान की जा सके और उसका नाम बकायदा दर्ज किया जा सके।

इसके बाद नक्शे का मसौदा और मालिकों की सूची गांव में प्रदर्शित करने के साथ-साथ ग्राम पंचायत को भी उपलब्ध करवाई जा रही है। संपत्ति के विवरण मालिकों को व्हाट्सएप के द्वारा भी भेजे जा रहे हैं ताकि वे जानकारी की पुष्टि कर सकें और अंतिम रूप देने से पहले आवश्यक संशोधन करवा सकें। यह कार्रवाई धारा 10 तहत 'मैप-2' के माध्यम से की जा रही है।

निर्धारित समय-सीमा के अंदर ए.आर.आर.ओ. के पास आपत्तियां दायर की जा सकती हैं। धारा 11 तहत संबंधित पक्षों की सुनवाई करने के बाद इन आपत्तियों पर निर्णय लिया जाता है। जिन प्रविष्टियों के विरुद्ध कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होती उन्हें अंतिम माना जाता है।

अंतिम नक्शे को 'नक्शा-3' कहा जाता है और अधिकारों के रिकॉर्ड की पुष्टि पटवारी, कानूनगो और ए.आर.आर.ओ. द्वारा की जाती है। इसकी एक प्रति जिला रिकॉर्ड रूम में जमा करवाई जाती है, जबकि दूसरी प्रति धारा 16 के तहत पटवारी के पास रहती है। इसके बाद अधिकारों के अंतिम रिकॉर्ड के आधार पर 'प्रॉपर्टी कार्ड' तैयार करके मालिकों को सौंपे जा रहे हैं।

प्रॉपर्टी कार्डों का वितरण और ताजा प्रगति

प्रॉपर्टी कार्ड विभिन्न गांवों में करवाए गए समारोहों के माध्यम से वितरित किए जा रहे हैं ताकि मालिकों को इन्हें प्राप्त करने के लिए सरकारी दफ्तरों में परेशान न होना पड़े। जो मालिक वितरण समारोह में शामिल नहीं हो सकते उन्हें दो दिनों के अंदर-अंदर, गांव स्तरीय कमेटी के सदस्य की मौजूदगी में उनके घर ही कार्ड पहुंचाए जा रहे हैं।

प्रत्येक मालिक को एक लिफाफे में लैमिनेटेड प्रॉपर्टी कार्ड भेजा जाता है, जिसके साथ मुख्यमंत्री द्वारा एक पत्र भी होता है। यह कार्ड पंजाबी और अंग्रेजी भाषाओं में उपलब्ध है। इसमें सर्वेक्षण यूनिट नंबर, जी.पी.एस. लोकेशन, संपत्ति का ड्रोन नक्शा और एक क्यूआर कोड शामिल होता है, जिसके द्वारा विवरणों की ऑनलाइन पुष्टि होती है।

प्रत्येक कार्ड की सुपुर्दगी पटवारी द्वारा रजिस्टर में दर्ज की जाती है और रोजाना 'जमाबंदी पोर्टल' पर अपडेट किया जाता है। 2 नवंबर, 2026 तक पंजाब के सभी 23 जिलों के 1,377 गांवों में लाभार्थियों को 2.19 लाख से अधिक संपत्ति कार्ड वितरित किए जा चुके हैं।

चार चरणों में वितरण का शेड्यूल

राज्य के सभी 10,689 गांवों में प्रॉपर्टी कार्डों की वितरण प्रक्रिया चार चरणों में पूरी की जा रही है। पहले चरण अंतर्गत 2,284 गांव शामिल हैं और इसे 15 नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। दूसरे चरण में 1,680 गांव कवर किए जाएंगे, जिसके नवंबर 2026 के अंत तक पूरे होने की उम्मीद है।

तीसरे दौर अंतर्गत 1,152 गांव आते हैं, जिसका काम दिसंबर 2026 के मध्य तक पूरा होने की संभावना है। बाकी बचे 5,579 गांवों को चौथे चरण में शामिल किया गया है, जिसका काम जनवरी 2027 तक पूरा हो जाने की संभावना है।

त्रुटियों का सुधार और ऑनलाइन अपील की सुविधा

यदि संपत्ति मालिकों को अपने प्रॉपर्टी कार्डों में नाम, मालिकाना हिस्से या रकबे संबंधी कोई कमी या अंतर नजर आता है, तो वे इसके सुधार के लिए दरख्वास्त दे सकते हैं। फिलहाल यह अपील संबंधित दस्तावेजों सहित ए.आर.आर.ओ. यानी तहसीलदार या नायब तहसीलदार के दफ्तर में जमा करवाई जा सकती है।

दिसंबर 2026 से मालिक अपने प्रॉपर्टी कार्ड पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करके और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करके ऑनलाइन सुधार की मांग भी कर सकेंगे। यह ऑनलाइन सुविधा इसलिए तैयार की जा रही है ताकि गांववासियों को सुधार के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

अपीलों का निपटारा अधिनियम के उपबंध 5 तहत किया जाता है। जो मालिक ए.आर.आर.ओ. के फैसले से संतुष्ट नहीं होते, वे आर.आर.ओ. (एस.डी.एम.) और उसके बाद सी.आर.आर.ओ. (डिप्टी कमिश्नर) के पास पहुंच सकते हैं। सुधार की मंजूरी मिलने पर संशोधित प्रॉपर्टी कार्ड जारी कर दिया जाता है।

पारदर्शी और तसदीक़ आधारित प्रक्रिया

योजना तहत पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मालिकों को अपनी संपत्ति के बारे में दर्ज विवरणों की पुष्टि करने के समर्थ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। सर्वेक्षण के दौरान गांव स्तरीय कमेटी की मौजूदगी में घर-घर जाकर संपत्ति मालिकों की शिनाख्त की जा रही है। जहां कोई विवरण अधूरा रह जाता है, उसे ग्राम सभा के माध्यम से पूरा किया जा रहा है।

नक्शों के मसौदे और मालिकों की सूचियां गांव में सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जा रहे हैं और ग्राम पंचायत को भी सौंपे जा रहे हैं। इसके अलावा संपत्ति के निजी विवरण व्हाट्सएप के माध्यम से भी मालिकों के साथ साझा किए जा रहे हैं। संबंधित पक्षों की सुनवाई के बाद ही ए.आर.आर.ओ. द्वारा आपत्तियों का निपटारा किया जाता है और इन आदेशों को निर्धारित अपीली प्रणाली के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है।

प्रॉपर्टी कार्ड गांव स्तरीय सार्वजनिक समारोहों के दौरान वितरित किए जा रहे हैं और घर जाकर कार्ड देने की सूरत में, यह कार्रवाई गांव स्तरीय कमेटी के सदस्य की हाजिरी में मालिक के हस्ताक्षर लेकर की जा रही है। कार्ड सौंपने की प्रत्येक कार्रवाई रजिस्टर में दर्ज करने के साथ-साथ इसे जमाबंदी पोर्टल पर अपडेट किया जा रहा है। इस काम की प्रगति की गांव-वार निगरानी जिला और राज्य स्तर पर की जा रही है।

अंतिम मालिकाना रिकॉर्ड की विधिवत पुष्टि करके इसे जिला रिकॉर्ड रूम में संभाला जा रहा है और इसकी एक प्रति पटवारी के पास उपलब्ध करवाई जा रही है। प्रॉपर्टी कार्ड पर दर्ज क्यूआर कोड के माध्यम से बैंकों सहित कोई भी इसकी ऑनलाइन पुष्टि कर सकता है।

गांव के निवासियों और ग्रामीण विकास के लिए लाभदायक

यह योजना विशेष रूप से उन परिवारों के लिए बेहद लाभदायक साबित हो रही है, जिनके आबादी देह अंदर के मकान ही उनकी एकमात्र अचल संपत्ति हैं। आबादी देह से बाहर जमीन से वंचित गरीब और अनुसूचित जातियों के परिवारों को उनके मकानों का सरकारी रिकॉर्ड उनके अपने नाम पर मिलेगा, जिससे उनके मालिकाना अधिकारों को दस्तावेजी सुरक्षा हासिल होगी।

प्रॉपर्टी ओनरशिप सर्टिफिकेट 2021 के अधिनियम अंतर्गत मालिकाना का कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त सबूत है। इससे संपत्ति की रजिस्ट्री करवाने में आसानी होगी और मालिक कारोबार, खेती, शिक्षा या इलाज के लिए बैंकों से कर्जा लेने के लिए अपने मकान गिरवी रख सकेंगे। ड्रोन आधारित नक्शों के माध्यम से मालिकाना हिस्सों के इंदराज और हदबंदी से संपत्ति के विवादों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। यदि कोई परिवार बाहर या विदेश में भी रहता है, तो भी यह रिकॉर्ड मालिक के नाम पर ही कायम रहेगा।

ग्राम पंचायतों के लिए मकानों, सड़कों, नालियों और साझी जगहों के सही नक्शे गांव के विकास कार्यों की बेहतर योजनाबंदी में सहायक होंगे। इस कदम से प्रशासन के पास भी गांव स्तर के डिजिटाइज्ड और दुरुस्त नक्शे तथा संपत्ति रिकॉर्ड उपलब्ध होंगे। 'मेरा घर मेरे नाम' स्कीम के द्वारा, कई पीढ़ियों से अपने घरों में रह रहे परिवारों को पहली बार अपने नाम पर मालिकाना का आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड हासिल होगा।