जालंधर: रिहायशी इलाके में खुले अग्रवाल अस्पताल की मुश्किलें बढ़ी, अस्पताल हो सकता है सील, नगर निगम और विजिलेंस से शिकायत, जाने वजह

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डेली संवाद, जालंधर
रिहायशी इलाके जे.पी नगर में अग्रवाल अस्पताल नियमों की धज्जियां उड़ा कर चल रहा है और नगर निगम अफसरों से लेकर मेयर तक गूंगे बहरे की भूमिका में नजर आ रहे हैं। इस दावे/आरोप के साथ यूथ लीडर अभिषेक बख्शी ने इस अस्पताल के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला है।

यूथ लीडर अभिषेक बख्शी ने बताया कि उन्होंने इसके ख़िलाफ़ शिकायत दायर की है। आरोप लगाया कि शहर का यह हॉस्पिटल मेयर और निगम अधिकारियों की मेहरबानियों से अवैध रूप से संचालित किया जा रहा है।

इलाज के एवज में मोटी फीस वसूलते हैं

मीडिया को जानकारी देते हुए बक्शी ने कहा कि जेपी नगर स्थित यह अस्पताल शहर के नामी अस्पतालों में से एक है। रोजाना यहां सैकड़ों मरीज अपना इलाज कराने आते हैं। यहां के काबिल डॉक्टर उनसे इलाज के एवज में मोटी फीस वसूलते हैं। साथ ही दवा, जांच आदि के लिए भी मोटी राशि इस अस्पताल को आय के रूप में मिलती है।

उन्होंने कहा कि हैरान करने वाली बात यह है कि यह अस्पताल भी रेजिडेंशियल रोड पर अवैध बिल्डिंग में बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के संचालित किया जा रहा है। अस्पताल का कोई नक्शा पास नहीं कराया गया है।

कोई कंप्लीशन सर्टिफिकेट

दिलचस्प बात यह है कि यह अस्पताल जिस इमारत में चल रहा है उस इमारत में बिल्डिंग बायलॉज के हिसाब से कभी भी अस्पताल संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती। यही वजह है कि कॉमर्शियल बिल्डिंग में अवैध रूप से चल रहे इस अस्पताल को नगर निगम की ओर से कोई कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया।

अब सवाल यह उठता है कि अगर इस इमारत में अस्पताल संचालित ही नहीं किया जा सकता था तो फिर इतने वर्षों से इसमें अस्पताल कैसे चलाया जा रहा है? अस्पताल चला रहे थे तो फिर एक के बाद एक अवैध रूप से अस्पताल की ऊपरी मंजिलें कैसे बना दी गईं? नगर निगम इस ओर आंखें क्यों मूंदा रहा? मुद्दा अकाली भाजपा गठबंधन सरकार के समय का है तो फिर कांग्रेस सरकार आने के बाद भी इस अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

जगदीश राजा की क्या है मजबूरी

पूर्व मेयर सुनील ज्योति को सदन में हंगामा कर और अखबारों में बयानबाजी कर भ्रष्टाचारी करार देने वाले तत्कालीन नेता विपक्ष और वर्तमान मेयर जगदीश राज राजा मेयर बनने के बाद भी इस अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे? वो कौन सी मजबूरियां हैं जिन्होंने मेयर राजा के हाथ बांधे हुए हैं?

ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब जनता मेयर राजा और कांग्रेस पार्टी से चाहती है। सूत्र बताते हैं कि नगर निगम के बिल्डिंग इंस्पेक्टर, एटीपी से लेकर मेयर तक के हाथ लक्ष्मी के आगे मजबूर हैं। सब पैसे का खेल है. बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने नोटिस देकर खानापूर्ति कर दी. निगम में सिर्फ सत्ता बदलकर कांग्रेस के हाथ में आई है कार्यशैली नहीं बदली।



















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