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Saturday, 05 September 2026

Punjab News: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दूसरी शादी के बाद भी नहीं बदलेगा बच्चे के जैविक पिता का नाम

Punjab News: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दूसरी शादी के बाद भी नहीं बदलेगा बच्चे के जैविक पिता का नाम

डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में पिता का नाम बदलने को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मां या पिता की दूसरी शादी के कारण बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में दर्ज उसके जैविक पिता का नाम नहीं बदला जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे के जन्म के समय जो जैविक तथ्य मौजूद थे, वे बाद में हुई घटनाओं से नहीं बदलते। शादी, तलाक या दूसरी शादी जैसी बाद की परिस्थितियां बच्चे के जन्म के समय मौजूद जैविक संबंधों को समाप्त नहीं करतीं।

दूसरी शादी के बाद पिता का नाम बदलने की मांग

यह मामला एक महिला की ओर से दायर याचिका से जुड़ा था। महिला ने अपने नाबालिग बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में पिता का नाम बदलने की मांग की थी। मौजूदा जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे के जैविक पिता के तौर पर एक अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज था।

महिला ने बाद में दूसरी शादी कर ली थी और उसकी मांग थी कि बच्चे के पिता के रूप में उसके दूसरे पति जगजीत सिंह का नाम दर्ज किया जाए। महिला ने अपनी दूसरी शादी को आधार बनाते हुए जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे के माता-पिता से संबंधित विवरण बदलने की मांग की थी।

शादी या तलाक से नहीं बदलते जैविक तथ्य

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे के जन्म के समय जो तथ्य मौजूद थे, उन्हें बाद में हुई घटनाओं के आधार पर बदला नहीं जा सकता।

अदालत के मुताबिक, माता-पिता का बाद में तलाक होना, दोबारा शादी करना या वैवाहिक स्थिति में बदलाव होने से बच्चे के जन्म के समय मौजूद जैविक संबंध नहीं बदल जाते। यानी जन्म प्रमाणपत्र में दर्ज बच्चे के जैविक माता-पिता की पहचान केवल इस आधार पर नहीं बदली जा सकती कि परिवार की परिस्थितियां बाद में बदल गईं।

जन्म प्रमाणपत्र में जन्म के समय की जानकारी दर्ज होती है

हाईकोर्ट ने कहा कि जन्म प्रमाणपत्र किसी व्यक्ति के जन्म से संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड है। इसमें बच्चे के जन्म और उसके माता-पिता से जुड़े तथ्यों को दर्ज किया जाता है।

अदालत ने माना कि बाद में परिवार में हुए बदलाव जन्म प्रमाणपत्र में दर्ज मूल जैविक तथ्यों को अपने आप समाप्त नहीं कर सकते।

पुराने फैसले का भी दिया हवाला

हाईकोर्ट ने इसी विषय से जुड़े अपने पहले के एक फैसले का भी हवाला दिया। अदालत ने कहा कि पहले भी यह स्पष्ट किया जा चुका है कि बाद में बदली वैवाहिक परिस्थितियों के आधार पर बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में जैविक माता-पिता का नाम बदलना स्वीकार्य नहीं है।

बेंच ने माना कि जन्म प्रमाणपत्र में दर्ज तथ्य बच्चे के जन्म के समय की वास्तविक स्थिति को दर्शाते हैं और बाद की घटनाओं के आधार पर उन तथ्यों को मिटाया नहीं जा सकता।

महिला की याचिका खारिज

सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने महिला की याचिका में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया।

इसके साथ ही बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में उसके जैविक पिता का नाम हटाकर मां के दूसरे पति जगजीत सिंह का नाम दर्ज करने की मांग भी स्वीकार नहीं की गई।

हाईकोर्ट के फैसले का सार

  • बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र में दर्ज जैविक पिता का नाम बाद की दूसरी शादी के आधार पर नहीं बदला जा सकता।

  • माता-पिता का तलाक या दूसरी शादी बच्चे के जन्म के समय के जैविक तथ्यों को नहीं बदलती।

  • जन्म प्रमाणपत्र में बच्चे के जन्म के समय मौजूद तथ्यों को दर्ज किया जाता है।

  • बाद की पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर मूल जैविक तथ्य समाप्त नहीं किए जा सकते।

  • हाईकोर्ट ने महिला की याचिका खारिज कर दी।