Aaj Ka Panchang: आज गोवर्धन पूजा का पर्व, भगवान कृष्ण जी की करें पूजा, जाने पंचांग

डेली संवाद, जालंधर। Aaj Ka Panchang 02 November 2024: आज 02 नवंबर, दिन शनिवार है। आज गोवर्धन पूजा (Govardhan Puja) का पर्व मनाया जा रहा है। यह पूर्ण रूप से भगवान कृष्ण (Lord Krishna) को समर्पित है। ऐसा कहा जाता कि जो साधक इस दिन भाव के साथ पूजा-पाठ करते हैं, उन्हें धन, सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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ज्योतिषियों के अनुसार गोवर्धन पूजा से जीवन में शुभता आती है। आज के दिन (Govardhan Puja 2024) की शुरुआत करने से पहले यहां दिए गए शुभ व अशुभ समय को अवश्य जान लें। आईए पंडित प्रमोद शास्त्री से जानते हैं पूजा विधि और पंचांग, जो इस प्रकार हैं।

Govardhan Puja

Aaj Ka Panchang 02 November 2024: आज का पंचांग –

  • पंचांग के अनुसार, आज कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि रात्रि 08 बजकर 31 मिनट तक रहेगी।
  • ऋतु – शरद
  • चन्द्र राशि – तुला

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

  • सूर्योदय – सुबह 06 बजकर 29 मिनट पर
  • सूर्यास्त – शाम 05 बजकर 41 मिनट पर
  • चंद्रोदय – सुबह 07 बजकर 13 मिनट पर
  • चन्द्रास्त – शाम 06 बजकर 11 मिनट पर

शुभ मुहूर्त

  • त्रिपुष्कर योग – रात्रि 08 बजकर 21 मिनट से सुबह 05 बजकर 58 मिनट तक
  • ब्रह्म मुहूर्त – 04 बजकर 50 मिनट से 05 बजकर 42 मिनट तक
  • विजय मुहूर्त – दोपहर 01 बजकर 55 मिनट से 02 बजकर 39 मिनट तक
  • गोधूलि मुहूर्त – शाम 05 बजकर 35 मिनट से 06 बजकर 01 मिनट तक
  • निशिता मुहूर्त – रात्रि 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक।
Vishnu Ji

अशुभ समय

  • राहु काल – सुबह 09 बजकर 23 मिनट से 10 बजकर 39 मिनट तक
  • गुलिक काल – सुबह 06 बजकर 28 मिनट से 08 बजकर 01 मिनट तक।
  • दिशा शूल – पूर्व

ताराबल

भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती।

चन्द्रबल

मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर।

गोवर्धन पूजा के मंत्र

ॐ कृष्णाय नमः।।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।।
ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान। यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्‍टं च लभ्यते।।
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम् ।। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् । वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥

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