डेली संवाद, चंडीगढ़। Navratri 2022: इस बार के शारदीय नवरात्रि आज से शुरू हो चुके है। नवरात्रि के 9 दिनों में देवी की अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। शैलपुत्री देवी दुर्गा के नौ रूप में पहले स्वरूप में जानी जाती हैं। यह नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा। नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को ‘मूलाधार’ चक्र में स्थित करते हैं।
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नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत रखते हैं। बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो नवरात्रि के दौरान जोड़ों में व्रत रखते हैं.अष्टमी पूजते हैं, वह जोड़े में पहला और सातवां व्रत रखते हैं वहीं जो लोग नवमी पूजते हैं। वह पहला और आठवां व्रत रखते हैं। वहीं कुछ लोग आखिरी के दो व्रतव्रत रखते हैं। वहीं कुछ लोग आखिरी के दो व्रत भी रखते हैं।
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नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। हिमालय की पुत्री होने के कारण माता रानी को शैलपुत्री कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना करने से मान-सम्मान में वृद्धि व उत्तम सेहत प्राप्त होती है। मां शैलपुत्री को सफेद वस्त्र अतिप्रिय हैं। ऐसे में नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा को सफेद वस्त्र या सफेद पुष्प अर्पित करना चाहिए। इसके साथ ही सफेद बर्फी या मिठाई का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
मां शैलपुत्री के मंत्र:
-ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
-वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
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