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Wednesday, 16 September 2026

UPI New Rule: 2000 रुपये से ऊपर UPI Payment पर लगेगा चार्ज, 15 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम

UPI New Rule: 2000 रुपये से ऊपर UPI Payment पर लगेगा चार्ज, 15 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम

डेली संवाद, नई दिल्ली। UPI New Rule 2026: अगर आप UPI के जरिए पेमेंट करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI के मर्चेंट पेमेंट को लेकर नया Merchant Discount Rate (MDR) Framework जारी किया है।

नए नियम के तहत पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI Transactions में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। यह नया ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा।

हालांकि आम UPI यूजर के लिए राहत की बात यह है कि ₹2,000 तक के P2M भुगतान पर MDR नहीं लगेगा और Person-to-Person (P2P) ट्रांसफर भी मुफ्त रहेगा। छोटे कारोबारी भी निर्धारित सीमा के भीतर इस शुल्क से बाहर रहेंगे।

₹2,000 से ज्यादा UPI Payment पर क्या बदलेगा?

नए फ्रेमवर्क के तहत ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा। यह शुल्क मर्चेंट से लिया जाएगा, ग्राहक से नहीं।

उदाहरण के तौर पर:

  • ₹3,000 के भुगतान पर MDR करीब ₹12

  • ₹10,000 के भुगतान पर MDR करीब ₹40

  • ₹50,000 के भुगतान पर MDR करीब ₹200

₹75,000 या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन की सीमा रहेगी। इसलिए ₹1 लाख के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से ₹400 बनते हैं, लेकिन नए नियम में अधिकतम शुल्क ₹300 तक सीमित रहेगा।

ग्राहक को UPI Payment पर सीधे शुल्क नहीं देना होगा

NPCI के नए फ्रेमवर्क में MDR का भुगतान पात्र मर्चेंट करेगा। UPI ऐप कंपनियां ग्राहक से अलग से प्लेटफॉर्म या छिपा हुआ शुल्क वसूल नहीं कर सकतीं। P2P ट्रांसफर भी इस MDR व्यवस्था से बाहर रहेगा।

यानी किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को ₹5,000 या ₹50,000 भेजने पर इस नए MDR के तहत शुल्क नहीं लगेगा।

छोटे दुकानदारों को बड़ी राहत

नए नियम में छोटे कारोबारियों के लिए विशेष छूट रखी गई है। UPI QR के जरिए महीने में ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले माइक्रो मर्चेंट MDR से बाहर रहेंगे। ऐसे कारोबारी के किसी एक भुगतान की राशि ₹2,000 से ज्यादा होने पर भी निर्धारित छूट बनी रह सकती है।

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बैंकों और पेमेंट प्रोवाइडर्स को मर्चेंट की श्रेणी और उसके UPI कलेक्शन की निगरानी करनी होगी। रिपोर्ट के अनुसार लगातार तीन महीने तक ₹1 लाख से अधिक UPI कलेक्शन करने वाले कारोबारी को P2M श्रेणी में रखा जा सकता है।

रेलवे, टेलीकॉम और पेट्रोल-डीजल भुगतान पर सिर्फ ₹5

कुछ जरूरी सेवाओं के लिए सामान्य 0.4 प्रतिशत MDR के बजाय रियायती फ्लैट शुल्क रखा गया है। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसी निर्धारित श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR लागू होगा। कुछ सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं को भी इस रियायती व्यवस्था में शामिल किया गया है।

इसका उद्देश्य जरूरी और कम मार्जिन वाली सेवाओं में डिजिटल भुगतान की लागत को सीमित रखना है। म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार के भुगतान पर कितना शुल्क? पूंजी बाजार से जुड़े कुछ भुगतान के लिए MDR की दर और भी कम रखी गई है।

म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और स्टॉक ब्रोकर से जुड़े पात्र भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा। यहां भी प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम शुल्क ₹300 रहेगा।

UPI AutoPay पर नया MDR नहीं

नए फ्रेमवर्क के तहत UPI Mandate और AutoPay जैसे ऑटोमेटेड रिकरिंग पेमेंट पर निर्धारित नया MDR लागू नहीं होगा। इसी तरह क्रेडिट-लिंक्ड UPI पेमेंट अलग क्रेडिट प्रोडक्ट नियमों के तहत आते हैं।

छोटे UPI ट्रांजैक्शन प्रभावित नहीं

NPCI के मुताबिक ₹2,000 तक के छोटे P2M ट्रांजैक्शन UPI लेनदेन की संख्या में 95 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी रखते हैं। इसलिए रोजमर्रा के छोटे डिजिटल भुगतान इस नए MDR ढांचे से बाहर रहेंगे।

इसमें किराना, चाय-कॉफी, छोटी खरीदारी और अन्य रोजमर्रा के भुगतान शामिल हो सकते हैं, बशर्ते वे नए नियमों में निर्धारित छूट वाली श्रेणी में आते हों।

क्यों लाया गया MDR?

NPCI और उद्योग से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक UPI नेटवर्क को चलाने में सर्वर, तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्रॉड प्रिवेंशन, साइबर सिक्योरिटी और बैंकिंग टेक्नोलॉजी जैसी लागत आती है।

नए MDR से मिलने वाली राशि को UPI इकोसिस्टम की इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता, सुरक्षा, नवाचार और ग्राहक सेवा को मजबूत करने की दिशा में इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है।

UPI ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड

UPI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। अगस्त 2026 में UPI नेटवर्क पर करीब 2,451 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब ₹29.9 लाख करोड़ रही। 2016 में लॉन्च होने के बाद UPI भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का प्रमुख हिस्सा बन चुका है।

क्या UPI अब पूरी तरह पेड हो जाएगा?

नहीं। नए नियम का मतलब यह नहीं है कि हर UPI भुगतान पर शुल्क लगेगा।

आम यूजर के लिए महत्वपूर्ण बातें:

  • ₹2,000 तक के पात्र मर्चेंट UPI भुगतान पर MDR नहीं।

  • व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) भुगतान मुफ्त।

  • पात्र छोटे मर्चेंट MDR से बाहर।

  • ₹2,000 से अधिक के पात्र P2M भुगतान पर 0.4% MDR।

  • ₹75,000 या उससे अधिक के भुगतान पर अधिकतम ₹300 MDR।

  • रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसी निर्धारित श्रेणियों में ₹5 फ्लैट MDR।

  • म्यूचुअल फंड और सिक्योरिटीज जैसे निर्धारित पूंजी बाजार भुगतान पर 0.02% MDR।

  • UPI AutoPay पर नया निर्धारित MDR लागू नहीं होगा।

15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा नया UPI नियम

NPCI का नया MDR फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। इसका मुख्य असर बड़े और पात्र मर्चेंट UPI भुगतानों पर पड़ेगा, जबकि छोटे भुगतान और व्यक्ति-से-व्यक्ति ट्रांसफर पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे।

इस तरह नए नियम के बाद UPI पर शुल्क व्यवस्था पूरी तरह खत्म होने के बजाय लेनदेन की राशि, मर्चेंट की श्रेणी और भुगतान के प्रकार के आधार पर अलग-अलग होगी।