ADHD: क्या है ये ADHD? बच्चे आखिर क्यों हो रहे हैं इसके शिकार, जाने

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डेली संवाद, नई दिल्ली। ADHD: एडीएचडी (Attention-deficit hyperactivity disorder- ADHD) के साथ जीवन मुश्किल हो जाता है। अगर समय से इलाज न शुरू किया जाए तो समस्या और बढ़ जाती है। अक्सर यह समस्या बचपन में ही शुरू होती है, जिसका इलाज न मिलने पर यह समस्या आगे चलकर और गंभीर रूप ले लेती है।

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इसके कुछ लक्षण बचपन में नजर आने लगते हैं, जिनकी मदद से इसका पता लगाया जा सकता है। इसलिए इसके क्या लक्षण हो सकते हैं, यह जानना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं, एडीएचडी के बच्चों में क्या लक्षण हो सकते हैं और बड़ों में क्या हो सकते हैं।

क्या है एडीएचडी?

अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जिसकी शुरुआत बचपन में होती है और यह बड़े होने तक चल सकती है। यह एक लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है, जिसमें बच्चों को किसी भी चीज पर बहुत देर तक ध्यान लगाने में, लंबे समय तक एक ही जगह बैठने में दिक्कत होती है।

इसके साथ ही वे अपने बर्ताव पर भी काबू नहीं रख पाते और बिना सोचे समझे कुछ भी कर देते हैं। इसका कोई इलाज नहीं है, न ही इससे बचाव का कोई तरीका, लेकिन इसके लक्षणों पर ध्यान देकर इसका जल्दी पता लगा सकते हैं, जिससे इसके लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। यह लड़कियों की तुलना में लड़कों में अधिक पाया जाता है।

क्या हैं इसके लक्षण?

  • एडीएचडी के लक्षण बच्चों में कुछ इस तरह के हो सकते हैं।
  • जल्दी डिस्ट्रैक्ट हो जाते हैं।
  • खोए-खोए से रहते हैं।
  • निर्देशों का पालन नहीं करते।
  • लापरवाही करते हैं।
  • चीजें भूल जाते हैं या खो देते हैं।
  • ज्यादा समय लगने वाले कामों को नहीं कर पाते।
  • ज्यादा देर तक एक ही जगह बैठ नहीं पाते या हिलते-डुलते रहते हैं।
  • चीजें ऑर्गेनाइज करने में दिक्कत होती है।
  • बहुत बोलते हैं।
  • अपनी बारी आने का इंतेजार नहीं करते।
  • बीच में बात काट देते हैं।
  • हमेशा इधर-उधर भागते रहते हैं।
  • टाइम मैनेजमेंट में दिक्कत।

इन लक्षणों के आधार पर एडीएचडी तीन प्रकार के हो सकते हैं।

हाइपरएक्टिव-इंपल्सिव- इसमें बच्चे शांति से एक जगह बैठ नहीं पाते। हमेशा हिलते-डुलते रहते हैं। यह इंपल्सिव तरीके से व्यवहार करते हैं। ये अपनी बारी का इंतजार नहीं कर पाते। दूसरों को बीच-बीच में टोकते रहते हैं या बीच में जवाब देने लगते हैं।

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इनअटेंटिव- इसमें बच्चे खोए-खोए रहते हैं। अपने काम पूरे करने में तकलीफ होती है। लापरवाही के कारण गलतियां करते हैं। अपने रोज के काम करना भूल जाते हैं। अक्सर अपनी चीजें खो देते हैं। दूसरों की बाते नहीं सुनते और न ही निर्देषों का पालन करते हैं।

कंबाइन्ड- इसमें दोनों के मिले-जुले लक्षण नजर आते हैं, लेकिन अक्सर ऐसा नहीं होता है।

वयस्कों में एडीएचडी के लक्षण कुछ इस तरह के हो सकते हैं।

  • अक्सर लेट होते हैं।
  • एंग्जायटी
  • थकावट
  • नकरात्मक सेल्फ इमेज
  • गुस्सा कंट्रोल करने में दिक्कत
  • मूड स्विंग्स
  • डिप्रेशन
  • रिलेशनशिप में समस्याएं
  • फ्रस्टेशन
  • सबस्टान्स अब्यूज (नशे के लत)

क्या हो सकता है इसका इलाज?

इस कंडीशन को कभी ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। अक्सर इसके इलाज के लिए ज्यादातर बिहेविरियरल थेरेपी और दवाईयों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ ही हेल्दी रहना इस कंडीशन में और भी जरूरी हो जाता है। इसके लिए अपने बच्चों को हेल्दी खाना खिलाएं, एक्सरसाइज करवाएं, भरपूर नींद लेने दें और स्क्रीन टाइम कम करने को कहें।

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