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Tuesday, 27 October 2026

Punjab News: पंजाब के हक की लड़ाई तेज, अपने हिस्से का पानी किसी को नहीं देंगे: भगवंत मान

Punjab News: पंजाब के हक की लड़ाई तेज, अपने हिस्से का पानी किसी को नहीं देंगे: भगवंत मान

डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज राज्य के दरियाई जल मामले पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए घोषणा की कि पंजाब के हिस्से का पानी एक बूंद भी किसी अन्य राज्य को नहीं दिया जाएगा। इस संबंध में विधान सभा द्वारा प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें राज्य के अधिकारों को रेखांकित किया गया।

अदालतों से लेकर सड़कों तक लड़ाई लड़ने का संकल्प लेते हुए उन्होंने सवाल किया कि राजस्थान बिना कोई भुगतान किए पंजाब के पानी का उपयोग कैसे कर रहा है। उन्होंने बताया कि राजस्थान की ओर रॉयल्टी के रूप में 1.43 लाख करोड़ रुपये बकाया हैं। उन्होंने कहा कि रावी और ब्यास नदियों के पानी में राजस्थान और हरियाणा का कोई हिस्सा नहीं बनता।

14,000 किलोमीटर लंबी पाइपलाइनें बिछाई गई

मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार राज्य के सिंचाई ढांचे को मजबूत कर रही है। पिछले चार सालों में नहरी पानी की पहुंच को खेतों के 22 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत तक किया गया है और 14,000 किलोमीटर लंबी पाइपलाइनें बिछाई गई हैं। पंजाब विधान सभा सत्र के अंतिम दिन नदी जल और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रस्तावों पर चर्चा में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब अब अपने कीमती जल संसाधनों के वितरण में हो रही अन्यायपूर्णता को बर्दाश्त नहीं करेगा।

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उन्होंने कहा, "पानी राज्य का विषय है और हेडवर्क्स का नियंत्रण राज्यों के पास होता है। पंजाब अपने पानी की रक्षा के लिए पूरी ताकत से आवाज उठाएगा और राज्य के हितों का नुकसान नहीं होने देगा।" रावी-ब्यास के पानी पर हरियाणा के दावे पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "हरियाणा द्वारा रावी-ब्यास के पानी पर अपना दावा करना बिल्कुल सही नहीं है, साथ ही यमुना के पानी में पंजाब के बनते जायज हिस्से को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि यमुना अविभाजित पंजाब का हिस्सा थी।"

आंकड़ा बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत हो गया

अपनी सरकार के कार्यकाल के दौरान सिंचाई के क्षेत्र में हुए बड़े बदलाव पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जब साल 2022 में उनकी सरकार ने पदभार संभाला तो पंजाब के पानी के संसाधनों का केवल 22 प्रतिशत उपयोग हो रहा था, जबकि अब यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत हो गया है।

उन्होंने कहा, "हमने पंजाब के सिंचाई नेटवर्क का व्यापक सुधार किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नहरी पानी हर खेत तक पहुंचे। राजबाहों की सफाई, 14,000 किलोमीटर पाइपलाइनें बिछाकर और नहरों तथा खालों का नवीनीकरण करके हमने सिंचाई प्रणाली को मजबूत किया है और किसानों तक पानी की पहुंच में बड़ा सुधार लाया है।"

आठ नई नहरें शुरू की

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने लगभग चार दशकों बाद कंडी नहर को पुनर्जीवित किया है और पठानकोट, अमृतसर तथा गुरदासपुर में आठ नई नहरें शुरू की हैं। उन्होंने कहा, "इन पहलों से सिंचाई की पहुंच में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है, सरकार के प्रयासों से 60.80 लाख एकड़ क्षेत्र की सिंचाई की जा रही है। हमारी प्रतिबद्धता पानी की हर बूंद का सही उपयोग करना, कृषि को मजबूत करना और किसानों को आवश्यक राहत प्रदान करना सुनिश्चित करना है।"

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि दशकों से पंजाब के हितों का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य को साल 1960 तक अपनी नदियों के पानी पर रॉयल्टी मिलती थी, जिसके बाद यह भुगतान पूरी तरह बंद हो गया। उन्होंने कहा, "पंजाब का अपनी नदियों के पानी की रॉयल्टी के रूप में 1.44 लाख करोड़ रुपये का जायज दावा बनता है। राजस्थान पंजाब से मुफ्त पानी प्राप्त कर रहा है और इसका उपयोग आर्थिक लाभ कमाने के लिए कर रहा है।

पंजाब के लोगों, विशेष रूप से हमारे किसानों ने देश का पेट भरने के लिए अथाह कुर्बानियां दी हैं।जब उनके अपने प्राकृतिक संसाधनों की बात आती है तो उनके साथ किया गया भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता।" मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सरकार पंजाब के पानी के अधिकारों की रक्षा करने और इसके लोगों को न्याय दिलाने के लिए हर जायज कदम उठाएगी।