ePaper Reading mode

Daily Samvad ePaper

Saturday, 07 February 2026

Punjab: पंजाब के दो सीनियर IAS अफसरों को सरकार ने किया सस्पैंड, जाने वजह

डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab IAS Officers Suspended News Update: पंजाब सरकार ने एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए राज्य के दो वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में कमल किशोर यादव (Kamal Kishore Yadav IAS) और जसप्रीत सिंह (Jaspreet Singh IAS) शामिल हैं। सरकार द्वारा जारी आदेशों के अनुसार यह कार्रवाई प्रशासनिक आधार पर की गई है। हालांकि, फिलहाल निलंबन के पीछे के विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, पंजाब (Punjab) के दोनों अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान कुछ गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं और कार्यप्रणाली को लेकर सरकार के पास शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर राज्य सरकार ने प्रारंभिक जांच के बाद यह सख्त कदम उठाया है। निलंबन आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और दोनों अधिकारियों को आगे के आदेश तक मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। [caption id="attachment_88905" align="aligncenter" width="1200"] CM Bhagwant Singh Mann CM Bhagwant Singh Mann[/caption]

सीएम भगवंत मान की बड़ी कार्रवाई

पंजाब (Punjab) सरकार की इस कार्रवाई को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में चल रहे प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही अभियान के तहत देखा जा रहा है। सरकार पहले भी यह स्पष्ट कर चुकी है कि प्रशासन में पारदर्शिता और अनुशासन से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे अधिकारी कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो।

यह भी पढ़ें: जालंधर में सुपर क्रीमिका स्वीट्स और Zomato को लीगल नोटिस जारी

बताया जा रहा है कि निलंबन के बाद अब दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाएगी। जांच के दौरान उनके कार्यकाल से जुड़े दस्तावेजों, फैसलों और प्रशासनिक गतिविधियों की गहन समीक्षा की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। [caption id="attachment_101823" align="aligncenter" width="1200"] IAS KK Yadav and Jaspreet Singh Punjab IAS KK Yadav and Jaspreet Singh Punjab[/caption]

फैसले को अहम माना जा रहा

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य सरकार का यह संदेश देता है कि लापरवाही, अनियमितता या प्रशासनिक चूक किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं, विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि सच्चाई सामने आनी चाहिए। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों और प्रक्रियाओं के तहत की गई है। पंजाब सरकार की इस सख्त कार्रवाई को आने वाले समय में प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।