डिप्स UE में कार्डियो पल्मोनरी रिससिटैंशन की कार्यशाला, जाने CPR से कैसे बच सकती है जान

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⏱️ 7 मिनट पढ़ने का समय|📝 825 शब्द|📅 23 Feb 2019

अपातकालीन स्थिति में सीपीआर द्वारा बचाई जा सकती है जान – सरतेग सिंह

डेली संवाद, जालंधर
डूबते को तिनके का सहारा, यह मुहावरा चितार्थ होता है जब किसी कारण वश किसी दिल के मरीज या घायल व्यक्ति सांस रुक जाने पर उसे सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटैंशन) द्वारा व्यवस्थित किया जाता है। आंकड़ों की माने तो सीपीआर एक ऐसी तकनीक है जिसके बारे में लोग पढ़ते और जानते तो हैं किन्तु सही ढंग से इस विधि को करने में असमर्थ होते हैं, क्योंकि सीपीआर सही ढंग से करने के लिए प्रशिक्षण अति आवश्यक है।

यह शब्द मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित सरतेग सिंह ने डिप्स स्कूल अर्बन अस्टेट के प्रांगण में सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटैंशन) से संबधित एक दिवसीय कार्यशाला दौरान कहे। उन्होंने कहा कि भारत में बहुत कम लोग ही प्रतिवर्ष सीपीआर की विधि द्वारा पुन: व्यवस्थित हो पाएं है। इसका तात्पर्य यह है कि लोगों में अभी भी सीपीआर के प्रति जागरुकता की कमी है। इसी के मद्देनकार डिप्स चेन के विभिन्न स्कूलों के साईंस से संबंधित अध्यापकों को सीपीआर बाबत विस्तार से जानकारी मुहैया करवाई गई।

सीपीआर संबंधित जानकारी को मुहैया करवाना ही डिप्स का मुख्य उद्देश्य

इस दौरान विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित डिप्स चेन की सी.ई.ओ मोनिका मंडोत्रा ने अध्यापकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि घर-घर तक सीपीआर संबंधित जानकारी को मुहैया करवाना ही डिप्स का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि भारत में केवल 46 प्रतिशत ही ऐसे लोग है जिन्हें अस्पताल की तुरंत सुविधा प्राप्त हो जाती है।

गत वर्ष भारत में 4280/100,000 के लगभग लोगों की मृत्यु सीपीआर की कमी से हुई, जब्कि यू.एस.ए में सीपीआर से रिकवर न होने वाले लोंगों की संख्या 60-151/100,000 है। भारत में कार्डियक अरेस्ट से ग्रस्त लोगों की संख्या प्रति वर्ष 58,000,000 के लगभग है। इसलिए डिप्स ने इस नोबल कॉज की जिम्मेवारी को लेते हुए ही इस कार्यशाला को आयोजित करवाया है।

जिसमें अध्यापकों को विस्तार से ज्ञान दिया गया तांकि वह स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को जानकारी प्रदान कर सके तथा विद्यार्थी घर जाकर अपने अभिभावकों के साथ इन विचारों को सांझा करें । जिससे इस चेन को आगे बढ़ाते हुए लोगों को इस के प्रति अवगत करवाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वह इस प्रकार की कार्यशाला का आयोजन करवाते रहेंगे।

सीपीआर क्या है

मुख्य वक्ता सरतेग ने कहा कि सीपीआर एक आपातकालीन स्थिति में प्रयोग की जाने वाली प्रक्रिया है जो किसी भी व्यक्ति की सांस रुक जाने पर या कार्डियक अरेस्ट में प्रयोग की जाती है, इस प्रक्रिया से बेहोश व्यक्ति को सांस दी जाती है, जिससे फेफड़ों को आक्सीकान मिलती है और सांस वापिस आने तक या दिल की धडक़न सामान्य होने तक छाती को दबाया जाता है, जिससे शरीर में पहले से मौजूद ऑक्सीजन वाला खून संचारित होता है।

उन्होंने कहा कि शरीर को यदि पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन न मिले तो कोशिकाएं बहुत जल्द खत्म होने लगती है, जिससे गंभीर नुक्सान या मौत हो सकती है, एेसी परिस्थिति में सीपीआर के द्वारा किसी व्यक्ति जी जान बचाई जा सकती है।

सीपीआर कब देना चाहिए

सरतेग ने जानकारी देते हुए बताया कि सीपीआर की जरूरत तब होती है जब कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए तथा उसी सांस व नब्ज रूक जाए या अचानक से बेहोश हुए व्यक्ति को होश में लाने पर भी यदि वह होश में न आए तो उसे सीपीआर की अवश्यक्ता पड़ सकती है।

सीपीआर देने से पहले करें जांच

किसी भी व्यक्ति को सीपीआर देने से पहले कुछ प्रिस्थितियों को जाँच लेना अति आवश्यक है। प्रथम चरण है डी से डेंजर, दूसरा चरण है आर से रिसपॉड, तीसरे चरण है एस से सैंड फॉर हैल्प, चौथा चरण है, ए से एयर वे , पांचवां चरण है बी से ब्रिथिंग आदि चरणों को जांचने के उपरांत ही अंतिम चरण, सी से कॉम्प्रैशन के द्वारा ही किसी व्यक्ति की सीपीआर तकनीक शुरु की जा सकती है।

कैसे देते है सीपीआर

सरतेग ने बताया कि सीपीआर में व्यक्ति की छाती को दबाने और मुंह से सांस देना शामिल है। इसी के साथ उन्होंने यह भी बताया कि हर व्यक्ति को एक ही प्रकार से सीपीआर नहीं दी जा सकती। बच्चों की सीपीअर देने का तरीका अलग है तथा बड़ों को सीपीआर देने का तरीका भिन्न है। इसलिए हमें पूरी ट्रेनिंग लेने के उपरांत ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए।

इस दौरान उन्होंने कार्डियक अरेस्ट तथा हार्ट अटैक में अंतर, के साथ साथ ए-गोनल ब्रीदिंग तथा एस्पायरेशन जैसी जरूरी विषयों बाबत भी विस्तार से जानकारी मुहैया करवाई। इस दौरान उन्होंने सीपीआर की प्रक्रिया को डैमों के माध्यम से सभी को अवगत करवाया तथा कहा कि बिना प्रैक्टिस तथा सही जानकारी के इस प्रक्रिया को नहीं किया जा सकता। कार्यशाला के अंत में उन्होंने अध्यापकों के साथ प्रश्नोत्तरी सैशन भी किया तथा उनके द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देकर अध्यापकों की जिज्ञासा को शांत किया।

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