महाबीर जायसवाल, जालंधर (पंजाब)। भारत और कनाडा के बीच तल्ख होते रिश्ते से खासकर पंजाबी समुदाय चिंतित है। क्योंकि पूरी दुनिया में भारत के बाद सबसे ज्यादा पंजाबी कनाडा में रहते हैं। पंजाब में कहावत है कि कनाडा में ‘मिनी पंजाब’ बसता है। कारण, कनाडा की कुल आबादी का 2.6 प्रतिशत आबादी पंजाबियों की है।
कनाडा की आबादी तकरीबन 3.82 करोड़ है। इनमें से 2.6% यानी करीब 9.43 लाख पंजाबी कनाडा में बसते हैं। पंजाब के लोग न केवल कनाडा में नौकरी करते हैं, बल्कि वहां के कारोबार में अच्छा-खासा दबदबा बनाकर रखा है। कारोबार के अलावा कनाडा की राजनीति में भी पंजाबियों की अहम भूमिका है।
कनाडा में खेती और डेयरी उद्योग पर एक तरह से पंजाबियों का कब्जा है। चूंकि पंजाब के लोग खेती, किसानी और डेयरी उद्योग में भारत में भी सबसे आगे हैं, इसी तरह इसी कारोबार को पंजाबियों ने कनाडा में खूब फैलाया है। चूंकि भारत और कनाडा के बीच खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के कारण तनाव पैदा हो रहा है, इससे कनाडा में रहने वाले पंजाबियों के साथ साथ पंजाब में रहने वाले लोग भी डरे हुए हैं।
कनाडा और भारत के बीच शुरू हुए इस विवाद से व्यापार और कारोबारी ही नहीं, बल्कि कनाडा में बड़ी संख्या में रहने वाले पंजाबियों पर भी असर पड़ेगा। सबसे ज्यादा पंजाब में इमीग्रेशन कारोबार करने वाले लोग चिंतित है। पंजाब में अरबों का कारोबार अकेले इमीग्रेशन का है। इमीग्रेशन के साथ साथ पंजाब के उन लाखों युवाओं को डर सता रहा है, जिन्होंने कनाडा जाने के लिए तैयारी की है। क्योंकि पंजाब से हर साल हजारों स्टूडेंट्स कनाडा जाते हैं।
कनाडा और भारत के बीच पिछले साल 7 अरब डॉलर का कारोबार हुआ था। सरकारी रिकार्ड के मुताबिर वर्ष 2021-22 में दोनों देशों के बीच 7 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था। चालू वित्त वर्ष यानि 2022-23 के शुरुआती 6 महीनों में ही करीब 8.16 अरब डॉलर का व्यापार हो चुका है। कनाडा में खेती और किसानी के साथ दूध के कारोबार में पंजाबियों का पूरी तरह दबदबा है। कनाडा से खेती और बागबानी से जुड़े उत्पाद भारत सप्लाई होते हैं और इसका सीधा फायदा वहां रहने वाले पंजाबियों यानी भारतीयों को मिलता है।
पंजाब सरकार के मुताबिक कनाडा में इस समय पंजाब के करीब 1.60 लाख छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। ये सभी पंजाबी छात्र कनाडा में स्टडी वीजा पर गए हैं। अकेले पंजाब से हर साल औसतन 50 हजार युवा पढ़ने के लिए विदेश जाते हैं। जालंधर में इमीग्रेशन संचालकों के मुताबिक अगर प्रति स्टूडेंट 25 लाख रुपए की फीस मानी जाए तो हर साल अकेले पंजाब से करीब 12,500 करोड़ रुपए विदेश जाते हैं। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा कनाडा को ही मिलता है।
कनाडा में ईसाई, मुस्लिम और हिंदूओं के बाद सिख देश का चौथा सबसे बड़ा धार्मिक समूह है। सिखों की आबादी ओंटारियो, ब्रिटिश कोलंबिया और अल्बर्टा में केंद्रित है। कनाडा में अंग्रेजी और फ्रेंच के बाद पंजाबी तीसरी सबसे लोकप्रिय भाषा है। जस्टिन ट्रूडो साल 2015 में पहली बार प्रधान मंत्री बने, तो उन्होंने सिख समुदाय से चार मंत्रियों को चुना। यह संघीय स्तर पर समुदाय का उच्चतम प्रतिनिधित्व था।
विशेषज्ञों का कहना है कि गुरुद्वारों के माध्यम से पंजाबियों की नेटवर्किंग कनाडा में सबसे बेहतर है। कनाडा के 388 सांसदों में से 18 सिख हैं। इनमें से आठ सीटों पर पूरी तरह से सिखों का नियंत्रण है और 15 अन्य सीटों पर वे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि कोई भी राजनीतिक दल इस समुदाय को नाराज नहीं करना चाहता।
कौन है खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर?
कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की ओर से खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार का हाथ होने संबंधी संगीन आरोपों के बाद दोनों देशों की सरकारों के बीच तल्खी बढ़ गई है। हालांकि भारत सरकार ने ट्रूडो के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
आपको बता दें कि खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा के सरे सिटी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सरे के एक गुरुद्वारे की पार्किंग में दो युवकों ने निज्जर को गोली मारी थी। हरदीप सिंह निज्जर भारतीय एजेंसियों की मोस्ट वांटेड आतंकियों की लिस्ट में शामिल था। हरदीप निज्जर खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ) का चीफ था। वह मूल रूप से पंजाब के जालंधर जिले के शाहकोट के नजदीकी गांव भारसिंहपुर का रहने वाला था और लंबे समय से कनाडा रह रहा था।
हरदीप निज्जर की मौत से पहले एनआईए ने निज्जर के संगठन के करीबियों पर शिकंजा कसने के लिए पंजाब में कई जिलों में दबिश दी थी। यह दबिश एनआईए को मिले इस इनपुट के बाद दी गई थी कि केटीएफ के लिए फंड जुटाने के अलावा सीमा पार से हथियार और नशा तस्करी में केटीएफ से जुड़े लोग सक्रिय हैं।
पुलिस के मुताबिक आतंकी हरदीप सिंह निज्जर पंजाब में टारगेट किलिंग करवाता था। इसके अलावा निज्जर अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और कनाडा में भारतीय मिशनों के बाहर भारत विरोधी प्रदर्शनों का आयोजन करता था, इन प्रदर्शनों में वो भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा और झूठ फैलाता था। एनआईए ने हरदीप सिंह निज्जर पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को वांछित व विदेश में बैठ कर देश व पंजाब का माहौल खराब कर रहे दो बड़े आतंकियों की दो महीनों में गोलियां मार कर हत्या कर दी गई। हालांकि, इन हत्याओं के पीछे कौन है यह साफ नहीं हो पाया है। आतंकी संगठन खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) के चीफ परमजीत सिंह पंजवड़ की लाहौर में हत्या कर दी गई थी। पंजवड़ को जौहर कस्बे की सनफ्लावर सोसाइटी में घुसकर गोलियां मारी गईं।
पंजवड़ साल 1990 से पाकिस्तान में शरण लेकर बैठा था। वह वहां मलिक सरदार सिंह के नाम से रह रहा था। परमजीत सिंह पंजवड़ पंजाब में तरनतारन जिले में झब्बाल थाने के तहत गांव पंजवार के रहने वाले था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2020 में नौ आतंकियों की लिस्ट जारी की थी जिसमें परमजीत सिंह पंजवड़ का नाम आठवें नंबर पर था। दूसरी हत्या कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर की हुई है। उसे भी अज्ञात हमलावरों ने गोली मारी है।
निज्जर को 2020 में जारी की गई आतंकियों की लिस्ट में शामिल किया गया था। इन दोनों के अलावा कुछ दिन पहले ही ब्रिटेन में खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (केएलएफ) के अवतार सिंह खांडा की मौत हो गई थी। अवतार सिंह खंडा केएलएफ का ब्रिटेन में चीफ था। खंडा ब्लड कैंसर से पीड़ित था। वारिस पंजाब दे और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल को पंजाब में स्थापित करने में खांडा अहम भूमिका निभा रहा था।
इसी तरह गत वर्ष पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सहयोग से ड्रोन के जरिए पंजाब में हथियार भेजकर कई आतंकी घटनाओं को अंजाम देने वाले बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) के आतंकी हरविंदर सिंह रिंडा की लाहौर में मौत हो गई थी।








