डेली संवाद, जालंधर। Chaitra Navratri 2025: आज से चैत्र नवरात्रि शुरू हो गया है। ‘कलशस्य मुखे विष्णुः कंठे रुद्रः समाश्रितः …’ मंत्र के साथ रविवार को कलश स्थापना की जाएगी और इसी के साथ नवरात्र (Chaitra Navratri) की शुरुआत हो जाएगी। भक्त सुबह से ही कलश स्थापना कर सकते हैं।
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यदि अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना चाहते हैं तो 11 बजकर 36 मिनट से अभिजीत मुहूर्त शुरू होगा। पंडित अनिल शुक्ला ने बताया कि 11.36 से लेकर 12.24 तक अभिजीत मुहूर्त है। वैसे, दिन भर मां दुर्गा की स्थापना कर सकते हैं।

मंदिरों में विशेष तैयारियां
शहर के मंदिरों में भी नवरात्र और रामनवमी को लेकर विशेष तैयारी की गई है। श्री देवी तालाब मंदिर, श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर, छोटी अयोध्या में भी रामनवमी को लेकर विशेष तैयारी की गई है। चैत्र नवरात्र का समापन 6 अप्रैल को होगा।
नवरात्र का अर्थ
नवरात्र का अर्थ है 9 रातें, जिसमें मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना होती है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होकर यह पर्व 9 दिन तक चलता है। नवरात्र देशभर में श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है।
नवरात्र का पर्व शक्ति की पूजा का प्रतीक है, जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है। पहले दिन से लेकर नौवें दिन तक हर दिन एक देवी के रूप की पूजा की जाती है।

मां के इन रूपों का होता है पूजन
इन रूपों में पहले दिन मां शैलपुत्री, दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन मां चंद्रघंटा, मां कुष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री प्रमुख हैं।
प्रत्येक देवी के रूप में विशिष्ट ऊर्जा और शक्ति का वास माना जाता है। इनकी उपासना से भक्तों को मानसिक शांति, आत्मविश्वास तथा जीवन में हर तरह की समृद्धि प्राप्त होती है।

चैत्र नवरात्र का महत्व
चैत्र नवरात्र का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी विशेष है। यह पर्व विशेष रूप से नववर्ष की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है, जहां लोग अपने जीवन को नए दृष्टिकोण से जीने का संकल्प लेते हैं।
व्रत रखकर मां की अराधना
नवरात्र के दौरान व्रत, उपवास, पूजा-अर्चना,भजन-कीर्तन और संकल्पों का आयोजन होता है। विशेष रूप से इस समय व्रती लोग सात्विक आहार, योग और ध्यान का पालन करते हैं, जिससे शरीर और मन की शुद्धि होती है।


