Tuesday, 22 September 2026
पंजाब
Punjab News: 3.62 करोड़ के निवेश फ्रॉड में आरोपी को राहत नहीं, कोर्ट ने जमानत याचिका ठुकराई
डेली संवाद, मोहाली। Punjab News: पंजाब में निवेश पर 36 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का लालच देकर करोड़ों रुपये की कथित ठगी के मामले में आरोपी गुरप्रीत सिंह को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। मोहाली जिला अदालत ने आरोपी की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है।
अदालत ने मामले में लगे आरोपों की गंभीरता और कथित तौर पर ठगी गई बड़ी रकम को देखते हुए जमानत देने से इनकार किया। यह मामला पंजाब स्टेट क्राइम पुलिस स्टेशन, एसएएस नगर (मोहाली) में दर्ज FIR से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 406, 420 और 120-B के अलावा BUDS Act की धारा 21 और 23 के तहत मामला दर्ज है।
36% सालाना रिटर्न का दिया था लालच
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, गुरप्रीत सिंह और उसके साथियों ने 'अटालिया' नामक कंपनी के जरिए लोगों को निवेश के बदले 3 प्रतिशत मासिक यानी 36 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का कथित लालच दिया।
आरोप है कि इस योजना के तहत निवेशकों से कुल 3.62 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ली गई। बाद में निवेशकों ने कथित धोखाधड़ी को लेकर शिकायत की।
SEBI और RBI से पंजीकरण के दिखाए कथित फर्जी दस्तावेज
जांच के दौरान आरोप सामने आया कि निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए कंपनी को SEBI और RBI से पंजीकृत बताया गया था। इसके समर्थन में कथित तौर पर दस्तावेज भी दिखाए गए।
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जांच एजेंसी के मुताबिक, कंपनी के पास SEBI या RBI का ऐसा कोई वैध लाइसेंस या पंजीकरण नहीं था। इसी आधार पर मामले में धोखाधड़ी के आरोपों को गंभीर माना गया।
आरोपी के खिलाफ पहले से करीब 9 FIR
अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि गुरप्रीत सिंह के खिलाफ पहले से करीब 9 FIR दर्ज हैं। आरोपी 23 जून 2026 से हिरासत में है।
सरकार की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि आरोपी का कोई स्थायी पता नहीं है और जमानत मिलने की स्थिति में उसके फरार होने की आशंका है। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि आरोपी को एक अन्य मामले में पहले Proclaimed Offender (घोषित अपराधी) किया जा चुका है।
कोर्ट ने बड़ी रकम और गंभीर आरोपों को माना अहम
अदालत ने माना कि आरोपी पर लगे धोखाधड़ी के आरोप गंभीर हैं और मामले में कथित तौर पर शामिल रकम भी काफी बड़ी है। अदालत ने यह भी माना कि केवल चालान पेश हो जाने के आधार पर इतनी बड़ी कथित वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में आरोपी को नियमित जमानत देना उचित नहीं होगा।
इसी के बाद अदालत ने गुरप्रीत सिंह की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।
अभियोजन ने जमानत का किया विरोध
अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कई तर्क अदालत के सामने रखे। इनमें आरोपी के खिलाफ पहले से दर्ज मामलों, स्थायी पता नहीं होने और फरार होने की आशंका का मुद्दा शामिल था।
अभियोजन के मुताबिक, आरोपी के प्रभाव के कारण होशियारपुर में शुरुआती शिकायतों और जांच को बंद कर दिया गया था। इसके बाद शिकायतकर्ता को चंडीगढ़ स्थित ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (BOI) के समक्ष शिकायत करनी पड़ी। बचाव पक्ष ने अदालत में आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि मामले में पहले कई स्तरों पर जांच हो चुकी थी और जांच अधिकारियों ने आरोपी को निर्दोष पाया था।
बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
बचाव पक्ष ने इसे मूल रूप से दीवानी प्रकृति का विवाद बताया। वकील ने यह भी दलील दी कि आरोपी के हिरासत में रहने के दौरान उसके खिलाफ 5 और FIR दर्ज की गईं। बचाव पक्ष के अनुसार, इनमें से दो मामलों में गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के Arnesh Kumar बनाम बिहार राज्य फैसले के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप है।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि मामले में अधिक से अधिक IPC की धारा 406 का अपराध बनता है, जिसमें अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है। BUDS Act की धाराओं को लेकर भी बचाव पक्ष ने आपत्ति जताई और कहा कि इन्हें संबंधित रेगुलेटर की शिकायत के बिना जोड़ा गया है।
मोहाली में केस के क्षेत्राधिकार पर भी सवाल
बचाव पक्ष ने अदालत में यह तर्क भी रखा कि कथित अपराध होशियारपुर में हुआ है, इसलिए मोहाली में मामले के क्षेत्राधिकार पर भी सवाल उठता है। वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी को एक अन्य FIR में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है।
बचाव पक्ष के मुताबिक, इस मामले में पुलिस की जांच पूरी हो चुकी है और चालान भी अदालत में पेश किया जा चुका है।फिलहाल अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।